गया. बिहार के गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड में सोनबरसा गांव के पास एक साधारण तालाब की खुदाई ने फिर से इतिहास की एक झलक दिखाई है. सूर्यमणि राइस मिल के समीप इस कच्चे तालाब में बाउंड्री वॉल बनाने के दौरान दो प्राचीन काले पत्थर की मूर्तियां निकलीं, जिन्हें स्थानीय लोग श्रीराम-हनुमान और पांडवों से जुड़ी मान रहे हैं. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में एक मूर्ति को भगवान भास्कर (सूर्य देव) की बताई जा रही है. यह घटना दो दिन पुरानी है, लेकिन इसका संदर्भ बड़ा है. क्या ये लगातार मिल रही मूर्तियां हमें किसी गहरे ऐतिहासिक रहस्य की ओर इशारा कर रही हैं, जिसे हम नजरअंदाज कर रहे हैं?बिहार की धरती बार बार यह साबित कर रही है कि इसके नीचे इतिहास अब भी सांस ले रहा है. कहीं खेत जोतते समय, कहीं सड़क बनाते वक्त और अब गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड में एक साधारण तालाब की खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्तियों का मिलना इसी कड़ी की नई कड़ी है.
गया में फिर जमीन के नीचे से बोला अतीत
दरअसल, बिहार की धरती पर प्राचीन मूर्तियों की खोज कोई नई बात नहीं. हाल के वर्षों में राज्य के विभिन्न जिलों में कई ऐसी खोजें हुई हैं जो हिंदू देवताओं, जैन तीर्थंकरों और बौद्ध अवशेषों से जुड़ी हैं. उदाहरण के लिए, जमुई जिले में सूर्य देव की एक मूर्ति मिली थी जो प्रारंभिक पाला काल (लगभग 8वीं-10वीं शताब्दी) की बताई जाती है. इसी तरह, गया, नालंदा और वैशाली में 1,200 से 2,000 साल पुरानी बुद्ध प्रतिमाएं, नवादा और गया में 1,000 साल से अधिक पुरानी जैन तीर्थंकर मूर्तियां, और भगवान विष्णु, भगवान गणेश एवं सूर्यदेव की मूर्तियां मिल चुकी हैं.
गया में बार बार क्यों मिल रही हैं प्राचीन मूर्तियां
जानकारों की दृष्टि में ये खोजें बताती हैं कि बिहार न केवल बौद्ध और जैन इतिहास का केंद्र रहा है, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना का भी एक प्रमुख स्थल रहा है. गया में सोनबरसा की यह नई खोज इसी सिलसिले की अगली कड़ी लगती है. पहले यहां भगवान भास्कर की मूर्ति मिल चुकी है और अब भगवान श्रीराम, हनुमान जी या पांडवों से जुड़ी अद्भुत मूर्तियां मिलीं.

तालाब की खुदाई में निकला इतिहास
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ये काले पत्थर की मूर्तियां भारी और बेशकीमती हैं जो सदियों पुरानी लगती हैं. मजदूरों ने पानी निकालते समय इन्हें देखा और ठेकेदार को सूचना दी. खबर फैलते ही गांववासी जमा हो गए और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की. अब इन मूर्तियों को पुरातत्व विभाग के हवाले किया जाएगा. लेकिन सवाल यह है- क्या ये संयोग मात्र हैं, या इतिहास हमें चेतावनी दे रहा है कि हम अपनी विरासत को संरक्षित करने में लापरवाही बरत रहे हैं?
खुदाई में मिलीं प्राचीन मूर्तियां
ADVERTISEMENT
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार की मिट्टी में ऐसे अवशेषों का मिलना सामान्य है, क्योंकि यह क्षेत्र पाल और मौर्य काल से धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है. गया जैसे इलाके में सूर्य पूजा की परंपरा प्राचीन है और ऐसी मूर्तियां किसी खोए हुए मंदिर या पूजा स्थल की ओर इशारा कर सकती हैं. हालांकि, अभी पुरातात्विक जांच बाकी है. अभी एएसआई (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) जैसी संस्थाएं इनकी उम्र, शैली और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि करेंगी. अगर ये वाकई मध्यकालीन या उससे पुरानी साबित हुईं तो यह क्षेत्र पर्यटन और शोध का नया केंद्र बन सकता है.
गया में फिर जमीन के नीचे से निकलीं प्राचीन मूर्तियां, क्या छिपा है कोई खोया हुआ मंदिर
गया में मिलीं रहस्यमयी काले पत्थर की मूर्तियां
फिलहाल, ग्रामीणों ने काले पत्थर की इन अमूल्य मूर्तियों को सुरक्षित रखा है और उन्हें स्थानीय घाट पर स्थापित करने की चर्चा है. लेकिन विशेषज्ञ चेताते हुए कहते हैं कि बिना जांच के ऐसी कार्रवाई से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सबूत खो सकते हैं. ऐसे में सवाल यह कि क्या हम इन इशारों को समझकर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाएंगे या फिर इन्हें महज संयोग मानकर भूल जाएंगे? समय बताएगा, लेकिन इतिहास की ये आवाजें जोरों से गूंज रही हैं.