इंदौर
प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस नेताओं ने इंदौर में टिकट की दावेदारी के लिए ताल ठोंकना शुरू कर दी है। सालभर पहले हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस ने जहां बहुत आसानी से और बहुत पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था, वहीं आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इंदौर की सीटों पर कांग्रेस आलाकमान को टिकट तय करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इंदौर की 9 में से तीन विधानसभा में तो कांग्रेस के पास सिंगल नाम हैं, लेकिन अन्य 6 विधानसभा में तीन से चार दावेदार हैं। वहीं महू में सबसे ज्यादा 5 नाम निकलकर सामने आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर इंदौर से कांग्रेस के कुल 24 प्रत्याशी टिकट के लिए दावा कर रहे है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान का कहना है कि इस बार सर्वे, विनिंग कैंडिडेट और जनता में लोकप्रिय व्यक्ति को ही टिकट मिलेगा। यानी जिताऊ के साथ टिकाऊ चेहरा होना चाहिए।
इंदौर की 9 विधानसभा में कांग्रेस से यह 24 नाम कर रहे तैयारी
– विधानसभा क्षेत्र 1 में सिंगल नाम है संजय शुक्ला का, यह वर्तमान में विधायक है। यहां पूर्व में कांग्रेस से दावेदारी करने वाले कमलेश खंडेलवाल पार्टी छोड़ चुके हैं।
– विधानसभा क्षेत्र 2 में भी सिंगल नाम चिंटू चौकसे हैं। यह फिलहाल पार्षद हैं। निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं। यहां पर पूर्व उम्मीदवार मोहन सेंगर सिंधिया खेमे के थे जो भाजपा से जुड़ गए हैं।
1 नंबर से संजय शुक्ला तो वहीं 2 नंबर से चिंटू चौकसे सिंगल दावेदार हैं।
– विधानसभा क्षेत्र 3 में 2018 के चुनाव में दो दावेदार थे लेकिन इस बार 3 दावेदार हैं। पिछली बार चुनाव हारे पूर्व विधायक अश्विन जोशी दावेदार हैं। उनके अलावा उन्हीं के परिवार और दिग्गज कांग्रेस नेता महेश जोशी के बेटे पिंटू जोशी और प्रदेश कांग्रेस के महासचिव अरविंद बागड़ी भी टिकट को लेकर दावा ठोंक रहे हैं। ध्यान रहे कि बागड़ी को एक दिन के लिए कांग्रेस शहराध्यक्ष बनाया गया था, बाद में नियुक्त होल्ड कर दी थी।
बाएं से अश्विन जोशी, अरविंद बागड़ी और युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पिंटू जोशी।
– विधानसभा क्षेत्र 4 में इस बार 3 दावेदार हैं। पहला नाम अक्षय कांती बम (शिक्षाविद), दूसरा नाम राजा मंगवानी (व्यापारी) तो तीसरा नाम मुकेश सचदेव (सिंधी समाज के नेता) का है। बताया जा रहा है कि पार्टी यहां से इस बार सिंधी समाज के प्रत्याशी को लड़ाना चाहती है। सिंधी बहुल एरिया है। भाजपा के सांसद शंकर लालवानी भी सिंधी है और इसी इलाके से आते हैं।
कांग्रेस से इस बार विधानसभा 4 से तीनों नए नाम सामने निकलकर आए हैं।
– विधानसभा क्षेत्र 5 में 2018 के चुनाव में 13 दावेदार थे लेकिन इस चुनाव के लिए 4 दावेदार ही सामने आए हैं। पिछला चुनाव 1100 वोट से हारे सत्यनारायण पटेल सबसे मजबूत दावेदार हैं। वे प्रियंका गांधी के करीबी बताए जाते हैं। इनके अलावा शिक्षाविद से राजनीति में आए स्वप्निल कोठारी, प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष शेख अलीम और युवा कांग्रेस के शहराध्यक्ष रह चुके अमन बजाज टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। अमन के लिए युवा कांग्रेस के नेता भी फिल्डिंग कर रहे हैं।
सत्यनारायण पटेल, अमन बजाज, स्वप्निल कोठारी और अलिम शेख कर रहे दावेदारी।
– विधानसभा राऊ में भी 1 और 2 की तरह सिंगल नाम पूर्व मंत्री जीतू पटवारी का है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि पटवारी इस बार अपनी सीट को बदलने की इच्छा भी रख रहे हैं। वे महू या कालापीपल से दावेदारी कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि राऊ के बजाय महू में मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी की सभा कराना उनकी इसी इच्छा का हिस्सा है। वहीं महूं जाने का कारण उनके समर्थक यह भी बता रहे हैं कि राऊ विधानसभा में जितने खाती और मुस्लिम वोटर है लगभग उतने ही खाती और मुस्लिम वोटर महूं विधानसभा में भी है।
सूत्रों का कहना है कि पटवारी इस बार अपनी सीट बदल सकते हैं।
– विधानसभा सांवेर में इस बार 4 दावेदार हैं। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। इनमें प्रेमचंद गुड्डू की बेटी रीना बौरासी, राजेंद्र मालवीय, तुलसी सिलावट के भांजे ओम सिलावट और बंटी राठौर तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह मंत्री तुलसी सिलावट की परंपरागत सीट है जो सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए हैं। इसी कारण दूसरे दावेदारों की बांछें खिल गईं।
सांवेर विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है।
– विधानसभा महू में इस बार सबसे ज्यादा 5 नेता अपनी दावेदार कर रहे है। तीन बार से चुनाव हार रहे अंतरसिंह दरबार, इंदौर ग्रामीण जिलाध्यक्ष सदाशिव यादव, भंवरीलाल स्वीट्स के मालिक नवीन सैनी, पुनीत शर्मा और प्रदेश कांग्रेस महासचिव गोलू अग्निहोत्री महू से टिकट के लिए दावा कर रहे हैं।
विधानसभा महू में इस बार सबसे ज्यादा 5 नेता अपनी दावेदार कर रहे हैं।
– विधानसभा देपालपुर में पिछली बार 3 नाम थे लेकिन अब 2 ही नाम हैं। देपालपुर से मौजूदा विधायक विशाल पटेल और दुग्ध संघ के अध्यक्ष मोती सिंह पटेल दावेदारी कर रहे हैं। पहले सत्यनारायण पटेल भी यहां से दावेदारी करते आए हैं लेकिन इस बार उनका फोकस पांच नंबर सीट पर ही है।देपालपुर से मौजूदा विधायक विशाल पटेल के अलावा मोती सिंह पटेल भी कर रहे दावेदारी।
महू सीट पर सबसे ज्यादा 5 नेता कर रहे दावेदारी
इंदौर ग्रामीण में आने वाली महू विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 5 दावेदार ताल ठोंक रहे हैं जबकि पिछले तीन चुनाव से लगातार यह सीट पार्टी हार रही है। इसके बावजूद यह सीट इस बार दावेदारों को आसान दिख रही है। विधानसभा क्षेत्र 2 से जहां सिंगल नाम है, तो वहीं 4 से तीन लोग अपनी दावेदारी जताने में लगे हैं। यह ऐसी सीटें हैं जहां से कांग्रेस 7 बार से हार रही है। विधानसभा 1 और राऊ से दावेदार अपना नाम लगभग तय ही मान रहे हैं।
शहर की सीटों पर लगातार हार रही कांग्रेस
इंदौर में कांग्रेस 6 सीटों पर लगातार चुनाव हार रही है। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में विधानसभा क्षेत्र 1 में भाजपा को हराया था। लेकिन इससे पहले 3 बार से कांग्रेस यहां हार रही थी। क्षेत्र 2 में कांग्रेस पांच बार से भाजपा से बुरी तरह से हार रही है। क्षेत्र 3 में पिछले दो बार से भाजपा जीत रही है। इसके पहले कांग्रेस के पास यह सीट थी। वहीं क्षेत्र 4 में भी कांग्रेस को 7 चुनाव से जीत नसीब नहीं हुई है। वहीं क्षेत्र 5 में कांग्रेस तीन बार से हार रही है। यहां से 15 साल पहले मौजूदा विधायक सत्यनारायण पटेल का टिकट कांग्रेस ने बदला था। उसके बाद से ही यह सीट कांग्रेस के हाथ में दोबारा नहीं आई। हालांकि पिछला चुनाव 15 दिन की तैयारी में लड़कर पटेल ने जीत का अंतर सिर्फ 1100 पर ला दिया था।कांग्रेस आलाकमान ने दिग्विजय सिंह को उन सीटों की जवाबदारी दी है जहां पर पार्टी लगातार चुनाव हार रही हैं। जिसके तहत वह इंदौर में इन सीटों पर बैठकें भी ले चुके हैं।
ग्रामीण में कभी जीत, कभी हार
इंदौर ग्रामीण में आने वाली चार विधानसभा सीटों में से 1 या दो सीट हमेशा कांग्रेस के पास रही है। राऊ में कांग्रेस पिछले दो चुनाव जीती है। लेकिन 2008 में यहां पहली बार चुनाव हुए थे, जब यह सीट भाजपा के पास थी। राऊ का आधा हिस्सा शहर में तो आधा ग्रामीण में आता है। वहीं देपालपुर में 2013 में भाजपा जीती थी, लेकिन 2018 में कांग्रेस ने इसे जीता। इसके पहले यानी 2008 में भी यह सीट कांग्रेस के पास थी। इसी तरह सांवेर सीट पर देपालपुर की तरह ही परिणाम आए थे। इसी तरह महू की सीट कांग्रेस लगातार तीन बार हार रही है। इससे पहले 3 बार लगातार यह सीट कांग्रेस के पास थी।
जिसको टिकट मिलेगा उसके लिए पूरी कांग्रेस मिलकर काम करेगी
कांग्रेस के शहर अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा करवाए गए सर्वे के आधार पर ही टिकट वितरण होगा। वहीं चुनाव के लिए नेताओं की दावेदारी टिकट की लड़ाई नहीं है, यह आपसी प्रतिस्पर्धा है। पार्टी सर्वे करा रही है, इसमें तय होगा की कौन बेस्ट प्रत्याशी है। भाजपा में एक-एक विधानसभा में 5 से 6 प्रत्याशी हैं। इसलिए यह लड़ाई नहीं है, यह प्रतिस्पर्धा है। जो पार्टी सर्वे में बेस्ट आएगा, उसका नाम टिकट के लिए नॉमिनेट हो जाएगा। उसके लिए पूरी कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे।

