विजय दलाल
जिस दिन अमित शाह को को आपरेटिव विभाग सौंपा था। उसी दिन से मुझ जैसे लोगों को इंतजार ही था कि कब इस विभाग पर बुलडोजर चलेगा।
जिस कोआपरेटिव सेक्टर के जरिए देश के करोड़ों किसानों को राहत पहूंचायी जाती है कब इस गुजराती शायलाक के निशाने पर आता है। किसान आंदोलन का बदला भी लेना है। किसान के लिए लोन महंगा करना है।
वैसे हम भारतीयों की स्मृति बेहद कमजोर है। हम भूल गए कि नोटबंदी के झांसाकाल में अमितशाह की गुजरात की कोआपरेटिव बैंक ने देश में सबसे ज्यादा नोट बदलने का रिकार्ड स्थापित किया था।
फिर जादूगर सरकार का धर्म और साम्प्रदायिकता के काले जादू का सम्मोहन।
हर चीज जो सरकार दिखाएं जनता को केवल वही दिखें उसके अलावा कुछ भी नहीं दिखे।
*देखो राजा साहब ने खुब नगाड़े बजवाए। देश में खाने की कमी न हो इसलिए गेहूं के निर्यात पर रोक।*
*मामा शकुनि ने द्रौपदी (किसान) के चिरहरण के लिए क्या जोरदार जाजम बिछाई।*
2022 में कई विधानसभा के और 2024 के लोकसभा के चुनाव।
*कार्पोरेट मित्रों और उनके सत्ताधारी मोहरों ने मध्यमवर्ग में तो हिन्दू -मुस्लिम कार्ड से अच्छी खासी वोटरों की जमात कर ली।* *लेकिन एक नई वोटरों की जमात लाभार्थी के रूप में आविष्कृत कर ली।*
*इसके लिए कार्पोरेट मित्रों से चुनावी फंड की जरूरत भी नहीं।* *कार्पोरेट आकाओं से प्राप्त धन से पार्टी आफिस और करोड़ों में भुगतान वाले कार्यकर्ता तैयार करने में लगते हैं।*
*लाभार्थी नामक नई मनुष्य योनि के लिए सरकारी धन जो जनता से कर प्राप्ति रूप में प्राप्त होता है उसी का उपयोग किया जाता है।*
*देशद्रोही भले ही इसे आपके धन से आपकी …. मारना परिभाषित करें।*
*अभी 5 किलो अनाज के 80 करोड़ लाभार्थी है। जिस कदर महंगाई और बेरोज़गारी है लाभार्थियों की संख्या 90करोड़ या एक अरब भी हो सकती है।*
*इधर सरकार लाभार्थियों के वोट के लिए महंगी एमएसपी पर गेहूं खरीदेंगी उधर बाजार से मजबूर किसानों से सस्ता खरीद कर अडानी के तैयार गोडाउन भरे जाएंगे।*
*उधर किसानों को महंगी बिजली, महंगी खाद और अब महंगा लोन।*
*ज्यादा एमएसपी के बावजूद किसान वहीं का वहीं।*
*लेकिन सरकार को वोटर के रूप में बहुमत लाभार्थी।*
विजय दलाल

