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*2026  बड़े राजनैतिक बदलाव का वर्ष*  

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परमजीत बाॅबी सलूजा

देश की दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों में इस वर्ष बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। बिदा लेते वर्ष ने इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं। देश की राजनीति जिस तरह से करवट ले रही है, उसमें यह फेरबदल लाज़िमी है। 16 जनवरी से 25 फरवरी के मध्य दोनों दलों में व्यापक बदलाव होंगे। मुझे तो इस पर भी आश्चर्य नहीं होगा कि वर्ष के अंत में देश लोकसभा के मध्यावधि चुनावों के मुहाने पर हो। 

सर्वप्रथम बात सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की। पूरी संभावना है कि भाजपा के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष श्री नितिन नबीन ही पूर्णकालिक अध्यक्ष पद पर आसीन होंगे। इसके साथ ही संगठन में  बड़े बदलाव के साथ नए चेहरों को मौका मिलेगा। केंद्रीय मंत्रिमण्डल में भी पुनर्गठन तय है। वर्तमान के छह से सात केंद्रीय मंत्रियों को हटाकर कुल पंद्रह नए मंत्री शपथ ले सकते हैं, छत्तीसगढ़ से एक और सांसद को कैबिनेट में स्थान मिल सकता है। तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे, केशव मौर्य, नरोत्तम मिश्रा, बांसुरी स्वराज, मिलिंद देवड़ा, शाहनवाज हुसैन आदि को भी अवसर मिल सकता है। इसके अलावा पांच से छह नए राज्यपालों की नियुक्ति की जाएगी। कम से कम दो मुख्यमंत्रियों के बदले जाने की पुरजोर गुंजाइश है। छत्तीसगढ़ की सत्ता में सब कुछ ठीक नहीं है, यहां मंत्रिमंडल पुनर्गठन निश्चित है, चार से पांच पुराने चेहरों की जगह नए मंत्री शामिल किए जाएंगे। एक बात स्पष्ट है कि संघ और भाजपा में कोई दूरी, तनाव या खटास नहीं है। निश्चित लक्ष्य के लिए दोनों एकराय हैं। 

कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 2025 को संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी को संगठनात्मक मजबूती प्रदान करने में अपनी ऊर्जा लगाई अब 2026 में कांग्रेस बड़े बदलाव की तरफ बढ़ने जा रही है। यह बदलाव बड़े पैमाने पर कई स्तरों पर होने जा रहे हैं। पार्टी सही समय पर ठोस निर्णय लेने की असमंजस वाली अपनी पुरानी बीमारी से निजात पाने की ओर चल पड़ी है। पार्टी में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को भी अमलीजामा पहनाया जा रहा है। अब पार्टी नेतृत्व को अंधेरे में रखने वाले चेहरों के दिन लदने वाले हैं। काफी सकारत्मक बदलाव होने जा रहे हैं। 

अभी स्थिति यह है कि कांग्रेस का आम कार्यकर्ता ही दिग्भर्मित है कि ऊपर उसकी आवाज सुनने वाला कौन है ? आदरणीय खड़गे जी, कि राहुल जी, या प्रियंका जी, या फिर वेणुगोपाल जी ? इस पर से संशय हटने को है। शीर्ष स्तर पर सबकी भूमिका, जिम्मेदारी तय होने वाली है ताकि आम कार्यकर्ताओं को स्पष्ट रहे कि किस मसले पर किससे अपनी बात रखनी है। उन्हें आसानी से मिलने, बात रखने की नईं व्यवस्था पर काम चल रहा है ताकि समय रहते जमीनी फीडबैक के आधार पर निर्णय लिया जा सके। 

पार्टी संगठन में व्यापक फेरबदल बहुत जल्द देखने को मिलेगा। मेरे अनुमान से पार्टी प्रियंका गांधी को अपना कार्यकारी अध्यक्ष बनाने जा रही है। अगर सचिन पायलट राजस्थान में काम करने की बजाए दिल्ली में ही सक्रिय रहते हैं तो वह नए संगठन महासचिव नियुक्त होने जा रहे हैं, अन्यथा राहुल जी के विश्वस्त, पूर्व आईएएस तथा तमिलनाडु से सांसद शशिकांत सेंथिल  इस पद पर आ सकते हैं। पवन खेड़ा को जयराम रमेश की जगह मीडिया विभाग के प्रमुख का दायित्व सौंपा जा सकता है। इसी प्रकार से जल्द ही कुछ राज्यों में प्रदेशाध्यक्ष बदले जाएंगे साथ ही कुछ राज्यों के CLP भी फेरबदल की जद में आयेंगे। CWC तथा CEC में भी व्यापक बदलाव कर नए लोगों को मौका मिलने जा रहा है।

मेरा मानना है कि आनेवाले दिनों में स्थितियां कांग्रेस के पक्ष में रिवर्स होने वाली हैं, 2012 से लोग कांग्रेस छोड़कर जा रहे थे पर अब कई लोगों की घर वापसी होने जा रही। वरुण गांधी, प्रशांत किशोर, अवध ओझा, डॉ. काफिल आदि कांग्रेस में शामिल होंगें जबकि पंजाब से कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, मनप्रीत बादल, राजकुमार वेरका अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में वापसी करेंगे तथा नवजोत सिद्धू दंपत्ति भाजपा का रुख करेंगे। अन्य राज्यों में भी यह सिलसिला शुरू होगा जिसमें गुजरात, हरियाणा, आसाम, गोवा शामिल हैं। पार्टी में जिग्नेश मेवाणी, कन्हैया कुमार, चरणजीत सापरा, सुरेन्द्र राजपूत, आलोक शर्मा, बी वी  श्रीनिवास जैसे चेहरों का कद बढ़ेगा।

आज देश में जिस प्रकार का माहौल है, जनता राजनीतिक दलों से निराश हो रही है, एक तरफ जहां भाजपा ने अपने को केवल चुनाव जीतने में ही सक्रिय रखा है, देश की प्रमुख गंभीर समस्याओं पर उसकी उदासीनता जनता को उद्वेलित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जनता कांग्रेस से भी ज्यादा जुड़ाव नहीं दिखा रही है, दोनों में विश्वास का संकट साफ देखा जा सकता है। क्षेत्रीय दलों से भी जनता का मोहभंग हो रहा है। ऐसे में अगर राजनैतिक दल आम जनता से संबद्ध नहीं होते हैं तो देश किसी बड़े जनांदोलन के लिए तैयार रहे। 

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