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सामयिक…..सीधी से उठा सीधा सा एक सवाल जटिल ना बन जाए 

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सुसंस्कृति परिहार

पिछले दिनों मध्यप्रदेश का सीधी नगर राष्ट्रीय मीडिया और कला संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए एक सीधा चौंकाने वाला सवाल बन के छाया रहा।यह सवाल था किसी भाजपाई विधायक के खिलाफ एक फर्जी आईडी के ज़रिए उनके कच्चे चिट्ठे का खोला जाना। ये बात तो आज के दौर में कोई मायने नहीं रखती क्योंकि भाजपाई आई टी सेल और उनसे जुड़े लग्गू भग्गू इस तरह की अनाप शनाप ख़बरें रोजाना फेसबुक,ट्यूटर ,वाट्सअप पर इस तरह फेंकते हैं कि उनके खंडन ना तो किए जाते हैं और ना ही उन पर कोई लगाम लगाई जाती है।हां जिसे ज़रुरी लगता है वह सत्य खोज प्रसारित करता है लेकिन उसकी सुनता कौन है? कहने का आशय यह कि चारों ओर फर्जी आईडी का बड़े पैमाने पर खेला हो रहा है।प्रधान सेवक सहित समूची सरकार की इस कामयाबी के शिकार भी निरंतर हो रहे हैं ऐसे ही रंगकर्मी नीरज कुंदेर को भाजपाई विधायक के कहने पर फर्जी आईडी में सच उजागर करने का आरोपी बनाकर ना केवल उन्हें गिरफ्तार किया बल्कि उनकी जमानत भी नहीं होने दी।

सीधी पुलिस को विधायक के प्रति निभाई जिम्मेदारी का इनाम मिलना चाहिए।जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस को मात देने में अगुवाई की। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह भी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ की तरह अब बुलडोजर चलवाने लग गए हैं। निश्चित उनका कल्याण होगा। इस मामले में पुलिस ने जो तत्परता दिखाई वह मुसीबत बन जायेगी उसने सोचा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में तो कम से कम पुलिस गुंडों पर हमलावर होती रही है सीधी पुलिस ने तो एक कला संस्कृति जगत के लोकप्रिय संयोजक और अदाकार को छेड़ दिया और वहीं हुआ जिसकी उम्मीद थी इस खबर के मिलते ही कुंदेर की गिरफ्तारी के खिलाफ दो अप्रैल को सैंकड़ों की संख्या में पत्रकार, रंगकर्मी, सोशल एक्टिविस्ट और स्थानीय व्यापारियों ने जिला कोतवाली के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ नारेबाजी शुरू हुई तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दी। पुलिस ने बलप्रयोग कर न सिर्फ भीड़ को खदेड़ा बल्कि कुछ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में एक स्थानीय पत्रकार कनिष्क तिवारी समेत कई रंगकर्मी व सोशल एक्टिविस्ट थे। बताया जा रहा है कि पुलिस इन्हें अर्धनग्न कर रात भर पीटती रही। अर्धनग्न अवस्था में पुलिसकर्मियों ने कुछ तस्वीरें भी लीं जो अब वायरल हो रही हैं। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। सीधी यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके एक साथी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बेइज्ज़त करने के मकसद से नग्न तस्वीरों को वायरल किया गया महत्वपूर्ण ये भी कि उनकी फोटो खिंचवाई गई ताकि कल मीडिया उसे प्रकाशित करें उनकी बेइज्जती हो। उन्होंने अपने एक बयान में यह भी कह दिया कपड़े इसलिए उतरवाए गए ताकि कोई फांसी ना लगा सके।उनकी शुभचिंता का धन्यवाद किंतु वे उत्तर प्रदेश की वह घटना कैसे भूल गए जब तीन फुट ऊंचे प्लास्टिक पाइप से एक अल्पसंख्यक ने फांसी लगा लिया था। बहरहाल सब सलामत हैं। बहुत बहुत मेहरबानी की सीधी पुलिस ने ।

दूसरी तरफ कांग्रेसी सांसद राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया करते हुए ट्वीट कर निर्भीकता पूर्वक कहा है, कि लॉकअप में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का चीरहरण! या तो सरकार की गोद में बैठकर उनके गुणगान गाओ, या जेल के चक्कर काटो। नए भारत की सरकार, सच से डरती है।प्रतिपक्ष नेता कमलनाथ मध्यप्रदेश ने कहा सीधी में मीडिया से जुड़े लोगों की जिस तरह की तस्वीरें सामने आयी हैं, वह बेहद शर्मनाक है। जिस तरह के राजनैतिक दबाव की बात सामने आ रही है, उसकी उच्चस्तरीय जाँच होना चाहिए।

कहने का आशय यह है कि जिस व्यक्ति ने फर्जी आईडी का उपयोग कर कुछ सच सामने लाने का प्रयास किया वह तरीका ग़लत था पर उसकी सजा का ये तरीका पूरी तरह अमानवीय है ख़ासकर उन तमाम लोगों के साथ क्रूर और शर्मिंदगी का व्यवहार दुर्भाग्य पूर्ण है। उन्हें अन्य तरीकों से समझाया जा सकता था वह स्वाभाविक आक्रोश की परिणति थी जो क्षम्य है।

सीधी से उठा ये सीधा सवाल जितना सहज और सरल लग रहा है उतना है नहीं वह दूर तलक सोचने बाध्य करता है। प्रदेश में नगर और जिला पंचायतों के चुनाव निकट है आगामी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश पुलिस का रवैया चिंताजनक है । मध्यप्रदेश पुलिस पर आमजन का भरोसा है वह टूटना नहीं चाहिए।नेता तो आते जाते रहते हैं।

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