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अमृत महोत्सव….‘सबका प्रयास’ बन रहा स्वर्णिम भारत का आधार

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आजादी की 75वीं वर्षगांठ को उत्सव का रूप देकर नए भारत के संकल्प को साकार करने में जुटी भारत
सरकार ने नई पहल, कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं के साथ भारत के वर्तमान और भविष्य की योजना को
दिया आकार, ताकि जब देश आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाए तब सबके प्रयास से आत्मनिर्भर भारत का
सपना हो साकार। लेकिन आजादी की नींव पर खड़ी हुई ये भव्य इमारत, राष्ट्र की मंजिल नहीं, मार्ग है,
एक नए भारत की शुरुआत है…

आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आइए जानते हैं कि कैसे जन सहभागिता से उत्सव को
संकल्प में बदलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के विकास को दी गति तो समृद्ध विरासत को नई
पहचान और ‘सबका प्रयास’ बन रहा स्वर्णिम भारत का आधार

छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के ग्राम लोखंडी की महिलाओं ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत पर्यावरण
संरक्षण और ग्रामीण विकास को लेकर अनूठा उदाहरण पेश किया। गांव की बंजर पड़ी सरकारी जमीन में
बारिश के दिनों में पानी का संचय होता था। लेकिन समुचित प्रबंधन न होने से पानी जल्द सूख जाता
था। गांव की 410 महिलाओं ने जल सहेली स्वसहायता समूह बनाकर इस बंजर जमीन पर छह महीने की
मेहनत से तालाब बना दिया। अब बारिश का पानी इसमें संचित होने लगा है। इसमें मछली के साथ वे
बतख पालन कर रही हैं। इससे होने वाली आय का 30 प्रतिशत हिस्सा गांव के विकास में खर्च करने का
निर्णय लिया गया है।
इसी तरह हरियाणा के यमुनानगर में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू किए गए पाठन कौशल
कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं। बच्चों को पाठन से जोड़ने की पहल अब आगे बढ़ने
लगी है। राजकीय स्कूलों के बच्चे अब स्कूली काम से अलग ज्ञानवर्धक किताबों को पढ़कर परंपरागत
शिक्षा से ऊपर उठकर अपने कौशल को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। राजकीय स्कूलों के बच्चों को शिक्षा
के क्षेत्र में उन्नत करने के लिए पाठन कौशल कार्यक्रम की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया है। इस
कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 3 से आठवीं तक के सभी बच्चों को लाइब्रेरी में प्रतिदिन आधा या एक घंटा

किताब पढ़ने के लिए दी जाती है जिसे बच्चे अध्यापक के मार्गदर्शन में पढ़ते हैं कुछ बच्चे कविता, कुछ
बच्चे कहानियां या अन्य किताबों में रुचि दिखा रहे हैं। बच्चे किताबें पढ़ने के बाद अपनी कहानियों को
सुबह प्रार्थना सभा में सुनाते हैं। इस कार्यक्रम से बच्चों में स्वयं लिखने व पढ़ने की प्रतिभा भी उजागर
हो रही है। हरियाणा के ही कुरुक्षेत्र के किरमच गांव में अमृत सरोवर योजना का शुभारंभ किया गया है।
15.85 एकड़ में अमृत सरोवर विकसित होगा और इसके लिए 1 करोड़ 26 लाख रुपये का बजट रखा गया
है। आजादी के अमृत महोत्सव में ऐतिहासिक तालाबों का अमृत सरोवर योजना के तहत जीर्णोद्धार व
सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस अमृत सरोवर योजना से पानी की एक-एक बूंद को बचाने का
भी अनोखा प्रयास होगा और यह सरोवर निश्चित ही भावी पीढ़ी को निर्मल जल की सौगात देगा। साथ
ही इससे गांव के सौंदर्यीकरण में भी चार चांद लगेंगे। आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में 1 जुलाई
से “सिंगल यूज प्लास्टिक बैन” को सपोर्ट करते हुए राजस्थान जीप क्लब ने अमर जवान ज्योति पर
शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया। 1 जुलाई से इन वस्तुओं को बनाने, बेचने, जमा करने और एक्सपोर्ट
करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया है। ये प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है, ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक
के कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। सिंगल यूज प्लास्टिक यानी प्लास्टिक से बनी
ऐसी चीजें, जिसका हम सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर इस्तेमाल कर फेंक देते हैं और
जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में प्लास्टिक बैग की बजाय कॉटन बैग का इस्तेमाल किया
जा सकता है।
बदलाव की ऐसी अनगिनत कहानियां आजादी का अमृत महोत्सव का सारथी बन रही हैं। आजादी के
आंदोलन में जनसाधारण की बड़ी सहभागिता रही है और तब चरखा, नमक जैसे प्रतीक ने जन-जन को
स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ दिया था। अब आजादी के 75 वर्ष को अमृत महोत्सव के रूप में मनाने की
भारत सरकार की सोच भी उसी तरह का प्रतीक बन गई है जो अब अमृत यात्रा से राष्ट्र को स्वर्णिम वर्ष
तक एक नया भारत बनाने की दिशा में अग्रसर है। आजादी का अमृत महोत्सव अब आजादी की ऊर्जा
का अमृत, नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों का अमृत और आत्मनिर्भरता का अमृत बन गया है। भारत
अमृत महोत्सव वर्ष में नींव रखकर एक भव्य और गौरवशाली राष्ट्र के निर्माण की दिशा में विकास की
यात्रा शुरू कर चुका है ताकि अमृत काल की विकास यात्रा, कल के भारत की समृद्ध व गौरवमयी
विरासत बने। दो वर्ष यानी 15 अगस्त 2023 तक मनाए जाने वाले इस अमृत महोत्सव की शुरुआत
आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने से 75 सप्ताह पहले दांडी यात्रा की वर्षगांठ पर 12 मार्च 2021 को जब शुरू
हुआ, तो उसका उद्देश्य भी बेहद अमृत था। आजादी के संघर्ष की तरह ही जनसहभागिता को इसका
आधार बनाया गया ताकि 130 करोड़ देशवासी आजादी के अमृत महोत्सव से जब जुड़ें तब लाखों
स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणा लें और बड़े से बड़े लक्ष्यों को पूरा करने की सोच प्रबल हो। आजादी के 75
साल का ये अवसर एक अमृत की तरह है जो वर्तमान पीढ़ी को प्राप्त होगा। यह एक ऐसा अमृत बना है

जो जन-जन को प्रतिपल देश के लिए जीने, देश के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित कर रहा है। आजादी
का अमृत महोत्सव अपने एक वर्ष से अधिक की यात्रा में लंबा सफर तय कर चुका है। जैसे-जैसे ये सफर
आगे बढ़ा आजादी के अनगिनत संघर्ष, अनगिनत बलिदानों की ऊर्जा पूरे भारत में फैलती चली गई। यह
सब संभव हो पाया जन सहभागिता से। आजादी का अमृत महोत्सव में जन सहभागिता के साथ
आत्मनिर्भरता को आंदोलन बनाया तो कला-संस्कृति, गीत और संगीत के रंग भी खूब भरे। चाहे इनोवेशन
चैलेंज हो, राष्ट्रगान हो, या फिर आजादी के सेनानी, रंगोली प्रतियोगिता, हर जगह बच्चों, युवाओं से लेकर
महिलाओं तक की जन सहभागिता दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमृत महोत्सव और अमृत काल का
दृष्टिकोण बेहद स्पष्ट है। इस महोत्सव की शुरुआत में ही उन्होंने ऐसा आधार बनाया कि 15 अगस्त
2022 को जब वे लाल किले की प्राचीर से 9वीं बार तिरंगा फहराएं, तब तक ये महोत्सव पूरे भारत को
अपने में समेट ले। ये इतना बड़ा महोत्सव बन जाए जहां हर नागरिक का संकल्प हो देश को आगे ले
जाने का, ताकि साकार हो सके सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मंत्र।
आजादी का अमृत महोत्सव में देश के जन-जन के उत्साह ने जनसहभागिता का रंग भर दिया।
जब उत्सव बना अमृत महोत्सव
भारतीय संस्कृति में कहा जाता है- “उत्सवेन बिना यस्मात् स्थापनम् निष्फलम् भवेत्” अर्थात, कोई भी
प्रयास, कोई भी संकल्प बिना उत्सव के सफल नहीं होता। एक संकल्प जब उत्सव का स्वरूप लेता है तो
उसमें लाखों-करोड़ों लोगों का संकल्प और उनकी ऊर्जा शामिल हो जाती है। इसी भावना से 130 करोड़
देशवासियों को साथ लेकर, उन्हें साथ जोड़कर आजादी का अमृत महोत्सव मनाना शुरू किया।
जनभागीदारी इस उत्सव की मूल भावना बनी। आजादी के 75 वर्ष का ये पर्व ऐसा महोत्सव बन गया
जिसमें स्वाधीनता संग्राम की भावना, उसके त्याग-समर्पण का साक्षात अनुभव आज की पीढ़ी को भी होने
लगा। यह एक ऐसा महोत्सव बन गया है जिसमें सनातन भारत के गौरव की भी झलक है, आधुनिक
भारत की चमक भी है, मनीषियों के आध्यात्म का प्रकाश भी है, भारत के वैज्ञानिकों की प्रतिभा और
सामर्थ्य का दर्शन भी है।
इस आयोजन की भव्यता और सफलता का मूल्यांकन इससे भी किया जा सकता है कि इन 75 सप्ताह
में 50 हजार से अधिक कार्यक्रम देश-विदेश में आयोजित हो चुके हैं, जिनमें संपूर्ण सरकार यानी सरकार
की सामूहिक शक्ति के साथ 55 मंत्रालयों/विभागों ने समन्वित प्रयासों से जन-जन को इससे जोड़ा है।
अगर औसतन देखा जाए तो प्रति घंटा 4 कार्यक्रम अमृत महोत्सव के तहत हो रहे हैं। अमृत महोत्सव
को 5 स्तंभों में बांटकर आगे बढ़ने का खाका बनाया गया। इनमें स्वाधीनता का संघर्ष (Freedom
Struggle@75), 75वें वर्ष पर विचार (Ideas@75), 75वें वर्ष पर उपलब्धियां (Achievements@75), 75वें वर्ष
पर कदम (Actions@75) और 75वें वर्ष पर संकल्प (Resolve@75) के पांच आधारबिंदु बनाए गए। आजादी

के अमृत महोत्सव के इसी कालखंड में कोविड की दूसरी और तीसरी लहर के कारण कठिन समय आया
और कई कार्यक्रमों को हाईब्रिड मोड में किया गया। छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड लिखे गए,
स्वतंत्रता स्वर जिसमें ब्रिटिश द्वारा प्रतिबंधित कविताओं का संकलन हुआ, वंदे भारत नृत्य उत्सव, 1857
के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के स्मरण का कार्यक्रम जैसे अनेकों कार्यक्रम हुए। राष्ट्रगान का कार्यक्रम हो,
रंगोली बनाने का कार्यक्रम हो, स्वतंत्रता संग्राम के अनजाने वीरों पर शोध और संकलन के कार्यक्रम हो,
मेरा गांव, मेरी धरोहर कार्यक्रम हो, यह नागरिकों के मन में नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। अब हर घर
तिरंगा अभियान 11-17 अगस्त तक चलेगा तो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, डिजिटल जिला रिपॉजिटरी,
स्वतंत्र स्वर जैसे कार्यक्रमों ने महोत्सव में जनभागीदारी को सुनिश्चित किया।
आजादी के संघर्ष से प्रेरणा, भविष्य का निर्माण
भारत की आजादी का इतिहास गौरवमयी है, लेकिन आजादी के आंदोलन में जन साधारण की बड़ी
सहभागिता कहीं गुम सी हो गई थी। उन सभी को वैसी पहचान नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी।
ऐसे में गांधी जी के चरखा और नमक की तरह प्रतीकों का बेहतर इस्तेमाल और अमृत महोत्सव के साथ
आजादी के इतिहास के लोकतांत्रीकरण की शुरुआत हो चुकी है, ताकि देश का हर नागरिक जन-इतिहास से
प्रेरणा ले सके। अमृत महोत्सव के जरिए विशेष उपलक्ष्यों और महापुरुषों की जयंती को जन सहभागिता
का अवसर बनाया गया। स्वच्छता आंदोलन को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से जोड़कर देश को
स्वच्छ बनाने का संकल्प लेकर जन आंदोलन खड़ा किया गया। आजादी के 75 वर्ष को अमृत महोत्सव
नाम दिया गया और विशेष कमेटी बनाकर इसका आयोजन किया गया है। देश के युवाओं को गुमनाम
नायकों की कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जनजातीय गौरव के लिए भगवान बिरसा मुंडा
की जयंती 15 नवंबर को हर साल जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाना शुरू किया गया। नेताजी
सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती को एक अवसर बनाया गया। राजा सुहेलदेव, राजा महेंद्र प्रताप जैसे
कई महापुरुषों के योगदान का स्मरण कर आजादी के आंदोलन की एक नई पीठिका तैयार करनी शुरु की
गई। इसके पीछे भारत सरकार की सोच है कि 1857 से 1947 तक के संघर्ष को आने वाली पीढ़ी के मन-
मस्तिष्क में फिर से जागृत किया जाए क्योंकि सिर्फ इतिहास इसकी जानकारी युवा पीढ़ी को नहीं दे
सकता। अनेक घटनाएं और वीर नायकों के चरित्र को उनके मानस पटल पर जीवित करना पड़ेगा, तब वो
अपने आप को आजादी के संघर्ष के साथ जोड़ेगा। एक बच्चा अगर आज अपने आप को आजादी के
संघर्ष के साथ जोड़ लेता है तो पूरे जीवन वो भारत के विकास के प्रति समर्पित रहेगा। अमृत महोत्सव
भारत की नई पीढ़ी को आजादी और देश के साथ जोड़ने का स्वर्णिम अवसर है।
दरअसल, अमृत महोत्सव का आयोजन 75 वर्षों की उपलब्धियों को भी दुनिया के सामने रखने के साथ
25 वर्षों के लिए एक रूपरेखा और संकल्प पेश कर रहा है। साथ ही 2047 में जब देश आजादी की

शताब्दी मनाए तब दुनिया में भारत का स्थान क्या होगा, भारत को हम कहां तक ले जाएंगे की प्रेरणा दे
रहा है। अमृत महोत्सव एक पीठिका तैयार कर रहा है और उस पीठिका के आधार पर ये 75 साल का
पर्व भारत की आजादी की शताब्दी के लिए, उस दिशा में मजबूती से जाने के लिए एक दिशा दिखाने
वाला, प्रेरक और पुरुषार्थ की भावना जगाने वाला बन रहा है।
आज की विकास यात्रा, कल की विरासत
लगभग समय जितना ही प्राचीन, सूर्य जितना ही तेजस्वी और आकाश जितना ही विशाल है भारत देश
का इतिहास। ज्ञान-विज्ञान और समृद्धि से सजा, शौर्य-आध्यात्म और कलाकारी से छलकता गौरवशाली
भारत को जब अंग्रेजी हुकूमत ने बेड़ियां पहनाई, तब देश के लिए मर मिटने वाले दीवानों ने आजादी की
अलख जगाई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अनोखा सत्याग्रह छेड़ा। अनगिनत बलिदानों के बाद ये देश
विदेशियों ने छोड़ा। फिर लौह पुरूष सरदार पटेल ने लोहे सा अखंड भारत बनाया। कभी सपेरों का देश
कहा जाता था, लेकिन वही देश आज पहले प्रयास में मंगल तक पहुंचा। मेक इन इंडिया के इन तीन
शब्दों ने दुनिया में देश का नाम ऊंचा कर दिया। आज हर घर में बिजली है, हर हाथ में मोबाइल फोन है,
हर जेब में डिजिटल पहचान, हर खाते में डायरेक्ट बेनिफिट, हर रसोई में स्वच्छ ईंधन और हर आवास में
शौचालय की सुविधा सम्मान का जीवन दे रही है। स्वच्छता और योग नए भारत के संस्कार बन चुके हैं।
वसुधैव कुटुंबकम की भावना से पूरा विश्व हमारा परिवार एक सोच बन चुकी है। अंग्रेज कहकर गए थे
हमारे जाने के बाद भारत बिखर जाएगा, लेकिन शायद उसने नहीं सोचा था कि वही भारत विश्व के सबसे
विशाल लोकतंत्र के रूप में निखर जाएगा। आज भारत एक है, अखंड है और सबसे तेजी से बढ़ती
अर्थव्यवस्था है। आत्मनिर्भर भारत एक प्रकार से शब्द नहीं, 130 करोड़ देशवासियों का मंत्र बन गया है।
केवल 8-10 साल पहले ही देश में जन्म प्रमाण पत्र लेने के लिए, बिल जमा करने, राशन लेने, नामांकन
लेने, परिणाम और प्रमाण पत्र लेने, बैंकों में लाइन जैसी स्थिति लोगों को घंटों परेशान करती थी। लेकिन
आज सबका समाधान हो चुका है। तकनीक के जरिए सुगमता लाकर सुविधाओं के लिए ऑनलाइन
व्यवस्था हो चुकी है। आज जन्म प्रमाण पत्र से लेकर वरिष्ठ नागरिक की पहचान देने वाले जीवन प्रमाण
पत्र तक, सरकार की अधिकतर सेवाएं डिजिटल हैं। आज डिजिटल गवर्नेंस का एक बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत में है। जनधन-मोबाइल और आधार (जैम ट्रिनिटी) की त्रिशक्ति का देश के गरीब और मध्यम वर्ग
को सबसे अधिक लाभ हुआ है। इंडस्ट्री 4.0 के लिए जरूरी कौशल तैयार करने के लिए आज स्कूल के
स्तर पर भी फोकस है। करीब 10 हजार अटल टिंकरिंग लैब में आज 75 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं
इनोवेशन पर काम कर रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी टेक्नोलॉजी को महत्ता दी गई है। अटल
इंक्यूबेशन सेंटर्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क देश में तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार, पीएम ग्रामीण

डिजिटल साक्षरता अभियान यानी पीएम-दिशा देश में डिजिटल सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने का एक
अभियान चला रहा है।
आजादी की लड़ाई में आदिवासी समाज के अप्रतिम योगदान को हर घर तक पहुंचाने के लिए अमृत
महोत्सव में अनगिनत प्रयास किए जा रहे हैं। आजादी के बाद पहली बार, देश में आदिवासी गौरव और
विरासत को प्रदर्शित करने के लिए आदिवासी संग्रहालय बनाए जा रहे हैं। पिछले साल ही देश ने 15
नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती को ‘राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की शुरुआत
भी की है। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में देश के हर व्यक्ति को 75 साल की उपलब्धियों से जुड़ने
का सौभाग्य मिला है। बीते कुछ वर्षों में भारत में आए क्रांतिकारी व परिवर्तनकारी बदलाव ने भारत को
वैश्विक मंच पर प्रथम पंक्ति में बिठाने में सफलता हासिल की। विकास के सभी क्षेत्रों में कई कीर्तिमान
सबके प्रयास के मंत्र के साथ रचे गए हैं। इतिहास और संस्कृति को भी संरक्षित रखने और संवर्धित करने
में सफलता हासिल की। लेकिन यह पड़ाव भर है, राष्ट्र की मंजिल नहीं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष से लेकर आजादी के शताब्दी वर्ष तक के 25 वर्षों के
कालखंड को अमृत काल के रूप में मनाने का फैसला किया और देश की जनता का आह्वान किया कि
आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में हम व्यक्तिगत रूप से भी कोई ना कोई संकल्प लें, जो भारत को
आगे बढ़ाए। ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक और सरकार का हर विभाग एक लक्ष्य तय करे और
संकल्प ले जो देश को आगे बढ़ाए। ये संकल्प लेने का वर्ष है और ये 25 साल का अमृत काल इन
संकल्पों को सिद्ध करने का काल है। भारत आने वाले 25 वर्षों में दीर्घकालिक सोच के साथ जिन
संकल्पों को साकार करने जा रहा है, वही शताब्दी वर्ष की विरासत बनेगी। प्रधानमंत्री मोदी की सोच बेहद
स्पष्ट है कि आज के भारत की विकास यात्रा, कल के भारत की गौरवमयी-समृद्ध विरासत बने।
‘सबका प्रयास’ और स्वर्णिम
भारत की दिशा में कदम

आज का भारत- होता है, चलता है, ऐसे ही चलेगा- उस मानसिकता से बाहर निकल चुका है। आईटी-
डिजिटल तकनीक में भारत आज अपना परचम लहरा रहा है। इंटरनेट डाटा खपत में रिकॉर्ड बना रहा है,
दुनिया भर में हो रहे डिजिटल लेनदेन में अकेले 40 प्रतिशत भारत में हो रहे हैं। 21वीं सदी के नए भारत
में लोग जितनी तेजी से नई टेक्नोलॉजी अपना रहे हैं वो किसी को भी हैरान कर सकती है। बीते कुछ
वर्षों में विकास की यात्रा ने भारत को नई पहचान दी है। आज के भारत की पहचान है- करना है, करना
ही है और समय पर करना है। इस संकल्प के साथ हिन्दुस्तान चल रहा है। भारत अधीर है प्रगति के
लिए, विकास के लिए, भारत अधीर है अपने सपनों के लिए, अपने सपनों का संकल्प लेकर सिद्धि तक

पहुंचाने के लिए अधीर है। भारत आज अपने सामर्थ्य में भरोसा करता है, अपने-आप में भरोसा करता है।
भारत ने 2016 में तय किया था कि 2030 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 40 प्रतिशत गैर जीवाश्म
ईंधन स्रोतों से होगा, लेकिन भारत ने लक्ष्य से 8 वर्ष पूर्व ही इसे हासिल कर लिया। पेट्रोल में 10 प्रतिशत
एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य भी निर्धारित समय से पांच महीने पहले पूरा कर लिया। कोविड जैसी आपदा से
निपटने और टीकाकरण में 200 करोड़ डोज तक पहुंचने की यात्रा शोध का विषय बन रही है। मेड इन
इंडिया वैक्सीन ने भारत के साथ ही दुनिया के करोड़ों लोगों की कोविड से जान बचाई है। कोविड के
समय में भारत ने पिछले दो साल से 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त अनाज सुनिश्चित किया है। आज भारत
में हर महीने औसतन 5 हजार पेटेंट फाइल होते हैं। आज भारत ह‍र महीने औसतन 500 से अधिक
आधुनिक रेलवे कोच बना रहा है। आज भारत हर महीने औसतन 18 लाख घरों को नल से जल योजना
के तहत जोड़ रहा है।
स्टार्टअप इंडिया अभियान एक आइडिया के स्तर पर था, इस शब्द से अधिकांश लोग अनजान ही थे।
लेकिन बीते कुछ वर्षों के प्रयास से ही आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
है। इतना ही नहीं, आज भारत में औसतन हर दस दिन में एक यूनिकॉर्न बन रहा है। भारत आज दुनिया
का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। भारत की बायोटेक इकोनॉमी 8 गुना बढ़कर 6 लाख
करोड़ रुपये के पार जा चुकी है। प्राकृतिक खेती जैसे शब्द दुनिया में चर्चा का ही विषय है, लेकिन भारत
में इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के दुनिया की पहल में
भारत का प्रयास केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत का युवा इलेक्ट्रिक वाहन, जलवायु से
जुड़ी तकनीक में निवेश कर रहा है। पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार और जीवनशैली सामान्य लोगों के
जीवन का हिस्सा बन रही है। आज भारत का हर गांव खुले में शौच से मुक्त है, हर गांव तक बिजली
पहुंच चुकी है, लगभग हर गांव सड़क मार्ग से जुड़ चुका है, 99 प्रतिशत से अधिक रसोई में पकाने के लिए
स्वच्छ ईंधन है, हर परिवार बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा हुआ है, हर गरीब को पांच लाख रुपये तक मुफ्त
इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
अमृत काल में नए भारत का लक्ष्य अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को पूरा करना है। नए भारत
को उनके सपनों का भारत बनाना है। एक ऐसा भारत- जिसमें गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़ा, आदिवासी
सबके लिए समान अवसर हों। पिछले आठ सालों में देश ने इसी संकल्प को पूरा करने के लिए नीतियां
भी बनाईं, और पूरी निष्ठा से काम भी किया है। अमृत काल में भारत की सोच समावेशी है और करोडों
लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में जुटा है। भारत आज अभूतपूर्व संभावनाओं से भरा है। एक
मजबूत-स्थिर-निर्णायक सरकार के नेतृत्व में नए सपने भी देख रहा है, नए संकल्प भी ले रहा है और
संकल्पों को सिद्धि में परिवर्तित करने के लिए जी-जान से जुटा हुआ भी है। जिसकी नीतियां भी स्पष्ट

है और अगले 25 साल के लिए आत्मनिर्भरता का रोडमैप भी तैयार है। प्रधानंमत्री मोदी के शब्दों में ही,
“2047 में जब देश की आजादी के 100 साल होंगे, तब हम देश को जहां ले जाना चाहते हैं, उन सपनों को
पूरा करने के लिए पूरा देश चल पड़ेगा। देश में हो रहे नए-नए फैसले, नई-नई सोच, आत्मनिर्भर भारत
जैसे संकल्प इन्हीं प्रयासों के साकार रूप हैं। ये उन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को भी पूरा करने का
प्रयास है, भारत को उस ऊंचाई पर पहुंचाने का प्रयास है, जिसकी इच्छा रखते हुए अनेकों वीरों ने फांसी के
फंदे को गले लगा लिया था, अपना जीवन काल कोठरी में बिता दिया था।”
निश्चित तौर से जब किसी देश के नागरिक सबका प्रयास की भावना के साथ, जनभागीदारी की भावना के
साथ राष्ट्रीय संकल्पों को सिद्ध करने में जुट जाते हैं तो उन्हें दुनिया की
बड़ी-बड़ी शक्तियों का भी साथ मिलने लग जाता है। आज दुनिया की बड़ी शक्तियां भारत के साथ कंधे
से कंधा मिलाकर चलना चाहती हैं। अपने देशवासियों की संकल्प शक्ति से आज भारत प्रगति के पथ पर
निरंतर आगे बढ़ रहा है। जन-जन के संकल्पों और उनकी भागीदारी से भारत के प्रयास आज जन-
आंदोलन बन रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए नया भारत नई विरासत बनाने पर काम कर रहा है।
बीते दशकों में देश के जन-जन ने अपने काम से भारत की सशक्त छवि बनाई है। इस कारण आजादी
के अमृतकाल में यानी आने वाले 25 साल में अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं क्योंकि आज भारत का हर
नागरिक स्वयं में सफलता की कहानी भी है और उसका वाहक भी। n

….

सेवा, समर्पण और संकल्प का अमृत

200 करोड़ दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज कोविड टीकाकरण अभियान

nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, “एक बार भारत के लोग कुछ करने की ठान लें, तो कुछ भी असंभव
नहीं है।” देश ने 200 करोड़ वैक्सीन डोज का असाधारण लक्ष्य हासिल करके न सिर्फ प्रधानमंत्री के
विश्वास को सार्थक किया है बल्कि आजादी के 75 साल के महोत्सव को यादगार बना दिया है। भारत ने
वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन के मुताबिक वैक्सीन मैत्री के तहत दुनिया को 24 करोड़ वैक्सीन डोज की
आपूर्ति भी की है।

nविश्व के सबसे बड़े और सबसे तेज टीकाकरण अभियान में एक दिन में दुनिया में सबसे अधिक 2.5
करोड़ वैक्सीन डोज देने का रिकार्ड, कोविन एप पर 110 करोड़ पंजीकरण करके दुनिया का सबसे बड़ा
डिजिटल टीकाकरण अभियान के साथ अब 200 करोड़ डोज का एक नया रिकार्ड बनाया है। 18 वर्ष से
अधिक आयु वर्ग में 98% आबादी को पहली डोज लग चुकी है तो इसी आयु वर्ग में 90% आबादी को
दूसरी डोज भी लग चुकी है। पहली डोज 16 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 100% और दूसरी डोज 11 राज्यों
में 100% लग चुकी है।

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