राकेश अचल
मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन अपने मातहतों की वीडियो कांफ्रेसिंग में भ्रष्टाचार को लेकर की गई सच बयानी पर चौबीस घंटे भी नहीं टिक पाए और उन्होंने अपने ही द्वारा लगाए गए दागों को सरकारी प्रतिवाद के जरिये धोने की कोशिश की.
मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि अनुराग जैन अपने पहले के 34 मुख सचिवों में सबसे ज्यादा असफल और निष्प्रभावी मुख्य सचिव साबित हुए है. मुझे तकलीफ इसलिए भी है क्योंकि वे मेरे गृहनगर ग्वालियर से आते हैं और सच बोलते हुए उस पर अडिग नहीं रह पाए.
अनुराग जैन 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं. उन्होंने 3 अक्टूबर 2024 को मध्य प्रदेश के 35वें मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था. उनका कार्यकाल अगस्त 2025 में समाप्त होना था, लेकिन अब यह अगस्त 2026 तक बढ़ा दिया गया है. जैन ने जबसे कार्यभार सम्हाला है तबसे वे सचिवालय के बाहर शायद ही कभी निकले हों. उन्होंने शायद ही कभी कोई संभागीय बैठक ली हो. और तो और वे इंदौर में दूषित पेयजल कांड के बाद भी मौके पर नमूदार नहीं हुए.उन्हे जैसे सचिवालय ने जकड लिया है.
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि जैन के कार्यकाल में मप्र की नौकरशाही न सिर्फ असीमित रूप से भ्रष्ट हुई है बल्कि निरंकुश भी हुई है. ये पहला मौका है कि कोई मुख्य सचिव अपने मातहतों को आर एस एस प्रमुख डॉ मोहन भागवत के कार्यक्रम में जाने से नहीं रोक पाया. इंदौर कलेक्टर तो संघ कार्यालय में हाजरी दे आए किंतु मुख्य सचिव उनसे स्पष्टीकरण तक नहीं मांग पाए.
संभागीय अधिकारियो की वीडियो कांफ्रेंसिंग में अनुराग जैन ने कमिश्नरों और कलेक्टरों से कातर भाव से कहा था कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नौकरशाही के आकंठ भ्रष्टाचार से आहत हैं क्योंकि कोई कलेक्टर या कमिश्नर बिना पैसे के काम ही नहीं करता. प्रदेश के सबसे बडे अखबार में जब अनुराग जैन का आरोप सुर्खी बन गया तोसरकार की ओर से उसका आधिकारिक प्रतिवाद करना पडा. प्रतिवाद करने से हकीकत बदल नहीं जाती. जिस अखबार में अनुराग जैन के हवाले से खहर छपी थी उस अखबार में मैने काम किया है और मुझे पूरा भरोसा है कि खबर सौ फीसदी सही ही होगी.
वैसे मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के विरुद्ध मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई थी। मुख्य सचिव जैन ने कहा था कि कोई यह न समझें कि कुछ पता नहीं चलता। किसके यहां क्या पक रहा है, सब पता चल जाता है। इसलिए सभी को आगाह किया जाता है कि करप्शन से दूर रहें और सरकार की प्राथमिकता के साथ जनता के हितों के लिए काम करें। जैन ने साफ कहा था कि कुछ जिलों की कंपलेन उनके और सीएम के पास आई है, इसलिए सुधर जाएं तो ही बेहतर होगा। सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिनी कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस पर एक्शन की दूसरी समीक्षा बैठक में सीएस जैन ने यह चेतावनी अफसरों को दी थी.
मुझे लगता है कि अखबार ने अनुराग जैन को राहत देने के लिए प्रतिवाद छाप दिया लेकिन अपनी खबर के प्रमाण को सार्वजनिक नहीं किया. इसके पीछे सौजन्य के साथ ही व्यापारिक विवशता भी हो सकती है. बहरहाल पूरा प्रदेश जानता है कि मप्र में नौकरशाही बेलगाम है. मै अकेले अनुराग जैन के गृहनगर का ही उदाहरण दूं तो उनकी बात की पुष्टि हो जाएगी. क्योंकि ग्वालियर में ही कमिश्नर ग्वालियर विकास प्राधिकरण की एक बोर्ड मीटिंग नहीं बुला पाया. कलेक्टर तो महिला हैं इसलिए उन्हे अपवाद कहा जा सकता है, लेकिन यदि आप कलेक्ट्रोरेट जाएं तो बिना नपे वापस नहीं आ सकते.
बेहतर होता कि मुख्य सचिव अपनी बात पर अडिग रहते. कोई उन्हे अगस्त, 2026 से पहले हटाता ही नहीं, क्योंकि वे जैसे मुख्य सचिव हैं वैसा कोई दूसरा चिराग ले खोजने पर भी नहीं मिलने वाला. वे सचमुच के जैन हैं. उनका अपना आचरण शुद्ध हो सकता है किंतु जब तक इसकी छाप पूरे प्रश पर नजर न आए तो जनता को क्या लाभ?
आपको याद दिला दूं कि मुख्य सचिव अनुराग जैन कोई मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पसंद नहीं हैं. उन्हे केंद्र की ओर से थोपा गया है. केंद्र ने ही जैन की सेवा में विस्तार भी किया है, मुख्यमंत्री की पसंद इस नियुक्ति में निर्णायक भूमिका निभाती है. , “मुख्य सचिव चुनते समय सिर्फ वरिष्ठता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का विश्वास, प्रशासनिक अनुभव, और राजनीतिक परिस्थितियां भी अहम होती हैं.” सरकार के लिए यह निर्णय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. लेकिन हाल ही में कुछ घटनाओं ने मौजूदा मुख्य सचिव के पक्ष को कमजोर किया है. जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद हुआ, जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री पर भी आरोप लगे. बाद में सरकार ने मंत्री को क्लीन चिट दे दी और आरोपों को “निराधार” बताया, लेकिन माना गया कि मुख्य सचिव कार्यालय इस मामले को सही तरह से नहीं संभाल पाया. अब जो भी हो अगले 8 महीने तो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को अनुराग जैन से ही निभाना पडेगी.
@ राकेश अचल

