*रजनीश भारती*
सरकार ने 14 जून को अग्नीपथ योजना शुरू करने की घोषणा की है। जिसे पहले TOR (टूर आफ ड्यूटी) नाम दिया गया था। इसमें युवाओं की भर्ती 4 साल के लिए होगी और उन्हें ‘अग्निवीर’ का सम्मान दिया जाएगा। उन्हें 30,000 से 40,000 प्रति माह का वेतन मिलेगा और उनकी उम्र 17 से 21 वर्ष के बीच होगी। इस योजना का अर्थ यह भी है कि भर्ती हुए 25 फ़ीसदी युवाओं को आगे सेना में मौका मिलेगा और बाकी 75 फीसदी को नौकरी छोड़नी पड़ेगी।
4 साल बाद 25 फीसदी उम्मीदवारों को योग्यता के आधार पर सेना में स्थाई तौर पर शामिल कर लिया जाएगा। ये 25% जवान क्या करेंगे इस पर इसी लेख में आगे चर्चा करेंगे। पहले शेष 75% जवानों का क्या होगा इसे ही देखते हैं।
शेष 75 फीसदी को कौशल प्रमाण पत्र दिया जाएगा ताकि उन्हें अपनी योग्यता के अनुसार सरकारी या निजी नौकरियों में वरीयता मिल सके।
चार ही साल क्यों?
दरअसल पांच साल पूरा हो जाने पर सरकारी नियमों के अनुसार ग्रेच्यूटी फण्ड समेत कई सरकारी सुविधाएँ देना पड़ेगा। चार साल का कोर्स होगा तो सरकार इन जिम्मेदारियों से बच जाएगी। मगर यह तो सामान्य समझ की बात है।
असल तो यह है कि सेना का हिन्दूकरण जो पहले से ही जारी है उसे जारी रखते हुए इस अग्निपथ योजना से हिन्दुओं का सैन्यीकरण अर्थात हिन्दुओं को सैनिक बनाने का काम आगे बढ़ाया जाएगा। इस काम के लिए-
1- ये चार साल का एक पाठ्यक्रम होगा, ये चार साल की नौकरी प्रशिक्षण की तरह होगी। इस दौरान जवानों के दिमाग में मुसलमानों, ईसाईयों और कम्यूनिस्टों के खिलाफ अनाप-शनाप विचार ठूँस-ठूँस कर भरे जायेंगे।
2- भारत कई राष्ट्रीयताओं, कई धर्मों, कई भाषाओं वाला एक देश है, मगर इन जवानों को एक देश, एक राष्ट्र, एक धर्म, एक नेता, एक पार्टी, एक विचारधारा का विभाजनकारी फासीवादी पाठ पढ़ाया जायेगा।
3- चार साल बाद शेष जो 75% प्रशिक्षण प्राप्त करके समाज में वापस आयेंगे, वे कौशल प्रमाणपत्र पाएँगे, इसके आधार पर इन्हें निजी व सरकारी नौकरियों में भर्ती होने में वरीयता मिलेगी, इसका मतलब ज्यादातर महत्वपूर्ण नौकरियाँ सिर्फ उन्हें ही मिल पाएँगी जो मुसलमानों, ईसाईयों और कम्यूनिस्टों के धुरविरोधी और शोषक वर्गों के अंधभक्त होंगे।
4- नौकरियों में वरीयता पाने के लिए नौजवानों में इस तरह का सैन्य प्रशिक्षण पाने की होड़ मचेगी। यानी अधिकांश नौजवान नौकरी में वरीयता पाने की लालच में आरएसएस के प्रशिक्षकों से अपना माइण्डवाश करवाएंगे, और न चाहते हुए भी अंध भक्त बनेंगे।
5- निश्चित रूप सरकार अपने सरकारी खर्च पर इतनी बड़ी आबादी को प्रशिक्षण नहीं दे सकती। तब निकट भविष्य में आरएसएस के कई धन्नासेठ अपना सैनिक प्रशिक्षण स्कूल खोलकर ट्रेनिंग देंगे। ट्रेनिंग सेन्टर खोलने की ऐसी शर्तें होंगी कि आरएसएस के लोग ही उन शर्तों को पूरा कर पाएंगे। हालांकि यह छोटे पैमाने पर इस समय भी जारी है।
6- उक्त शेष 75% जवान मुसलमानों, ईसाईयों और कम्यूनिस्टों के खिलाफ ट्रेनिंग प्राप्त करके आएँगे तो अपने परिवार के अन्य सदस्यों का तथा अपने पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों का भी माइण्डवाश करेंगे।
7- कश्मीर में सात लाख से अधिक सैनिक लगे हुए हैं वहाँ जान बूझकर ऐसा माहौल बना दिया गया है जिससे सैनिकों के दिमाग में मुस्लिमविरोधी भावना भर जाए। पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध, तनाव या छिट-पुट गोलीबारी के जरिए बार-बार पाकिस्तान को दुश्मन जताया जाता है और साथ ही साथ देश के मुसलमानों को पाकिस्तान का समर्थक बताकर सैनिकों एवं हिन्दुओं के दिमाग में मुस्लिम विरोधी भावनाएँ भरी जाती रही हैं, अग्निपथ योजना इन साजिशों में तेजी लाएगा।
8- मुसलमानों, ईसाईयों और कम्यूनिस्टों के खिलाफ माहौल गर्म करने के लिए समय-समय पर दंगे होते रहे हैं, अग्निवीर इन दंगों में झोंके जाएंगे। हिटलर ने तो सिर्फ साठ लाख यहूदियों को मारा था, अग्निपथ के जरिए शोषक वर्ग 60 करोड़ से अधिक लोगों को मारने में सक्षम हो जाएगा। जब निकट भविष्य में भयानक धार्मिक दंगा भड़काया जाएगा तो कई करोड़ गरीब हिन्दू और कई करोड़ गरीब मुसलमान मारे जाएँगे। अमीर लोग इस लिए बच जाएँगे क्यों कि
आरएसएस में लगभग सारे अमीर हिन्दू प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े ही हैं और अमीर मुसलमानों से तो आरएसएस की रिश्तेदारियां हैं।
अत: कुछ अपवादों को छोड़कर अमीर मुसलमानों और अमीर हिन्दुओं का तो कोई नुक्सान नहीं होगा। इसलिए यह अग्निवीर योजना आरएसएस की गरीब विरोधी साज़िश का एक हिस्सा है।
9- रिजर्व फोर्स के जवान सरकारी खजाने से खाते हैं, पीते हैं, दण्डबैठक करते हैं और भारी भरकम तनख्वाह उठाते हैं, मगर अग्निवीर चार साल की ट्रेनिंग के बाद वापस घर आ जाएँगे, चार साल की ट्रेनिंग के बाद इन पर कोई खर्च नहीं आएगा ये ऐसे रिजर्व फोर्स होंगे कि जब इन्हें लड़ने-कटने-मरने के लिए तैनात किया जाएगा तभी इन्हें तनख्वाह देना होगा। ये एक तरह से मुफ्त के रिजर्व फोर्स बनेंगे। जब कभी श्रीलंका जैसे हालात होंगे जनता अपने जीने के हकहुकूक के लिए सड़कों पर उतरेगी तो जनता को कुचलने के लिए अग्निवीरों को महीना दो महीना के लिए हथियार थमा दिया जाएगा।
10- अग्निवीरों को हथियारों के लाइसेंस में भी वरीयता दी जाएगी। वे लाइसेंसी हथियारों की आड़ में क्षमतानुसार कई अवैध असलहे भी रख सकतें हैं, जिससे गरीबों, शोषितों, पीड़ितों के खिलाफ अपराध बढ़ेंगे।
11- कुछ मुस्लिम या ईसाई युवक भी अग्निवीर में भर्ती हो सकेंगे, परन्तु इनकी ड्यूटी इस तरीके से लगा दी जाएगी कि वे कम्यूनिस्ट विरोधी चीजों को तो सीख सकेंगे मगर मुस्लिम व ईसाई विरोधी पाठ्यक्रम से वंचित रहेंगे।
12- अग्निपथ की ट्रेनिंग के बाद ज्यादातर लोग बीजेपी के पक्के वोटर बनेंगे, कुछ लोग आरएसएस के प्रचारक भी बनेंगे।
13- लगभग 98 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। कई दर्जन भर्तियां विवादों में फँसी हुई हैं बीते आठ साल में भर्तियों में 80% गिरावट आयी है। मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सूदखोरी, जमाखोरी, मिलावटखोरी भयानक रूप से बढ़ रही है, भारत अपने पड़ोसी श्रीलंका से भी बद्तर स्थिति की ओर बढ़ रहा है। भारत में श्रीलंका नहीं बल्कि उससे भयानक आन्दोलन हो सकता है। सेना विद्रोह न कर सके, 1857 फिर न हो जाये। इस तरह की घटना को अन्जाम देने के लिए सेना के जवान मंगल पाण्डे या मातादीन भंगी न बन जाएं इसके पहले ही जवानों को सावरकर के विचारों में ढाल दिया जाए।
तो, ये हैं इस योजना के पीछे शोषक वर्ग की साज़िशें।
*शेष अगले भाग में…..*
*रजनीश भारती*

