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बेटा कुपुत्र हो सकता है,लेकिन पुत्री कभी कुपुत्री नहीं हो सकती !

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 आज के वर्तमानकाल में बेटा -बेटी में कोई अन्तर नहीं है ! अधिकतर मामलों में आप देखते होंगे कि बेटियाँ बेटों की तुलना में माँ-बाप के प्रति ज्यादे आज्ञाकारी,समर्पित,कृतज्ञ और समय पर काम आने वाली साबित हो रहीं हैं,जबकि बेटा माँ-बाप के घोर संकट के समय भी अपनी बीबी के बहकावे में आकर माँ-बाप की सेवा करने से साफ मना कर देते हैं ! आजकल बहुत से बेटों के रहने के बावजूद मां-बाप को अपनी वृद्धावस्था को वृद्धाश्रम में बिताने को मजबूर होना पड़ता है ! इसलिए बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है ! मैं तो कहता हूँ बेटा कुपुत्र हो सकता है,लेकिन पुत्री कुपुत्री कभी भी नहीं हो सकती ! यही यथार्थवादी सच है ! 
-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

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