अग्नि आलोक

भाजपा, AAP  दोनों के लिए अम्बेडकर एक वोट हैं  और कुछ नही

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हिन्दू  धर्म        बनाम       हिन्दूत्व  

राजेंदर पाल  गौतम  के अम्बेडकर के 22 संकल्पों  के प्रति  निष्ठा उससे उपजे विवाद और उनके इस्तीफे ने एक बात तो साफ करदी कि  भाजपा, aap  दोनों के लिए  अम्बेडकर  एक वोट हैं  और कुछ नही l  यह भी साफ हो गया कि  हिन्दू  धर्म का अर्थ  जो   अवतारवाद  और मूर्ति  पूजक हैं वही हिन्दू  हैं ज़िसकी व्याख्या गुरू ग्रंथ साहिब में  गुरू नानक, कबीर और नामदेव ने की हैं  और हिन्दूत्व  एक उसी को स्थापित करने का राजनीतिक  विचार l  यह नही कि  गुरू ग्रंथ साहिब की ही बात हैं जैन और बुद्ध भी इसी  धारणा  से ओत  प्रोत हैं  समस्या  इस  बात की हैं कि  जैन और बुद्ध उसी का हिस्सा  हो गये  जबकि सिख ने खुद को हिन्दू  मानने से इंकार किया यदि गुरू गो बिन्द राय जो सिखों के दसवें गुरू के तौर पर  स्थापित हुए तो उनका एक क्रांतिकारी फैसला कि  व्यक्ति  कभी स्थायी नही हो सकता तो उस धारणा  को बदल पंचायत को ही गुरू की मान्यता दे दी गई जिनसे शपथ ली गई  कि  वह   पंचायत  दया  धर्म, हिम्मत  और संघर्ष से ओत  प्रोत हो यहां तक  गुरू गो बिन्द राय से गो बिन्द सिंघ हो गये , यही पंचायती राज संस्था के तौर पर  स्थापित हुई  अर्थात खालसा को ही गुरू स्थापित कर  दिया यही कारण हैं कि  सिख कभी भी हिन्दू  मान्यताओं को समर्पित नही हो सका और न हो सकता हैं , यही उसे उन  सभी  स्थापित धर्मों से अलग पहचान देता हैं , यह जो गुरू ग्रंथ साहिब की बात की जाती  हैं , जब खालसा की सरिजना  हुई उस समय गुरू ग्रंथ साहिब ज़िसकी सम्पादना गुरू अरजन साहिब के समय हुई वह  तो गुरू गो बिन्द  राय के पास था ही नही उसको संसोधित  तो गुरू गो बिन्द सिंघ ने भायी मनी  सिंघ से करवा उसमें गुरू तेग बहादर की वाणी को समाहित कर  अंतिम रुप दिया और अंतिम समय सिखों को बताया ” परचा  शब्द का, दीदार खालसा का , पूजा अकाल की ” इन  तीन शब्दों में  पुरा सिख विचार समाहित हैं l  भारत के संविधान का आधार माना जाये तो वह  भी इन  तीन शब्दों पर  अधारित हैं क्योंकि परचा  शब्द के अर्थ  ” होय एकत्र  मिलहो मेरे  भायी , दुबिधा दूर करहो लिव लाये “, दीदार खालसा अर्थात पंचायती राज संस्था ही श्रेष्ठ  हैं जो दया, धर्म, हिम्मत  और संघर्ष से ओत  प्रोत हो, और पूजा अकाल का अर्थ हैं सत्य  ही ईश्वर हैं क्योंकि उसका कोई न तो आकार हैं, न वह  पैदा होता हैं, न मरता हैं  और न उसकी कोई मूर्ति  स्थापित की जा सकती हैं , सत्य  तो सत्य  हैं वह  मेरा और तेरा नही हो सकता l  इसी  कारण उसे हिन्दूत्व  के दायरे में  भी नही बांधा  जा सकता l  

आखिर गौतम के इस्तीफे ने भाजपा के हिन्दूत्व  की और aap  के मानस  जो गाँधी को हटा अम्बेडकर और भगत सिंघ को अपने दफतरों  में  लटकाये  था उसकी पोल खोल दी l  इसमें कोई शक नही भारत की मान्यतायें यदि समझनी हैं तो उनको गुरू ग्रंथ साहिब से ही समझा जा सकता हैं क्योंकि यह ग्रंथ कोई किसी साहित्य का पुलिन्दा नही बल्कि  भारत की आत्मा की व्याख्या करता हैं , इसकी विशेषता यह भी साबित करती हैं कि  केवल गुरुओं की वाणी ही नही बल्कि  उन  महान  क्रांतिकारियों की वाणी जिसमें कबीर, नामदेव, रविदास, रामानन्द, पीपा, धन्ना, फरीद , बेणी  आदि की वाणियोँ  से सुसज्जित हैं , यह कोई मैँ आतिश्योक्ति से नही वास्त्विक्ता के विचार से प्रदान  करने की चेष्टा कर  रहा हूँ , सहमति और असहमति  आपका अधिकार l

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