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अमित शाह के वकील रहे यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट के अगले चीफ जस्टिस होने जा रहे हैं

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*उनकी सुप्रीम कोर्ट में एंट्री की कथा दिलचस्प है*

Girish Malviya

*साल 2014 में कॉलेजियम ने गोपाल सुब्रमण्यम का नाम बतौर जज नियुक्त किए जाने के लिए भेजा था. लेकिन सरकार ने उनके नाम पर अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया था. गोपाल सुब्रह्मण्यम सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में न्याय मित्र थे एमिकस क्यूरी थे और उनकी सिफारिश पर ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मुख्य आरोपित थे.*

*दरअसल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सर्वोच्च अदालत में जजों की नियुक्ति के लिए चार नामों की सिफारिश सरकार को भेजी थी। उसमें गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम भी शामिल था। सरकार के विरोध के बाद सुब्रह्मण्यम ने अपना नाम वापस ले लिया। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि न्यायाधीश के पद की एक गरिमा होती है। एक जज को शक, संदेह से परे और निष्कलंक होना चाहिए। मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं लेकिन मैंने पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इसे नहीं स्वीकार करना ही सही समझा।*

*गजब की बात यह थीं कि गोपाल सुब्रमण्यम का नाम ख़ारिज होने के बाद मोदी सरकार द्वारा उसी मामले में अमित शाह के वकील रहे यूयू ललित को सुप्रीम कोर्ट का जज के लिए नामित किया गया*

*गोपाल सुब्रह्मण्यम के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा भी केंद्र सरकार पर जमकर बरसे थे। उन्होंने सरकार के कदम को एकतरफा करार देते हुए अपनी नाराजगी जताई। साथ ही पूर्व सॉलिसिटर जनरल के नाम को अलग करने पर कार्यपालिका के रुख को अनुचित बताया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि शीर्ष न्यायपालिका इस मसले पर बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस के तौर पर मैंने और मेरे चार वरिष्ठ सहकर्मियों की कॉलेजियम ने चार सबसे हुनरमंद लोगों को चुना था। हमने सरकार को इन चार नामों को नियुक्त करने के लिए भेजा था। लेकिन सरकार ने एकतरफा तरीके से एक नाम अलग कर दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलामेश्वर ने भी मोदी सरकार पर खुलकर यह आरोप लगाया है कि वह जजों की नियुक्ति में मनमानी कर रही है.*

 *Girish Malviya*

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