अपूर्व भारद्वाज
आज ईद है सुबह मुझे मेरे जूनियर साहिल का फोन आया तो मूझे आज से ठीक 10 साल पहले का किस्सा याद आ गया. मैं अपनी आईटी कंपनी के लिए पूणे के एक बहुत बड़े कालेज में कैम्पस प्लेसमेंट के लिए गया था मेरे साथ 5 लोग और थे और मैं उनमें सबसे ज्यादा सीनियर था इसलिए मेरे पास वीटो पावर था उस प्लेसमेंट में करीब 300 स्टूडेंट शामिल हुए थे और हमे कुल जमा 5 लोग ही लेने थे इसलिए तीन कठिन रिमूवल राउंड रखे गए थे ताकि फाइनल इंटरव्यू में केवल क्रीम ही आए
तीनो राउंड के बाद केवल 30 स्टूडेंट्स ही बचे थे इसलिए हम 6 लोगो ने दो पैनल बना लिए और ताकि हम 10 स्टूडेंट का सिलेक्शन करके एक क्रोस पैनल इंटरव्यू करके फाइनल 5 का सिलेक्शन कर ले, इंटरव्यू के दौरान मेरे पैनल के सामने साहिल खान आए उन्होंने मेरे हर तकनीकी सवाल का बड़े अच्छे से उत्तर दिया और बंदे का कॉन्फिडेंस, इंग्लिश और एटीट्यूड बढ़िया था इसलिए हमने उसका नाम क्रॉस राउंड के लिए बढा दिया ताकि दूसरा पैनल भी साहिल का एस्टिमशन कर ले
जब फाइनल 5 की लिस्ट मेरे सामने आई तो उसमें साहिल का नाम नही था मैं हैरान हो गया और दूसरे पैनल वालो से पूछा कि साहिल को किस बेस पर रिजेक्ट किया गया है तो तीनो पैनलिस्ट एक साथ बोला सर कमी काम मे नही है नाम में है हमे ऐसे लोगो से दूर रहना चाहिए इनका क्या भरोसा कब क्या कर दे आपको पता है कि WTC में क्या हुआ था
मैं अवाक था मुझे गुस्से से ज्यादा इस बात का दुःख था कि मैं किस तरह के लोगो के साथ काम कर रहा था मैंने तत्काल अपने वीपी को मेल लिखकर इस डिसीजन के खिलाफ वीटो कर दिया और यह भी लिख दिया कि अगर यह डिसीजन वापिस नही लिया गया तो मेरे इस मेल को मेरा फाइनल मेल समझा जाए मैं ऐसी कम्पनी के साथ काम नही कर सकता जहाँ योग्यता नही धर्म के आधार पर लोगो का चयन किया जाता है
मेरे इस निर्णय के बाद हड़कंप मच गया मैं सेलेक्शन प्रोसेस छोड़कर अपना मोबाइल बंद कर स्टूडेंट्स से बातचित करने चला गया मेरे ब्लैकबेरी पर धड़ाधड़ मेल आ रहे थे औऱ मैं साहिल औऱ बाकी 29 स्टूडेंट्स से अपने एक्सपीरियंस शेयर कर रहा था इतने में मेरी एक कलीग आती है कि सर vp सर का फोन है आपका फोन बंद है बहुत अर्जेन्ट है vp ने बोला कि कंपनी आपके साथ खड़ी है आप का जो डिसीजन होगा वो फाइनल होगा फिर मैंने 5 की जगह 6 लोगो के नाम पर ऑफर लेटर बनाया और मुंबई वापिस आ गया
यह बात हम 6 लोगो और वीपी (HR) के अलावा किसी को नही पता थी पर पता नही कैसे यह बात वँहा के प्लेसमेंट हेड को पता चल गई औऱ उनके थ्रू साहिल को पता चल गई जब साहिल कंपनी ज्वाइन करने आया तो वो मुझसे मिलने के लिए दिनभर वेट करता रहा मैं एक प्रोजेक्ट डिलीवरी में देर रात तक बिजी था इसलिए नही मिल सका पर वो बन्दा अल सुबह फिर कम्पनी गेट पर आ धमका और मुझसे गले मिलकर बहुत रोने लगा बोला सर मुझे सब पता चल गया है मैं बोला यार क्यो रो रहे हो मैंने तुम पर क्यो एहसान नही किया है इट्स पार्ट आफ माय जॉब जस्ट चील एंड रिलेक्स यु डिजर्व थिस
वो बोला सर आप नही जानते मेरे अब्बा ने मुझे कितनी मेहनत से पढ़ाया है उन्होंने अपना सबकुछ मेरे पीछे दाँव पर लगा दिया था इसके लोगो दिन रात लोगो की गालियां सुनी है उनकी जिद थी मेरा बेटा मेरा काम कतई नही करेगा आपने मेरा नही मेरे पापा का सिलेक्शन किया है आप जैसे लोग है तो मेरा भरोसा इस देश पर कभी नही उठेगा
मैंने कहा वो सब ठीक है पर तुम्हारे पापा का क्या नाम है और वो क्या करते है साहिल बोला ..सर मेरे पापा गाड़ी के टायरों के पंचर जोड़ते है नाम है “अब्दुल पँचर वाला ..” #घोरकलजुग
अपूर्व भारद्वाज #डाटावाणी #रिपोस्ट
नोट: यह एक सच्ची घटना है बस पात्रों के नाम बदल दिये गए है आप सबको ईद की दिल से मुबारक बाद

