
-निर्मल कुमार शर्मा
हम लोग बचपन में अपनी पाठ्यपुस्तकों में एक भोली लड़की और एक खूंख्वार भेड़िए की कहानी पढ़े थे,जिसमें एक दुष्ट भेड़िया किस प्रकार उस भोली लड़की की नानी की साड़ी पहनकर उससे छल करने की कोशिश करने का प्रयास करता है,लेकिन उसके तेज दाँत,उसके बड़े-बड़े कान और उसके पंजों को देखकर वह लड़की उसकी असलियत को पहचान जाती है और बड़ी कठिनाइयों से संघर्ष करके उससे अपनी जान बचाती है ! आज इस देश रूपी एक भोली लड़की उस धूर्त और छद्म भेष धरे भेड़िए रूपी नृशंस सत्ताधारियों के चंगुल में बुरी तरह फँस गया है। अभी हाल ही में हर सुखसुविधा संपन्न भारतीय संसद भवन के रहते हुए भी एक नये संसद भवन बनाने की तुगलकी,पागलपन भरे निर्णय के प्रारम्भ करने के लिए एक विराट आयोजन में इस देश का क्रूर,अमानवीय, असभ्य, असंवेदनशील,बर्बर प्रधानमंत्री लोकतंत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘हम भारत के लोग मिलकर अपनी संसद के इस नये भवन को बनाएंगे,इससे सुन्दर क्या होगा कि हमारी आजादी के 75 वें साल में संसद के नये भवन का निर्माण हो रहा है,मैं अपने जीवन में वह क्षण कभी भूल नहीं सकता,जब मुझे 2014 में पहली बार संसद भवन आने का मौका मिला,उस अवसर पर मैंने इस के दरवाजे पर अपना सिर झुकाकर, माथा टेककर लोकतंत्र के इस पावन मंदिर को नमन किया था,भारत में लोकतंत्र एक जीवनपद्धति है,जीवन तत्व भी है,एक लोकमूल्य भी है,तत्व भी है,जीवनमूल्य भी है….। ‘* अभी हाल ही में भारत के एक लब्धप्रतिष्ठित कवि की एक कविता ‘तमाशेबाज राजा ‘वायरल हुई है,उन्होंने उक्त अपनी व्यंग्य कविता में एक तमाशेबाज राजा के कृत्यों का अपनी कविता के माध्यम से व्यंग्यात्मक भाषा में बहुत बेहतरीन ढंग से और बड़े ही सहज ढंग से वर्णन किया है। उनकी कविता में की गई घटनाओं का उस राजा और आधुनिक समय में भारत की राजनैतिक हालात में अद्भुतरूप से गजब की साम्यता है,उदाहरणार्थ कवि ने अपनी गंभीर कविता में बताया है कि ‘प्रजा ने साफ पानी की आव़ाज उठाई,तो राजा ने तेज बहती नदी पर हवाई जहाज तैरा दिया,बस्ती में आग लग गई, तो उसे बुझाने के बजाय, राजा आग लगे गोल छल्लों में से आर-पार कूदना शुरू कर दिया,लोगों ने यातायात की सुविधा बढ़ाने और आरामदायक बनाने की माँग किए,तो राजा मौत के कँए में गोल-गोल चक्कर लगाने लगा, बेरोजगारी से तंग राज्य के युवकों ने राजा से अपने लिए काम मांगा,तो राजा अपने हाथ पीछे बाँध लटकी जलेबियों को खाने के लिए कूदने लगा,प्रजा ने मंहगाई की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश किया तो राजा एक गुफा में जाकर ध्यान की मुद्रा में बैठ गया,प्रजा काम की बात करनी चाही तो राजा ‘मन की बात ‘करने लगा,कवि के अनुसार तमाशा दिखाने की खूबी यह है कि तमाशे देखकर प्रजा अपने मूल मुद्दों से भटक जाती है,खामी यह है कि राजा को नित नया तमाशा दिखाना पड़ता है।
कवि की उक्त बातें आज भारत की हक़ीक़त बन गई है। जब देश में ‘शराबबंदी ‘ करनी थी,तब ‘नोटबंदी ‘करके देश की अर्थव्यवस्था की चूलें हिला दी गई,जब टैक्स के बोझ से बुरी तरह त्रस्त आम छोटे-बड़े व्यापारियों को राहत प्रदान करनी थी,उसी समय जीएसटी लाकर उन सभी की कमर तोड़ दी गई,इस देश की बेपटरी हुई स्वास्थ्य और शिक्षा को पुनः पटरी पर लाने के लिए देश भर में जब सैकड़ों एम्स और आईआईटी खोले जाने चाहिए थे,यहाँ के लाखों गाँवों में प्राइमरी, जूनियर, हाई स्कूल और शिक्षण संस्थाएं खोली जानी थीं या जो हैं उनके ढहते-गिरते भवनों की मरम्मत करनी थी,तब यहाँ 30 अरब रूपयों की पटेल की अनावश्यक लोहे की मूर्ति बनाने में उड़ा दिया गया,भारत की रेलों में आलू के बोरों की तरह ठूंसकर जानेवाली जनता की सुविधा के लिए सामान्य रेलों में सुधार करने की तुरंत दरकार थी,तब 11 खरब की ‘बुलेटट्रेन परियोजना ‘को जापान से कर्जा लेकर हरी झंडी दिखा दी गई,जब देश में पानी पीने के लिए लोग त्राहि-त्राहि किए हैं,तब हिमालय के पर्यावरण और जैव विविधता तथा लाखों पेड़ों को नष्ट करते हुए 12 अरब की ‘चारधाम सड़क योजना का शिलान्यास ‘कर दिया गया, जब अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से लाखों किसान खुदकुशी कर रहे हैं,आज लाखों किसान दिल्ली सल्तनत के दरवाजे पर दिसम्बर की इस रात में बस अपने फसल की जायज कीमत की माँग पर बैठे हैं तो दिल्ली का यह असंवेदनशील निजाम 9 अरब 71 करोड़ का नया संसद भवन खूब गाजेबाजे व जश्न के साथ बनवाने में लगा है ! जबकि इस दुनिया के सबसे धनी और ताकतवर माने जाने वाले देश अमेरिका के राष्ट्रपति का निवास ह्वाइट हाउस का भवन सन् 1792 में बना हुआ है,नार्वे जैसा देश जो लोकतांत्रिक देशों में अपने सुशासन के लिए अव्वल नंबर पर है,वहाँ की भी संसद 1882 की बनी हुई है ! इसके विपरीत भारतीय संसद अंग्रेजों द्वारा एक बहुत ही विश्व प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार के कुशल निर्देशन में 1921 से 1927 के बीच बनी थी,
असहिष्णुता,अमानवीयता,क्रूरता की पराकाष्ठा की सीमा भी टूट गई है,जब यह सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री एक साल से ज्यादा वक्त तक इस देश की भीषण गर्मी, बरसात और सर्द रातों में खुली सड़क पर बैठे अन्नदाताओं से मिलने की तो बात छोड़िए, उनके बारे में एक शब्द तक नहीं बोला है ! उधर इलाहाबाद में कुछ दिनों पूर्व भारतीय समाज के परजीवी,नंग-धड़ंग, चरित्रहीन कथित साधुओं के लिए कुंभ मेले के लिए 40 अरब रूपये उड़ा दिए गए,जब कोरोना संक्रमित मरीजों के असली योद्धाओं यथा डॉक्टरों, नर्सों व अन्य स्टॉफ के लिए दास्ताने, मास्क, सेनेटाइजर, टेस्टिंग किट,पीपीई,वेंटिलेटर आदि जीवनरक्षक उपकरणों के लिए पैसे की सख्त जरूरत थी,इस हेतु कर्मचारियों और पेंशनरों तक की मंहगाई भत्ते तक पर रोक लगाई जा रही थी,तब मेहुल चोकसी जैसे बडे़ आर्थिक अपराधियों, देश के दुश्मनों के खरबों रूपये माफ किए जा रहे थे,जब अपने किए वादे के अनुसार प्रति वर्ष दो करोड़ युवाओं को नौकरी देकर देश को आगे बढ़ाने पर गंभीरतापूर्वक,संजीदगी से कार्यान्वयन करना था,तब आईआईटी पास अतिप्रतिभाशाली युवाओं से ‘पकौड़ा तलने ‘ की वीभत्स व विद्रूप तथा मसखरापन भरा सलाह दी जा रही थी,जब पूरे देश में अमन-शांति,भाईचारे की सख्त जरूरत थी,तब हिन्दू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान, मंदिर-मस्जिद के नाम पर जहर उगलकर ‘नफ़रत की फस़ल ‘ लहलहाई जा रही थी,जब देश में प्रचंड मंहगाई से अपनी प्रजा को राहत देनी थी,तब देश भर में अपने दल बीजेपी के अरबों रूपये खर्च कर सैकड़ों आलीशान कार्यालय बनवाए जा रहे थे,जब आतंकवाद से ग्रस्त श्रीनगर में हवाईमार्ग से अपने जवानों को सुरक्षित ले जाना चाहिए था,तब खटारा बसों से सड़क मार्ग से उन्हें ले जाकर 40 जवानों की निर्मम हत्या करवाकर,खुद हिमालय की सुरम्य वादियों में फिल्म की सूटिंग कराई जा रही थी,पिछले दिनों जब देश भर में अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर फंसे यहाँ के उद्योगों की रीढ़ करोड़ों मजदूरों को 40 दिनों तक भूखे-प्यासे उनकी हालात पर छोड़ दिया गया है,तब कोटा से और विदेशों से अमीरों और उनके बच्चों को लक्जरी बसों से और विमानों से उनके घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है।
एक तरफ लगभग 50 करोड़ लोग कोरोना वायरस से नहीं अपितु भूखों मरने के कग़ार पर है,उनकी खाने की व्यवस्था न करके,अब लखनऊ, गुवाहाटी, जयपुर, चेन्नई,श्रीनगर, पोर्टब्लेयर, हैदराबाद, दिल्ली आदि देश भर के शहरों में तथा जयपुर के जलमहल,भोपाल के बड़ा तालाब, हैदराबाद के हुसैनसागर,मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया आदि जगहों पर सैकड़ों हेलिकॉप्टरों से अनावश्यक ,करोड़ों-अरबों खर्च करके पुष्प वर्षा का फूहड़ प्रदर्शन ‘डॉक्टरों,नर्सों और मेडिकल स्टॉफ ‘ के अभिनन्दन के नाम पर हो रहा ! उनका वास्तविक अभिनन्दन तो उनके लिए दास्ताने, मास्क, सेनेटाइजर, टेस्टिंग किट,पीपीई,वेंटिलेटर आदि जीवनरक्षक उपकरणों की जरूरतों को पूरा करने से ही होता,परन्तु इस ‘तमाशेबाज राजा ‘को कौन समझाए !
कितने दुर्भाग्य और अलोकतांत्रिक और हतप्रभ करनेवाली बात है कि इसी देश में जब प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े,नब्बे प्रतिशत विकलांग प्रोफेसर साईंनाथ, बारबरा राव,स्टेन स्वामी, सुधा भारद्वाज,जैसे सैकड़ों निर्दोष प्रोफेसरों,डॉक्टरों, वकीलों,कवियों,लेखकों,मानवाधिकार कार्यकर्ताओं आदि पर आतंकवादियों पर लगाई जाने वाली धाराएं लगाकर अनावश्यक रूप से जेल में डालने जैसे कुकृत्य और अभी इसी साल फरवरी में कपिल मिश्रा,प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे दंरिदों को जो खुलेआम सांप्रादायिक और जातीय बैमनस्यताभरे,उत्तेजक, गालीगलौज वाली भाषा का प्रयोग करके दिल्ली में भयानक दंगे भड़काकर सैकड़ों निर्दोष,गरीब लोगों की जान ले लिए और अरबों की सम्पत्ति नष्ट करा दिए,वे अभी भी जंगली जानवरों की तरह मुक्त हैं,इसी भारत सरकार के गृह मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार 2014 से मार्च 2018 तक दरिंदों द्वारा 45 बेचारे गरीब,निरपराध पशुपालकों और अल्पसंख्यकों को मिथ्यारोपड़ करके सड़कपर घसीट-घसीट कर उनकी निर्ममता से हत्या कर डाली गई और 285 लोगों को पीट-पीटकर उन्हें लहूलुहान कर दिया गया ! नेशनल अपराध रिसर्च ब्यूरो मतलब एनसीआरबी के अनुसार इस देश की दलित महिलाओं से प्रतिदिन 1400 बलात्कार हुए मतलब हरेक मिनट कहीं न कहीं दलित महिलाओं से बलात्कार हो रहा होता है,केवल 2014 के एक साल में दलितों के खिलाफ 47064 अपराध हुए,मतलब हर 12 मिनट पर दलितों के साथ शादी में घोड़े पर चढ़ने,मूँछ रखने,कथित सवर्णों की मेज पर खा लेने और मरी गाय के चमड़े को न छीलने के कथित अपराध में उनके साथ गालीगलौज, मारपीट और उनकी हत्या तक कर दी जाती है।
हमारी आजादी के 75 साल होने पर हमारे देश के लोकतंत्र की मर्यादा तब बढ़ती जब इस देश की आमजनता,किसान, मजदूर सभी लोगों को अपना जीवन सुखपूर्वक जीने के लिए देश में सभी के लिए अनुकूल वातावरण पैदा किया जाता ! इस देश में सही और असली लोकतंत्र की स्थापना संसद के भव्य और विलासिता पूर्ण ऐशोआराम से सम्पन्न संसद भवन की नई बिल्डिंग बना देने से नहीं,अपितु प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े,नब्बे प्रतिशत विकलांग प्रोफेसर साईंनाथ, बारबरा राव,स्टेन स्वामी, सुधा भारद्वाज,जैसे सैकड़ों निर्दोष प्रोफेसरों, डॉक्टरों,वकीलों,कवियों, लेखकों,मानवाधिकार कार्यकर्ताओं आदि पर आतंकवादियों पर लगाई जाने वाली धाराएं लगाकर अनावश्यक रूप से जेल में डालने जैसे कुकृत्य को सुधारकर उन बेगुनाह लोगों को छोड़ देने से,कपिल मिश्रा,प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे दंरिदों को जो खुलेआम सांप्रादायिक और जातीय बैमनस्यताभरे,उत्तेजक, गालीगलौज वाली भाषा का प्रयोग करके दिल्ली में भयानक दंगे भड़काकर सैकड़ों निर्दोष,गरीब लोगों की जान ले लिए और अरबों की सम्पत्ति नष्ट करा दिए,वे अभी भी जंगली जानवरों की तरह मुक्त हैं,उन्हें कठोरतम् दंड देकर,इन सर्द रातों में बैठे किसानों और अन्नदाताओं को उनकी जायज माँग मानकर उन्हें उनकी फसलों की जायज कीमत देने से,करोड़ों शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने से,इस देश के लोगों में सर्वव्याप्त अशिक्षा, गरीबी, कुपोषण, भूखमरी आदि को समाप्त कर ,जिंदगी की न्यूनम आवश्यकताओं से वंचित उन लोगों को जीवन में खुशियाँ और खुशहाली लाकर इस देश में वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना होगी,केवल जुमलेबाजियाँ करने से वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना कभी नहीं होगी।_
_-निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण व समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पर्यावरण, राजनीति, अंधविश्वास,आदि पर निष्पृह,निष्पक्ष,बेखौफ व स्वतंत्र लेखन,गाजियाबाद,पिन नंबर 201009,उप्र.