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ऐंड्रू सायमंड्सः ओठों पर सफेद क्रीम और गुंथी लटों वाला वह बदनाम क्रिकेटर

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ओठों पर सफेद जिंक की क्रीम और लटों वाला वह क्रिकेटर। मैदान पर उसकी मौजूदगी का अहसास हमेशा होता था। चाहे बोलिंग हो, चाहे बैटिंग हो, चाहे फिल्डिंग हो या फिर कोई विवाद। ऐंड्रू सायमंड्स को लेकर कई छवियां हैं। यह उन्होंने खुद गढ़ीं। उन पर यह ताउम्र चस्पा रहीं। और आज जब ऐंड्रू चले गए, तो वे ही ज्यादातर याद आती हैं।

मनमौजी। इस हद तक कि सीरीज से पहले टीम मीटिंग चल रही है और बंदा ऑस्ट्रेलिया की डार्विन नदी के किनारे बैठकर मछली पकड़ने में मस्त है। मुंहफट। इस हद तक कि एक इंटरव्यू में अपने अच्छे दोस्त हेडन को यह बोलकर सन्न कर देता है कि उसके घर डिनर पर जाना इसलिए अच्छा लगता है कि उनकी बीवी को देखने का मौका मिल जाता है।

पियक्कड़। इस हद तक कि बांग्लादेश मैच से पहले वाली रात बंदा घंटों पब में मौज काट रहा हो। और सुबह इस कदर नींद के आगोश में हो कि वॉर्मअप कर रही टीम को उन्हें मुंह पर पानी डालकर उठाना पड़ रहा हो। और यही नहीं बंदा मरहूम हो चुके ऑस्ट्रेलिया के महान ऑलराउंडर कीथ मिलर के साथ दो जाम लगाने की ख्वाहिश दिल में पाले बैठा हो। हरभजन के साथ उनका ‘मंकीगेट’ विवाद, गाबा में मैदान में नंग-धड़ंग घुसे स्ट्रिकर को धक्का देकर बाहर निकालते और बिग बॉस के घर में पूजा मिश्रा को फूल देकर रिझाते सायमंड्स भी यादों में रहेंगे।

लेकिन इन छवियों से अलग सायमंड्स कुछ और भी थे। ऊपर दी हुई काबिलियत न रखते, तो वह बहुत कुछ होते। ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट में उनके लिए बहुत कुछ था। बेशुमार मौके थे। उन्होंने इसे खुद खत्म किया। इन सब से इतर ऐसा बहुत कुछ है, जो सायइंड्स को सायमंड्स बनाते थे। आज उनके जाने पर क्रिकेट के मैदान से कुछ खो जाने का जो अहसास है, वह इसी वजह से है।
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इन तस्वीरों के बीच सायमंड्स मैदान पर कवर और मिड विकेट पर मुस्तैद खड़े नजर आते हैं। वही जिंक क्रीम और गुंथी हुई घुंघराली लटों के साथ। खतरनाक टाइगर शार्क जैसे। यह उपाधि उन्हें कैप्टन रिकी पोंटिंग ने दी थी, जो उनके हुनर के कायल थे और कई मौकों पर उनके लिए ढाल बनते रहे। सायमंड्स के वे बेमिसाल थ्रो। गिल्लियां बिखरेता गजब का निशाना। अच्छा सा अच्छा बल्लेबाज चुराने से पहले सोचे।

और ऑस्ट्रेलिया से उनकी मुहब्बत। वह भी इस हद तक कि इंग्लैंड की जूनियर टीम में चुने जाने के बाद भी वह ऑफर ठुकरा डालते हैं। यह कहते हुए- मैं इंग्लैंड के लिए नहीं खेलना चाहता था, मैं अपनी मां से नहीं मिलना चाहता था। मैं खुद को एक ऑस्ट्रेलियाई मानता था और वह था।’ दरअसल ऐंड्रू के पास अपनी पारिवारिक वजहों से दो मुल्कों में खेलने के मौके थे। उन्हें इंग्लैंड की एक दंपती ने कैरेबियाई परिवार से गोद लिया था। वे बाद में ऑस्ट्रेलिया जाकर बस गए थे।

और बाद के दिनों में सायमंड्स का वह घुटा हुआ सिर भी यादों में रह जाएगा। जिसमें एक नरमदिल इंसान छिपा है। अपनी जुल्फों को, जो उनकी पहचान रहीं, उन्होंने चैरिटी के लिए दान कर दीं। और आखिर में याद आएगा 1995 में 20 साल की उम्र में छक्के बरसाता वह लड़का। जिसने तब काउंटी में 16 छक्कों के साथ 206 गेंदों पर नाबाद 254 रन ठोक तहलका मचा दिया था।

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