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छात्र , किसान , मजदूरों में ! जनता के अरमानों में ! ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

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छात्र , किसान , मजदूरों में !
जनता के अरमानों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
◇◆◆◆◆◇

                          ऐ भगतसिंह तू जिंदा है !
               हर एक लहू के कतरे में !
       भिंची  हुई  हर  मुट्ठी  में  !
  हर इंकलाब  के नारों में !

ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

                                सूरज चांद सितारों में !
                      मजदूरों   के   नारों में  !
             जनता के जयकारों में !
     हां कम्युनिस्टों के नारों में !

ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

                            लेनिन की मुड़ी किताबों में !
                 सुखदेवों  और  आजादों में !
        बिस्मिलों और अशफाकों में !
    रक्त   से   सने  फरहरों   में !

ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

                           इंकलाब  की  लहरों  में !
                    भारत छोड़ो के नारों में !
            नेवी   के   विद्रोहों    में  !
      आजाद हिंद की फौजों में !

ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

                           संसद  में  फेंके   परचों  में !
                    जन गण मन की हुंकारों में !
            छात्र  किसान  मजदूरों  में !
      जनता   के   अरमानों   में !

ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

                            ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
                      हर एक लहू के कतरे में !
              भिंची  हुई  हर  मुट्ठी  में !
        इंकलाब   के   नारों   में !

ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !

       मुनेश त्यागी, वरिष्ठ अधिवक्ता,मेरठ सिविल कोर्ट मेरठ,संपर्क-9837151641   


     संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण ‘,मोबाईल नम्बर 9910629632
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