अग्नि आलोक

नए साल की शुभकामनाएं!

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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता के साथ आप  सभी को नए वर्ष की शुभकामनाएं।

आनंद देशमुख

खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पांव को
कोहरे में लिपटे उस छोटे से गांव को
नए साल की शुभकामनाएं!

जाते के गीतों को, बैलों की चाल को
करघे को, कोल्हू को, मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएं!

इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को
चौके की गुनगुन को, चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएं!

वीराने जंगल को, तारों को, रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को,
नए साल की शुभकामनाएं!

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को, हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएं!

इस चलती आंधी में, हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख्याल को
नए साल की शुभकामनाएं!

उनको जिनने चुन चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमलों में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएं!!

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