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पहली बुलेट ट्रेन…पार्ट-4:साबरमती में 300 करोड़ का मल्टीमॉडल हब तैयार, इसमें 5 स्टार होटल भी रहेगा

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अहमदाबाद

गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन के पास 9 मंजिला एक बिल्डिंग तैयार हो रही है। 90% से ज्यादा काम हो चुका, बस फाइनल टच दिया जा रहा है। बगल में बड़े एरिया में कंस्ट्रक्शन भी चल रहा है। ये देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन है। 9 मंजिला बिल्डिंग भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। ये मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब है, जिसमें पैसेंजर्स के ठहरने के लिए 5 स्टार होटल रहेगा। इसके अलावा स्विमिंग पूल, फूडकोर्ट, कॉमर्शियल स्टोर्स और सरकारी ऑफिस भी होंगे।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर इस सीरीज की पहली स्टोरी में आपने सभी 12 स्टेशनों की वर्क प्रोग्रेस के बारे में पढ़ा, दूसरी स्टोरी में बुलेट ट्रेन के ट्रैक, ब्रिज और टनल के बारे में पढ़ा, तीसरी स्टोरी में पढ़ा कि ट्रैक के लिए पिलर और गर्डर कैसे बनाए जा रहे हैं। इस स्टोरी में पढ़िए साबरमती स्टेशन पर बने मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के बारे में। ये पूरे प्रोजेक्ट में तैयार होने वाला पहला स्ट्रक्चर है। इसे जल्द ही लोगों के लिए खोला जा सकता है।

स्टेशन का काम 20% पूरा, पहला स्टेशन इसलिए मॉडल के तौर पर डेवलप होगा
पुराने यार्ड की जमीन पर बन रहा साबरमती हाई स्पीड रेलवे स्टेशन दो रेलवे स्टेशनों के बीच में है। इसके पास ही दो मेट्रो स्टेशन और एक BRTS स्टॉप भी है। मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब की बिल्डिंग दूर से दिखने लगती है। इसकी सामने की दीवारों पर दांडी यात्रा की रेप्लिका उकेरी गई है।

बिल्डिंग का काम 7 मई 2019 से शुरू हुआ था। अभी इसका काम आखिरी फेज में है। कहीं लाइट्स लगाई जा रही हैं, तो कहीं फ्लोर पर लगी टाइल्स को चमकाया जा रहा है। ये हब भले ही 90% से ज्यादा तैयार हो चुका है, लेकिन स्टेशन का काम अभी सिर्फ 20% ही हो पाया है।

यहां हमें मल्टी मॉडल हब और स्टेशन का काम देख रहे नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अरुण कुमार सिंह मिले। वे कहते हैं, ‘ये देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन होगा, इसलिए इसे मॉडल के तौर पर डेवलप किया जा रहा है।

साबरमती मल्टीमॉडल हब और स्टेशन का काम देख रहे NHSRCL के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अरुण कुमार सिंह।

अरुण कुमार बताते हैं कि मल्टीमॉडल हब की फायर परमिशन और लिफ्ट ऑपरेशन की मंजूरी के लिए लेटर दे दिया गया है। इलेक्ट्रिक का काम पूरा हो गया है। जल्द यहां कॉमर्शियल एक्टिविटी शुरू करने की कोशिश है।

हमने अरुण कुमार से पूछा कि स्टेशन का काम इतनी धीमी रफ्तार से क्यों चल रहा है। उन्होंने बताया कि ‘यहां अक्टूबर 2019 में काम शुरू हुआ था। कोविड की पहली और दूसरी लहर के दौरान एक साल तक काम बंद रहा। कोविड से पहले यहां 1 हजार लोग काम करते थे। बीच में हमें 250 लोगों से काम चलाना पड़ा। अब फुल कैपेसिटी से काम हो रहा है। हमारे सेक्शन में 352 किलोमीटर के ट्रैक में से 97 किलोमीटर के पिलर्स का काम हो चुका है। सेक्शन में आने वाले आणंद, बिलिमोरा और सूरत स्टेशन पर काम जारी है।’

मेट्रो, बस और रेलवे स्टेशन से फुटओवर ब्रिज कनेक्ट होगा, मेट्रो स्टेशन तक ब्रिज तैयार

मल्टीमॉडल हब को मेट्रो स्टेशन से जोड़ने वाले फुटओवर ब्रिज का काम लगभग पूरा हो चुका है। ये ब्रिज बिल्डिंग के पार्ट ए को मेट्रो स्टेशन से कनेक्ट करता है।

अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, ‘मल्टीमॉडल हब की लागत 332 करोड़ रुपए है, इसमें से 300 करोड़ खर्च हो चुके हैं। ये हब मेट्रो, बस, और रेलवे स्टेशन से स्काईवॉक और फुटओवर ब्रिज के जरिए कनेक्ट होगा। इससे पैसेंजर को किसी भी जगह जाने में आसानी होगी। रेलवे स्टेशन तक FOB तैयार है। हाई स्पीड ट्रेन स्टेशन तक जाने वाले FOB का काम थोड़ा बचा है। जून में वह भी पूरा हो जाएगा।’

ग्रीन बिल्डिंग, जो 30% तक एनर्जी बचाएगी, ठंडा रखने के लिए स्टेप बाई स्टेप गार्डन बनाकर प्लांटेशन
अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मल्टी मॉडल हब को ग्रीन बिल्डिंग की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे IGBC गोल्ड रेटिंग दिलाने के लिए अप्लाय किया जा रहा हैं। कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री को पर्यावरण के लिए संवेदनशील बनाने के मकसद से इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल यानी IGBC बनाई गई थी।

नॉन प्रॉफिट मोड पर काम करने वाली IGBC बिल्डर्स, आर्किटेक्ट, डेवलपर्स को पर्यावरण के लिहाज से बिल्डिंग डिजाइन करने और बनाने के लिए प्रेरित करती है। अगर कोई बिल्डिंग 7-R यानी रिथिंक, रियूज, रिड्यूस, रिफ्यूज, रिफर्बिश, रिकवर और रिसाइकल के पैमाने पर खरी होती है, तो उसे प्लेटिनम, गोल्ड और सिल्वर रेटिंग दी जाती है।

मल्टीमॉडल हब में 20 से 50% पानी और 30% तक एनर्जी की बचत की जा सकती है। टेरेस पर भी गार्डन एरिया है। बिल्डिंग को ठंडा रखने के लिए स्टेप बाई स्टेप गार्डन बनाकर प्लांटेशन किया गया है।

अभी मल्टीमॉडल हब को फाइनल टच देने का काम चल रहा है। पूरी तैयारी है कि इसे जून में शुरू कर दिया जाए।

पानी बचाने पर जोर, यूज वाटर साफ करके दोबारा इस्तेमाल होगा
अरुण सिंह के मुताबिक, यह एक वाटर और एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंग है। यहां यूज होने वाला वाटर डिस्चार्ज नहीं होगा। उसे साफ करके फिर से इस्तेमाल किया जाएगा। पानी की बर्बादी न हो इसलिए एफिशिएंट पाइप लाइन और सेनेटरी फिटिंग्स लगाई गई हैं। इससे पानी में उतना ही प्रेशर होगा, जितनी जरूरत है। हम इंडियन ग्रीन बिल्डिंग के सभी नॉर्म्स को इम्प्लिमेंट कर रहे हैं। IGBC की गोल्ड रेटिंग के बाद इसे प्लेटिनम रेटिंग दिलवाने की कोशिश करेंगे।

महात्मा गांधी 12 साल साबरमती में रहे, इसलिए डिजाइन दांडी मार्च पर रखी गई
अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि महात्मा गांधी ने साबरमती से ही दांडी मार्च शुरू किया था। बापू साबरमती नदी के किनारे बने आश्रम में 12 साल तक रहे थे। इसी से प्रेरित होकर हमने हब का डिजाइन तैयार किया है।मल्टीमॉडल हब के बाहरी हिस्से में दांडी मार्च की रेप्लिका बनी है। इसे दिल्ली के गांधी मार्च स्टैच्यू की तरह बनाया गया है।

बाहरी हिस्से में दांडी मार्च की स्टेनलेस स्टील से बनी रेप्लिका है, जिसमें आगे महात्मा गांधी और पीछे बाकी सत्याग्रहियों को देखा जा सकता है। दांडी मार्च से जुड़े 11 स्ट्रक्चर बने हैं, हर एक की हाइट करीब 15 मीटर है।

चीफ प्रोजेक्ट मैनजर अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि शुरुआत में बिल्डिंग की छत पर चरखे की आकृति बनाने का भी प्लान था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे कैंसिल कर दिया गया।

3500 सोलर पैनल्स लगाए गए, इनसे 750 किलोवॉट बिजली तैयार होगी
अरुण सिंह के मुताबिक, बिल्डिंग की छत पर लगे 3500 सोलर पैनल्स से 750 किलोवॉट बिजली जनरेट होगी। इन पैनल्स को ऐसे इंस्टॉल किया गया है कि सूरज की रोशनी इन पर सही ढंग से पड़ेगी। बिल्डिंग में ग्रीन और लैंडस्केप एरिया ज्यादा नजर आता है। इससे गर्मियों में तापमान कम रहेगा।

मल्डीमॉडल हब में 4 फ्लोर तक पार्किंग, 1300 गाड़ियों के लिए जगह
अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि इस बिल्डिंग में पार्किंग के लिए बेसमेंट समेत चार फ्लोर बनाए गए हैं। यहां 1300 से ज्यादा गाड़ियों के लिए जगह है। इनमें कार, बस, थ्री और टू-व्हीलर शामिल हैं। थर्ड फ्लोर पर वेटिंग एरिया, रिटेल शॉप और रेस्टोरेंट के लिए स्पेस है।

मल्टीमॉडल हब में 1300 वाहनों के लिए पार्किंग की जगह है। इसके लिए बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, पहली और दूसरी मंजिल पर स्पेस बनाया गया है।

बिल्डिंग दो पार्ट में, पहले हिस्से में 7 और दूसरे में 9 फ्लोर
मल्टी मॉडल हब A और B पार्ट में डिवाइड है। A पार्ट में 7 और B पार्ट में 9 फ्लोर हैं। A पार्ट में फाइव स्टार होटल होगा। B पार्ट में 8वें और 9वें फ्लोर पर कॉमर्शियल स्पेस के अलावा रेलवे और NHSRCL के ऑफिस होंगे। इसके अलावा जापान के कुछ कंसल्टेंट ऑफिस भी इसी बिल्डिंग में होंगे।

अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, ‘पूरी बिल्डिंग को मेक इन इंडिया इनीशिएटिव के तहत बनाया गया है। इसमें लगा पूरा मैटीरियल स्वदेशी है और इंटरनेशनल नॉर्म्स को पूरा करता है। डिजाइन, ड्राइंग से लेकर काम करने वाले लोग भी भारतीय हैं। पहले इसका काम रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड यानी राइट्स के पास था। उन्होंने टेंपरेरी मॉडल डेवलप किया, फिर NRHCL के चीफ आर्किटेक्ट ने इस पर काम किया है। बिल्डिंग में इस्तेमाल पीला रंग सुख, शांति और ज्ञान का प्रतीक है।’मल्टीमॉडल हब बुलेट ट्रेन के साबरमती स्टेशन के ठीक सामने होगा। स्टेशन पर अभी बेस और पिलर्स का काम ही चल रहा है।

अरुण सिंह कहते हैं कि अच्छी बात ये रही कि कंस्ट्रक्शन के दौरान कोई हादसा नहीं हुआ। आगे भी ऐसा न हो, इसके लिए सेफ्टी का बहुत ध्यान रखा गया है। बिल्डिंग में 5 फायर एस्केप एरिया बनाए गए हैं। कोई हादसा होता है, तो लोग आसानी से गार्डन एरिया में जा सकते हैं।

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