पंकज यादव
यदि मैं प्रभु श्री राम होता तो,
पकड़ता गिरेबाँ और पूछता,
क्यों तुम नफ़रतों और हिंसा के समर्थन में,
लगाते हो मेरे नाम के जयकारे?
बताता मैं उनको कि,
जिन स्त्रियों की अस्मिता लूटने की बात करते हो तुम,
वे सब भी मेरी ही कृतियाँ-मेरी ही पुत्रियां हैं।
पूछता मैं ये भी कि भला,
मेरी ऐसी संतानों से, जो नहीं है तुम्हारे इस देश के निवासी,
या जो पूजते हैं मुझे मेरे किसी और नाम से,
क्यूँ करते हो तुम इतनी नफ़रतें उनसे?
भला क्या मिलेगा तुमको इससे,
जब कोई टोपी वाला सर झुका के “जय श्री राम” बोलेगा?
शायद तुम नहीं जानते कि अलग-अलग भाषाओं में,
मुझे पुकारने के लिए और भी शब्द हैं, “जय श्रीराम” के अलावा।
अगर मैं होता कोई खुदा या उनका पैग़म्बर,
तो पूछता मैं ये भी,
कि कहते हो जिन सबको तुम काफ़िर,
उन सबको भी बनाया है मैंने ही,
बताता मैं उनको ये भी कि,
वो सब भी तो हैं मेरे ही बंदे,
सवाल ये भी होता कि,
क्यों चाहते हो भला तुम कि,
पूरी दुनिया करे मेरी बंदगी,
सिर्फ तुम्हारे ही तरीके से??
अगर मैं होता कोई भगवान या खुदा,
तो बताता मैं सबको इक बात और भी,
कि नफ़रतों के ये मसले नहीं है मेरे मसले,
नहीं है ये मसले धर्म और मजहब के मसले,
असल में हैं ये सब दूसरों के हक-हुकूक को दबाने के मसले।
पर अफसोस कि मैं भगवान नहीं,
पर अफसोस कि मैं कोई खुदा या पैगम्बर नहीं,
मैं तो हूँ सिर्फ इक अदना सा इंसान,
ठीक उन्हीं की तरह जिन्होंने फैलाये हैं ये भरम दुनिया में,
कि हैं कहीं कोई राम या खुदा ऐसे भी,
जिनके नाम पर नफ़रतों को फैलाकर,
ठहराया जा सके ज़ायज़……
अफ़सोस कि मैं नहीं हूँ कोई खुदा, नहीं मैं कोई राम भी,
जो जगा सकूं तुम जैसे सोये लोगों को,
मैं तो हूँ कि बस इक अदना सा आदमी,
ठीक उन्हीं की तरह, जो चाहते हैं कि तुम सोते रहो,
तब तक, जब तक कि नफ़रतें सुला न दें तुम्हें मौत की गहरी नींद में।
अफ़सोस… अफ़सोस….. अफसोस
😢😢😢😢😢😢😢
© Pankaj Yadav

