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अमृतपाल:पंजाब में यह नौबत आई कैसे!

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राहुल पाण्डेय

पंजाब सरकार ने सोमवार को पुलिस के जरिये स्पष्ट किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और भगोड़ा अमृतपाल सिंह उसकी हिरासत में नहीं है। पंजाब सरकार का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट में अमृतपाल को लेकर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल हुई है। जाहिर है, पंजाब सरकार हाईकोर्ट को भी यही कहने जा रही है कि अमृतपाल उसके पास नहीं है। लेकिन अमृतपाल जब भी पकड़ा जाए, उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लग गया है। अमृतपाल के जिन साथियों को असम जेल भेजा गया है, उन पर भी इसी कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पंजाब में यह नौबत आई कैसे!

ऐसे बना अमृतपाल

ऐसा नहीं है कि पंजाब पहली बार ऐसी समस्या से मुखातिब है। जब जरनैल सिंह भिंडरांवाले एक्टिव था तो वहां इससे भी बुरे हालात बन गए थे। तब भिंडरावांले का सफाया तो कर दिया गया, लेकिन उसकी सोच फिर भी बनी रही। उस सोच से जुड़े लोग ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में आज भी हैं।

ध्रुवीकरण का घेरा

अमृतपाल का यह उभार बताता है कि ध्रुवीकरण की राजनीति ने खालिस्तान की विचारधारा को वह जगह दी, जो इसे बहुत दिनों से नहीं मिला था। इस ध्रुवीकरण के पीछे निहंगों की हरकतों की भी बड़ी भूमिका रही है। पहले कहीं कोई निहंग खड़ा होता था तो लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते थे। मगर अब उनसे बचकर निकलने लगे हैं। ऐसा नहीं कि निहंगों में नरम खयाल लोग नहीं हैं। लेकिन वे भी खतरे में दिखते हैं। इसी महीने कनाडा से निहंग बनने आए एक युवक को मार दिया गया, क्योंकि वह आनंदपुर में हुड़दंग मचाते निहंगों को रोक रहा था। पिछले कुछ समय में हुई कुछ निहंगों की हरकतों ने विदेशों में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों को इस ध्रुवीकरण का मौका दिया। इसके बाद सिमरनजीत सिंह मान की जीत ने उन्हें वह ट्रिगर दिया, जिसे अमृतपाल दबा रहा है।

कहां रही कसर

सवाल है कि अमृतपाल को इतना उभरने क्यों दिया गया। पंजाब में पब्लिक को छह-आठ महीने पहले से पता था कि राज्य में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दमदमी टकसाल में जब अमृतपाल को भिंडरांवाले की गद्दी दी जा रही थी, तभी इसका अहसास हो गया था।

पंजाब तय करेगा भविष्य

अब जो हालात हैं, उनमें भी महज एक अमृतपाल के नजरिए से पंजाब को देखना गलत होगा। अजनाला में अमृतपाल ने जिस तरह से गुरु ग्रंथ साहिब को ढाल बनाया, पंजाबियों का एक बड़ा हिस्सा उससे नाराज है। पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब से बड़ा और कुछ नहीं हो सकता। वहां पहले भी गुरु ग्रंथ साहिब के साथ बेअदबी की घटनाएं हुई हैं, मगर पंजाब कभी नहीं सुलगा। ऐसे में अगर कोई यह कहता है कि पंजाबी अलगाव चाहते हैं तो यह बात सिरे से गलत है। लगभग पूरा पंजाब नर्म ख्याली है, जो शांति और तरक्की में यकीन रखता है। जिस तरह से अमृतपाल सिंह के लिए पंजाब के अधिकतर हिस्सों से इंटरनेट काट रखा है, एक अघोषित इमरजेंसी लगा रखी है- इससे एक बड़ी बहस शुरू हो चुकी है कि क्या अमृतपाल सिंह गुरु ग्रंथ साहिब से भी बड़ा हो गया? जाहिर है, पंजाब का भविष्य इसी बहस से हल होने वाला है, पंजाब के लोग ही इसे हल करेंगे।

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