छात्र , किसान , मजदूरों में !
जनता के अरमानों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
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ऐ भगतसिंह तू जिंदा है !
हर एक लहू के कतरे में !
भिंची हुई हर मुट्ठी में !
हर इंकलाब के नारों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
सूरज चांद सितारों में !
मजदूरों के नारों में !
जनता के जयकारों में !
हां कम्युनिस्टों के नारों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
लेनिन की मुड़ी किताबों में !
सुखदेवों और आजादों में !
बिस्मिलों और अशफाकों में !
रक्त से सने फरहरों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
इंकलाब की लहरों में !
भारत छोड़ो के नारों में !
नेवी के विद्रोहों में !
आजाद हिंद की फौजों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
संसद में फेंके परचों में !
जन गण मन की हुंकारों में !
छात्र किसान मजदूरों में !
जनता के अरमानों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
हर एक लहू के कतरे में !
भिंची हुई हर मुट्ठी में !
इंकलाब के नारों में !
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है !
मुनेश त्यागी, वरिष्ठ अधिवक्ता,मेरठ सिविल कोर्ट मेरठ,संपर्क-9837151641
संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण ‘,मोबाईल नम्बर 9910629632

