शशिकांत गुप्ते
विकास की दौड़ और प्रगति की रफ़्तार की गति दिन-ब-दिन तेज होते जा रही है। विकास की दौड़ और प्रगति की रफ़्तार का नाप प्रति किलोमीटर के माप से नहीं आंका जाता है।
प्रतिदिन नित नए उत्सव की चकाचौंध को देखकर, मापा जाता है। शहरों के धरोहरों पर, उड़ान पुल और पुल के नीचें की दीवारों पर,सार्वजनिक स्थानों पर, आकर्षक रंगीन चित्रों और रंग बिरंगी विद्युत साजसज्जा को देख, जब देश का आमजन प्रभावित होता है। तब उसे विकास प्रसन्न होकर, प्रगति के साथ दौड़ते नजर आता है।
आमजन आशांवित हो जाता है,अब रोजगार के नए स्रोत खुलेंगे। बाज़ार में सिर्फ सजावट हो नजर नहीं आएगी ,ग्राहकों की तादाद भी बढ़ेगी। यह एहसास भी पुख्ता हो जाएगा कि, अच्छेदिन ही चल रहें हैं।
इनदिनों हरएक क्षेत्र बाजरवाद पर अवलंबित हो गया है।
हरएक क्षेत्र में पैकेज नामक सिस्टम शुरू हो गया है।
इसे ही Event management इवेंट मैनेजमेंट कहतें हैं।
Event का हिंदी में अर्थ होता है,कोई घटना या वृत्तांत।
बाजरवाद में इवेंट का एकही मतलब होता है। किसी भी उत्सव या समारोह को आधुनिक तौर तरीके से सम्पन्न करवाने के लिए लिया जाने वाला ठेका।
समारोह के प्रारम्भ से समापन तक की सारी व्यवस्था इवेंट मैनेजमेंट द्वारा की जाती है।
उत्सव की समाप्ति के बाद जब सारी साजसज्ज उतर जाती है,तब पूर्व की सारी मूलभूत समस्याएं जस की तस नज़र आने लगती है।
मतलब चार दिन की चांदनी फिर वही अंधेरी रात यह कहावत चरितार्थ होती है।
हरएक मुद्दे को इवेंट की तरह सम्पन्न करने की मानो परिपाटी हो बन गई है।
सीतारामजी उपर्युक्त लिखा हुआ पढ़कर सुना रहे थे।
मैने पूछा यह सब आप ने किस संदर्भ में लिखा है,क्यों लिखा है?
सीतारामजी ने कहा मैने अपनी अर्धनिद्रा में जो स्वप्न में देखा वही पूरा वृत्तांत लिख दिया है।
आप ने जब डोर बेल बजाई,तब ही तो मैं नींद से जागा हूँ।
आजकल स्वप्नलोक में ही विचरण करने की आदत हो गई है।
यथार्थ तो बहुत भयावह है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

