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अंजना ओम कश्यप …. इस सच्चाई को भी तो कबूल कीजिए  

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प्रो. राजकुमार जैन

”आजतक’ चैनल की एंकरनी अंजना ओम कश्यप दुबई में बिहार वासियों की एक बैठक में तकरीर करते हुए कह रही थी कि मैं तटस्थ रिपोर्टिंग करती हूं। उनकी तकरीर में पर्दे की ओट में बिहार की, जनता द्वारा चुनी गई सरकारे निशाने पर थी। मैंने उनके कमेंट बॉक्स पर एक टिप्पणी लिख दी, कुछ देर के लिए तो वह सुर्खियों में बनी रही, परंतु थोड़ी देर बाद ही वह नदारद हो गई, हटा दिया गया।

ऐसे वाचाल, बिना किसी उसूल के पाबंद, चैनलों के मालिकों की मोटी तनख्वाह की गुलाम गिरी किस स्तर तक करते हैं, उससे हर कोई वाकिफ है। बाहरी रूप से अपने को इंसाफ पसंद, जम्हूरियत, सच्चाई, हकीकत के पैरोंकार होने का भी दावा करते हैं। अंजना ओम कश्यप और रवीश कुमार यह दो किरदार हमारे सामने है, उसमे क्या फर्क है? वह मैंने अपनी टिप्पणी में लिखा था, उसको मैं हूबहू पेश कर रहा हूं।

मोहतरमा अंजना ओम कश्यप जी, आपने बिहार और बिहारीयो के बारे में बिल्कुल दुरुस्त फरमाया। हिंदुस्तानी लोकतंत्र में बिहार ही एक ऐसा सुबा है, जहां मजहब, जाति, क्षेत्रीयता को पीछे धकेलते हुए आचार्य कृपलानी, मधुलिमए, र्जॉर्ज फर्नांडिस रवींद्र वर्मा को चुनकर कई बार लोकसभा में भेजा। परंतु आपने अपने वक्तव्य में एक गलत बयानी की है कि जब मैं चुनाव को कवर करती हूं तो सच्चाई को बयां करती हूं।

माफ कीजिए मोदी और भाजपा सरकार की जो भडैती, चिल्लाते, हाथों को नचाते भक्ति आप करती रही है, उससे भी यह मुल्क वाकिफ है। आप अपने चैनल के मालिको को खुश करने के लिए बढ़ चढ़कर बोलती रही है। रवीश कुमार भी बिहार के हैं, हमें उन पर फख्र है। सच्चाई की तरफदारी, जुल्म और जालिम निजाम के खिलाफ उन्होंने हमेशा अपनी आवाज को बुलंद रखा, जिसके कारण बड़ी नौकरी को उनको छोड़ना पड़ा। क्या आप यह करने की कुव्वत रखती है ?हालांकि आप कह सकती हैं कि यह तो मेरी नौकरी, चैनल की बंदिश के कारण है। इस सच्चाई को भी तो कबूल कीजिए।   

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