निर्मल कुमार शर्मा
भारत के लगभग सभी मंदिरों में और हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के घर होनेवाली धार्मिक अनुष्ठानों के समापन में अक्सर आरती के समय निम्नलिखित यह भजन बड़े ही आदर और श्रद्धा से गाया -बजाया जाता है कि –
“ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे
जो ध्यावे फल पावे
दुःख बिन से मन का
स्वामी दुःखबिन से मन का
सुख सम्पति घर आवे
सुख सम्पति घर आवे
कष्ट मिटे तन का
ॐ जय जगदीश हरे
मात पिता तुम मेरे
शरण गहूं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा
आस करूं मैं जिसकी
ॐ जय जगदीश हरे
तुम पूरण परमात्मा
तुम अन्तर्यामी
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सब के स्वामी
ॐ जय जगदीश हरे
तुम करुणा के सागर
तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी
मैं सेवक तुम स्वामी
कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे “
उक्त भजन में भी इस दुनिया के ईश्वर,खुदा या गाड को 'करुणा के सागर,पालनकर्ता ' शब्द से संबोधित किया गया है ! इस दुनिया के लगभग सभी धर्मों में उनके धर्म प्रचारकों ने आमजन में यह आम धारणा प्रचारित किए हैं कि ईश्वर,खुदा या गाड सभी जीवों का पितातुल्य रक्षक और पालक है,परन्तु इसी देश में ऐसे दर्जनों मंदिर हैं,जहां निरीह पक्षियों और पशुओं मसलन कबूतरों,मुर्गों,बत्तखों,बकरों और भैंसों तक की उन्हीं ईश्वर,खुदा या गाड के बने इबादत स्थलों में बने पत्थरों के कथित देवियों और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बर्बर हत्याएं तक की जातीं हैं ! और उनके मांस को उन्हीं मंदिरों के परिसरों में बाकायदा पकाया जाता है,और उस मांस को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है,जिसे भगवान के कथित भक्त लोग बेहतरीन दारु या शराब के साथ बाकायदा स्वाद लेकर खाते हैं !
उदाहरणार्थ ऐसे हिंसक,अमानवीय और कलुषित विचारधारा के मंदिरों में विमला देवी मंदिर पुरी ओड़ीसा,मुनियांडी स्वामी मंदिर तमिलनाडु ,पारसिनिक कदवु मंदिर केरल ,तरकुलहा देवी मंदिर गोरखपुर उत्तरप्रदेश, तारापीठ मंदिर पश्चिम बंगाल, दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता पश्चिम बंगाल,कालीघाट, कोलकाता ,कामाख्या मंदिर गुवाहाटी असम, बटुक भैरव मंदिर वाराणसी,भैरव मंदिर पुराना किला नई दिल्ली आदि-आदि !
यक्षप्रश्न है कि अगर इस धरती के सभी जीवों का रक्षक और पालनहार कथित परम् पिता ईश्वर या देव या कोई देवी किसी निरीह पशु,पक्षी की हत्या कर देने से प्रसन्न होता है या होती है,तो इससे ज्यादा वीभत्स,इंसानियत विरोधी कोई बात हो नहीं सकती ! सभी धर्म यही सिखाते और उपदेश देते हैं कि इस दुनिया के सभी जीव-जंतुओं का यानी सभी का पालनकर्ता, पिता तुल्य ईश्वर और मां तुल्य देवी मां है ! उस स्थिति में दूसरी तरफ यह कथन कि किसी जीव की हत्या करके उसके मृत शरीर को उस कथित देवी या देव के चरणों में चढ़ा देने से वह खुश हो जाता है,यह बहुत ही अमानवीय,बर्बर,क्रूर,असहिष्णु ,राक्षसी और मानवेत्तर अवगुण के सिवा कुछ हो ही नहीं सकता !
वास्तविकता यह है कि कथित भगवान के पुजारी वर्ग ने अपनी जीभ और स्वाद के लिए यह भ्रामक बातें भारतीय कूपमण्डूक समाज में फैलाई है कि 'अमुक देवी या देवता किसी निरीह प्राणी की हत्या करने से खुश हो जाता है ! ' जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी देवी या देवता की पत्थर की मूर्ति उसके चरणों में चढ़ाए गए प्रसाद का एक नैनो ग्राम अंश भी खा ही नहीं सकता ! वास्तविक तौर पर उस चढ़ाए गए मिठाई,फल या मांस का उपभोग पुरोहित वर्ग और कथित भक्त गण और मंदिर से जुड़े तमाम अन्य लोग करते हैं ! ठीक यही स्थिति इस्लाम धर्म में कथित खुदा के नाम पर की जानेवाली कुर्बानी के नाम पर बकरों के साथ जानलेवा नृशंसता और बर्बरता की जाती है !
-निर्मल कुमार शर्मा 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक,पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र,निष्पक्ष,बेखौफ , आमजनहितैषी, न्यायोचित व समसामयिक लेखन,संपर्क -9910629632, ईमेल - nirmalkumarsharma3@gmail.com

