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बहुजन संवाद के 582 दिन

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बहुजन संवाद यू ट्यूब चैनल मनोरंजन की जगह पर देश और दुनिया में होने वाले परिवर्तनों, भारत के सविंधान, भारत के कानून, खेती, किसानी, बेरोजगारी, तथा राजनीतिक विषयों पर चर्चा रोज आयोजित करने वाला चैनल है। बहुजन संवाद ने देश की जनता को विभिन्न मुद्दों पर जागृत करने व रूह को झकझोरने का प्रयास किया है और इसके माध्यम से भागीदारी बढ़ती दिखाई दे रही है।

बहुजन संवाद ने देश में मनाये जाने वाले तीज-त्योहार पर भी प्रकाश डाला है, किसान आन्दोलन, तीन किसान विरोधी कानून, मिट्टी सत्याग्रह आदि विषयों से देश की जनता को जोड़ा है। यूएपीए जैसे कानून बनाकर केन्द्र सरकार ने भारत के सविंधान की आत्मा को ललकारा है। पेसा कानून, भारत के सविंधान की पाॅचवी तथा छटवीं अनुसूची से देश के नागरिकों को वंचित किया है। मुस्लिम महिलाओं को वोट बैंक की वस्तु समझकर तीन तलाक का कानून बनाकर उन्हें आर्थिक तंगी के दलदल में ढकेल दिया है। तीन तलाक के कानून का देश में किसी भी वर्ग ने विरोध नही किया है, किन्तु कानून में संशोधन करने की बारीकी से बहुजन सवांद में चर्चा की है।

परिवार न्यायालय में बढ़ते हुए मुकदमें और समस्याओं के निदान पर चर्चा की गई,मोबाईल के अत्याधिक उपयोग ने पारिवारिक रिस्तों को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। 12 जनवरी 1998 को नष्ट हुई फसल का मुआवजा मांगने पर मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित मुलताई तहसील में किसानों पर किये गये गोली चालन के परिणाम स्वरूप 24 किसान शहीद हुए, 150 किसान घायल हुए तथा एक ही घटना के 67 मुकदमें 250 किसानों पर लादे गये। जिसमें किसान आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे डाॅ. सुनीलम् सहित 4 आन्दोलनकारियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यहीं से ही किसान आन्दोलन का अंकुर निकला, बहुजन सवांद में इस पर विस्तार से चर्चा की गई। हर महिने की 12 तारीख को किसान महापंचायत करके देश के किसानों की समस्या पर प्रकाश डाला।

देश में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ कानून की जानकारी, महिलाओं का सम्पत्ति पर अधिकार, कार्य स्थल पर यौन शौषण रोकने तथा महिलाओं के मानसिक रोग तथा उनके कानूनी अधिकार पर समय समय पर चर्चा की। मुस्लिम महिलाओं के सम्पत्ति पर अधिकार पर विशेषतौर पर चर्चा में ताहिरा हसन जी एवं सईदा वारसी जी ने विशेष रूचि ली। कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखरेख करने वाली धायमाँ किस तरीके से अपने बच्चे को भूखा छोड़कर दूसरे के बच्चे की देखरेख में अपना जीवन खपा देती है। कानून बनने के पश्चात् भी कार्य स्थल पर यौन शौषण रोकने में सरकार की विफलता देश के सामने लाने में बहुजन संवाद की अहम भूमिका रही।

त्रिपुरा में सम्प्रदायिक दंगे होने के पश्चात् 10 मस्जिद को जलाने तथा एक जाति विशेष के खिलाफ वैमनश्यता  फैलाने और उनके व्यवसाय नष्ट करने की खबर को उजागर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 4 अधिवक्ताओं के खिलाफ यूएपीए का कानून लगाकर अपराध पंजीबद्ध करने के खिलाफ बहुजन संवाद ने अपनी विशेष भूमिका निभाई। जिसमें सुप्रीमकोर्ट की अधिवक्ता कंवलप्रीत कौर जी ने विशेष रूचि दिखाई। दिपावली का पर्व पूरे देश में मनाया जाता है। अलग अलग राज्यों में, अलग अलग जातियों में किस तरह की परम्परा है। यह भी बहुजन संवाद ने अपने दर्शकों को दिखाया।

मुफ्त राशन योजना बन्द कर 80 करोड़ लोगों को भूखा छोड़ने की सरकार की नीयत को देश की जनता के सामने रखने का काम बहुजन संवाद द्वारा किया गया। दशहरे के पर्व पर आज के रावण कौन ? विषय पर प्रकाश डाला, समाजवादी आन्दोलन में महिलाओं की अहम भूमिका देश के सामने रखी, तीन किसान विरोधी कानून संविधान को ताक में रखकर कैसे बनाये, यह विषय देश के नागरिकों को समझाने में बहुजन संवाद सफल रहा।

किसान आन्दोलन देश के वर्तमान राजनीति में किस तरह बदलाव ला सकता है, देश की मिट्टी से देश के किसान का जुड़ाव किस तरीके से है यह बात भी बहुजन संवाद ने आपने दर्शकों के सामने सरल शब्दों में रखा, आपसे  अनुरोध है कि रोज शाम 6ः00 बजे किसी खास विषय पर होने वाली चर्चा और 7ः00 बजे बहुजन संवाद समाचार विश्लेषण को जरूर देखें।

आप यदि अपने विचार रखना चाहते हैं या आपको लगता है कि खास विषय पर चर्चा कुछ खास वक्ताओं के साथ होनी चाहिए तो आप अपने सुझाव हमें भेज सकते है, आपके इलाके में हो रहे आन्दोलन की जानकारी भी बहुजन संवाद समाचार विश्लेषण के साथ सांझा करें।

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