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~डॉ. प्रिया मानवी
_प्रेम का ऎसा जीवनसत्य जो शायद हर एक जिंदगी में घटित होता है. जो सुना-पढ़ा तो जरूर गया पर समझा-जिया नही गया। जिसे मेंरे प्रियतम द्वारा मुझे लिखा गया यह ख़त बयां करता है :_
"तुम कभी मत कहना कि आज भी तुम्हारी फिक्र होती है. कोई रिश्ता अब भी है, ये कभी न कहना.
_इस रिश्ते को तोड़ देने की ओर उठने वाला तुम्हारा हर कदम तुम्हारी मजबूरी नहीं, चुनाव था।_
कभी इंसानियत के नाते कोई कोमल शब्द मत कहना. हम जैसे लोग सच मान लेते हैं।
_अपनी सहानुभूति कभी मत जताना वो अपनी गलती ढकने का सबसे सस्ता और आसान जरिया है।_
आत्मग्लानी और माफी का वजूद वहां होता जहां कुछ गलती से हो गया हो.
जहां सब कुछ सोच समझ कर स्वयं लिया गया निर्णय हो वहां क्षमा भाव कैसा? यह तो स्पष्ट शब्दों में सरासर धोखा है।
प्रेम का चित्र एक के ऊपर एक कई रंगों को चढ़ा कर बनाया जाता है. जब प्रेम का रंग उतरता है तो अपने साथ उन भीतर छुपे कई और खूबसूरत रंगों को भी उतार देता है।
तुमने कभी सुनने की कोशिश ही नहीं की : ना कहे शब्दो को, ना शोरभरी खामोशी को। जब इंसान का मोल नही है, तो उसके शब्दों के मोल कहां से होंगे।
मैं शक्तिविहीन हूं अब. अपने दर्द पीकर खामोश रहने में मैने अपनी सारी ताकत लगा दी।
अकेले को और अकेला कर के
तुम ऐसे सहज रहे जैसे कुछ हुआ ही नहीं क्योंकि वो करना सिर्फ तुम्हारी इच्छा थी। तुम्हारी जिंदगी तो आगे बढ़ जाएगी, मेरी जिंदगी का क्या : जो फिर पहले जैसी कभी नहीं हुई।
ये मत भूलना तुम्हारी माफी की चंद पंक्तियाँ गुजरी हुई कई रातों और आने वाली कई रातों की नींद और दु:ख भरे अनगिनत आंसुओ को थोड़ा भी कम नहीं कर सकती।
एक बार तुम्हें जरूर बताना चाहिए था कि : तुम्हारे जीवन में जगह पाने के लिए और तुम्हारा प्रेम बना रहे, इसके लिए किस शिक्षा और गुणों की जरूरत थी? मुझ में कौन सी ऐसी कमी थी, जो दूर करनी थी?
अगर कुछ कमी थी तो जितना संभव होता, दूर कर सकती थी : मुझ से दूर करवा सकती थी.
मेरा समर्पण, और प्रेम काफी क्यों नहीं था तुम्हारे लिए? किस तलाश में थी? क्या चाहिए था?
कितने सवाल और जवाब कितनी बातें शेष हैं हमारे बीच।
प्रेम के बदले प्रेम मिले जरूरी नहीं.
प्रेम कोई सौदा नहीं.
तुम्हारे प्रेम के बिना भी तुम्हे जी जान से प्रेम किया। मेरे आत्म सम्मान के लिए बस इतना जरूर करना कि मुझसे प्रेमविहीन रिश्ता जोड़े रहने की कोशिश कभी मत करना. जुड़ना चाहो तो सच में प्रेम कर लेना मुझसे।”
(चेतना विकास मिशन)

