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मनचाहा फल प्रदान करता है समर्पण भाव से किया गया व्रत

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हमारे ऋषि-मुनियों ने बताया है कि व्रत तप का ही एक प्रासंगिक संक्षिप्त स्वरूप है। व्रत का विधान अधिकतर आध्यात्मिक या मानसिक शक्ति की प्राप्ति, चित्त अथवा आत्मा की शुद्धि, संकल्प शक्ति की दृढ़ता, वातावरण की पवित्रता, विचारों के उच्च एवं स्वास्थ्य के लिए हितकारी होता है। भारतीय संस्कृति में हमारे शास्त्रों के अनुसार व्रत के द्वारा व्यक्ति अपने भौतिक एवं पारलौकिक संसार की सुव्यवस्था करता है। इसमें प्रत्येक वर्ण, वर्ग, आयु, जाति, साधना पद्धति, आश्रम और अभिलाषा के लिए एक समान अवसर होता है।किसी भी व्रत के दौरान व्रत के विधान एवं नियम-संयम का पालन करने पर धर्मशास्त्रों में अधिक जोर दिया गया है। सही विधि-विधानपूर्वक इष्ट देवी-देवता के प्रति समर्पण भाव से किया गया व्रत मनचाहा फल प्रदान करता है। सम्पूर्ण फल के लिए व्रत के दिन इस प्रकार की हो दिनचर्या एवं इस प्रकार करें पूजन।

व्रत के दिन क्या करें –
 व्रत के दिन प्रातःकाल नित्यप्रक्रिया सम्पन्न करके शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए। उसके बाद पूर्व या ऊपर दिशा की ओर अभिमुख होकर हाथ में जल, चावल, सुपारी, पैसे और पुष्प लेकर मांगलिक व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेने से व्यक्ति की आंतरिक प्रमुख शक्तियां सजग होकर उनका मनोबल बढ़ाती है एवं श्रद्धा और विश्वास से मन ओत-प्रोत हो जाता है। व्रत के दिन मन से प्रसन्न होकर दिनचर्या निभानी चाहिए, इस दिन यथासंभव मौन रहने से आंतरिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

व्रत मानसिक एवं शारीरिक रूप से पवित्र रहने पर ही पूर्ण फलप्रदाता है। व्रत के दिन क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, परनिंदा, आलस्य से बचना चाहिए। व्रत के दिन उससे सम्बन्धित देवी-देवता का ध्यान करके उनका चिंतन, दिन में उनकी महिमा का सात्विक साहित्य अध्ययन करने से मानसिक बल की प्राप्ति होती है। व्रत करते हुए दिन में सोने से परहेज करना अति उत्तम माना गया है। भारतीय संस्कृति में व्रत के पश्चात् अपने आराध्य को पूजा एवं मंत्र जप से प्रसन्न करें।

शिव-पार्वती से सम्बन्धित व्रतों में भगवान शिव की आराधना में धूप, दीप, गंध, चंदन का तिलक, चावल, बिल्वपत्र, पुष्प, शहद, यज्ञोपवीत, धतूरा, कमलगट्टा, आक का फल या फूल से अर्चना करें। मां गौरी को सुहागिन स्त्रियां और कुंवारी कन्याएं श्रृंगार भेंट करें। अति प्रसन्न एवं श्रद्धापूर्वक लाल हरी या पीतांबरी रंग की चुनरी उढ़ाए। शुद्ध घी का दीपक लगाकर आरती उतारें। भगवान शिव भोलेबाबा एवं मां गौरी अति कृपालु हैं, वे सुहागिन स्त्रियों का पति की दीर्घायु, सफल जीवन का एवं कुंवारी कन्याओं को मनोवांछित वर की प्राप्ति कराने में विलंब नहीं होने देते। अत्यंत श्रद्धापूर्वक किया गया प्रत्येक व्रत मनोकामना पूर्ति का सेतु बनता है।

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