-निर्मल कुमार शर्मा,
प्रातःपूजनीय शहीद-ए-आजम भगतसिंह ने आज से लगभग 90 वर्ष पहले अपनी फाँसी लगने से कुछ ही समय पूर्व अपने एक अतिमहत्वपूर्ण लेख के माध्यम से इस देश और दुनिया के कथित धर्म के परले दर्जे के धूर्त, पाखंडी,शातिर और मक्कार कथित धर्म के ठेकेदारों,पंडे,पुजारियों,मौलवियों और पादरियों से एक गुरूगंभीर प्रश्न पूछा था कि ‘अगर तुम्हारा कथित भगवान,खुदाताला और गॉड सर्वशक्तिमान है,तो वह इस दुनिया में होने वाले जघन्यतम् अपराधों,बलात्कारों और हत्याओं के अपराधियों,बलात्कारियों और हत्यारों को कठोरतम् सजा देकर उन्हें तुरंत मौत के घाट उतार क्यों नहीं देता ? ‘आश्चर्य और बहुत दुःख की बात है कि शहीद-ए-आजम भगतसिंह द्वारा पूछा गया यह सबसे मानवीय व इंसानियत भरा प्रश्न अभी भी अनुत्तरित ही है ! वास्तविकता यह है कि उक्तवर्णित कथित धर्मों के ठेकेदारों,ढोंगियों और अपराधियों के पास इसका कोई उत्तर ही नहीं है ! सच्चाई यह है कि मन्दिर,मस्जिद,चर्च,भगवान, खुदा,गॉड,आस्था,स्वर्ग-नरक,जन्नत-जहन्नुम, हेवेन-हेल,चमत्कार,वरदान,दैवीय शक्ति आदि सभी फालतू और मानवीयविरोधी बातों का अविष्कार कुछ बहुत ही शातिर,धूर्त व परजीवी मानसिकता के कुछ बहुत ही स्वार्थी मानवसमूहों द्वारा अपनी अक्ष्क्षुण चलनेवाली रोजी-रोटी और रोजगार के इंतजाम के तहत किया है !ध्यान दीजिए मंदिरों-मस्जिदों और चर्चों के धर्माध्यक्ष बने पंडों,मौलवियों और पादरियों की कोई शैक्षणिक योग्यता व चारित्रिक प्रमाण पत्र की आवश्यकता ही नहीं होती ! ये सभी अपने समाजों के सबसे पतित,भ्रष्ट,अकर्यमण्य,निठल्ले, अपराधी,अशिक्षित,असभ्य और दरिंदे केवल अपने वाह्यावरण को छद्मावेश यथा लम्बा-चौड़ा टीका,गेरूआ वस्त्र,दाढ़ी बढ़ाकर,श्वेत टोपी लगाकर पुजारी,मौलवी या पादरी आदि बन जाते हैं !परन्तु इनके अंदर का दरिंदा सदा बना ही रहता है ! और वही दरिंदा इस देश और दुनिया के लाखों मंदिरों,मस्जिदों और चर्चों में तमाम बच्चियों और औरतों से व्यभिचार,अनाचार, कदाचार और बलात्कार तथा उनकी नृशंसता पूर्वक हत्या करने के हैवानियतभरे कुकृत्यों के रूप में प्रकट होता रहता है !
-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,

