पुष्पा गुप्ता
गत दिवस इंडियन एक्सप्रेस ने ये तो खुलासा किया कि मॉरीशस की कंपनी इलारा कैपिटल अदाणी डिफेंस फर्म- अल्फा डिज़ाइन (ADTPL) में को-ओनर (सह-मालिक) है और इलारा का अदाणी समूह की तीन कंपनियों में हजारो करोड़ निवेश भी है। ……..लेकिन वो इस अल्फा डिजाइन कम्पनी की पिछली हिस्ट्री बताने से चूक गया.
क्या आप जानना चाहते हैं कि 2003 में बनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज मूल रुप से किसकी थी ?
ये कम्पनी थी भारत के सबसे बड़े हथियार एजेंट और लॉबिस्ट सुधीर चौधरी की, जिनकी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच की जा रही है.
हथियार से जुड़ी लॉबिंग की दुनिया में सुधीर चौधरी बहुत बड़ा और बहुत बदनाम नाम हैं.
भारत मे एक सीबीआई जांच मे पता चला कि 2008 में 1125 करोड़ रुपये के बराक मिसाइल सौदे में हथियार दलाल एस एम नंदा और सुधीर चौधरी ने लाखों डॉलर कमाए थे सुधीर चौधरी और उनके पुत्र दोनों को 2014 में लंदन में एक एसएफओ जांच के हिस्से के रूप में गिरफ्तार किया गया था, उन पर कथित तौर पर चीन और इंडोनेशिया में डील कराने के लिए रोल्स रॉयस को रिश्वत देने में मदद करने का आरोप था भारत में भी रोल्स रॉयस सौदे की तरफ उंगली उठी रक्षा मंत्रालय ने रोल्स-रॉयस से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा एयरो इंजन की खरीद की सीबीआई जांच का भी आदेश दिया।
2014 तक सुधीर चौधरी डिफेन्स डील के क्षेत्र पर्याप्त रूप से बदनाम हो चुके थे लेकिन भारत में उनकी कम्पनी के पास भारत में रक्षा उपकरण बनाने का औद्योगिक लाइसेंस था, जो आसानी से हासिल नहीं हो सकता था.
अल्फा डिज़ाइन एक बदनाम कम्पनी थी कुछ साल पहले मनु पबि ने इकनॉमिक टाईम्स में छपे अपने लेख में बताया था कि यह अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज उस इतालवी डिफेंस फर्म इलेटट्रॉनिका की मुख्य भारतीय साझेदार भी है, जिसका नाम भारत में कथित तौर पर कमीशन खिलाने के लिए ‘पनामा पेपर्स’ में सामने आया है।
रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इतालवी डिफेंस फर्म ने भारत में रक्षा क्षेत्र के ठेकों के लिए 5% से 17% तक कमीशन देने के एग्रीमेंट्स किए थे.
इधर यूके ओर भारत में सुधीर चौधरी जब पूरी तरह से फंस गये तो 2017 में अदानी को उन्होंने अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड में 400 करोड़ रुपये में एक बड़ी हिस्सेदारी बेच दी.
मोदी को अडानी की एंट्री डिफेंस सेक्टर में करवानी ही थी इसलिए गौतम अडानी आगे आए और अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज का सबसे बडा हिस्सा खरीद लिया.
ये दोनो के लिए विन विन डील थी. पर टेक्नोलोजी तो मूल रूप से यूके के पास ही थी सुधीर चौधरी तो सिर्फ उनके लिए लॉबिंग कर दलाली वसूल रहे थे इसलिए अडानी को बीच में डालकर सुधीर चौशरी आश्वस्त हो गये कि सैया तो कोतवाल बन ही चुके है. अब डर काहे का.
अडानी से जुड़ने के बाद अल्फा डिजाईन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से बड़े बड़े ठेके भी मिलने शुरू हो गये.
लेकिन ट्विस्ट अभी बाकी था आज हम जान गये है कि अल्फा डिज़ाइन की को ऑनर मॉरीशस की कंपनी ‘इलारा कैपिटल’ है और इस ईलारा कैपिटल को लन्दन में बैठकर मैनेज कर रहे थे यूके के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन के सगे भाई जो जॉनसन………ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन जब भारत के दौरे पर आए थे तो आपको याद होगा कि वे स्वयं अहमदाबाद जाकर गौतम अडानी से मिले थे और जब हिंडन बर्ग की रिपोर्ट सामने आईं तो सबसे पहले बोरिस जॉनसन के भाई जो जॉनसन ने इलारा से इस्तीफा देकर इस अडानी कनेक्शन से पीछा छुड़ाया.
यानी यूके सरकार को भी डर था कि वो भी इस लपेटे में न आ जाए लेकिन इधर भारत में शुरु से मोदी सरकार बिना डरे अल्फा डिजाइन को ठेके पर ठेके देकर उपकृत कर रही है.
मोदी सरकार ने इसरो से भी उपग्रहों और रॉकेटों से संबंधित तकनीक का हस्तांतरण अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी को करवाया है.
कमाल की बात तो यह है कि अल्फा डिजाइन के नेतृत्व में जिस कंसोर्टियम को यह तकनीक सौपी गयी थी उस कंसोर्टियम का नेतृत्व कर रहे थे कर्नल एच एस शंकर, और कर्नल एच एस शंकर ही भारत को इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम ) की पहली खेप दिलाने में मदद करने वाले प्रमुख व्यक्ति थे. अब आप समझ गये होंगे कि कि दाल में काला है या पूरी दाल ही काली है।

