शशिकांत गुप्ते
लोकतंत्र में चुनाव का महत्व है।
स्वतंत्रता के बाद वोटो के लिए पेटियां होती थी।
राजनैतिक दलों के द्वारा नारे लगाए जाते थे। वोट किसमे डालोगे, फलां छाप पेटी में
संसार के अटल नियम के अनुसार परिवर्तन हुआ,मतदाता पत्रों पर चुनाव चिन्ह अंकित हुए,और एक ही मत पेटी (Ballot Box) में मतपत्र डाले जाते थे।
अब ईवीएम एक मशीन से मत दान होता है।
सैद्धांतिक रूप से मत की कीमत अमूल्य है।
मतदान के बाद निर्वाचित जनप्रतिनिधि का मूल्य बहुत ही अलग अंदाज में आंका जाता है।
यह मूल्य क्रय करने वाले दल के आकाओं पर निर्भर होता है।
सांकेतिक भाषा पेटियों(लाखों) या खोखों (करोड़ों) में कीमत आंकी जाती है।
पिछले एक दशक से तो कीमत आंकने का एक बहुत नायब तरीका ईजाद किया गया है।
इस मुद्दे के संदर्भ में सन 1998 में प्रदर्शित फ्लॉप फिल्म Miss 420 में गीतकार अनु मलिक ने लिखे गीत की कुछ पंक्तियों का स्मरण होता है।
गाने का मुखड़ा है।
आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा
इस गाने की पैरोडी इस तरह प्रस्तुत की जा सकती है।
हमारी गाड़ी में बैठोगे तमाम जांच खत्म हो जाएगी
पाक साफ और दूध के धुले हो जाओगे
वातानुकूल वाहनों में तफरी करवाएंगे
“पीना” खाना और भी सुविधाएं सुलभ रीति से उपलब्ध करवाएंगे
प्यार,खेल,युद्ध और “राज” अनीति में सब कुछ जायज़ है।
समाचारों की सुखियों में जब उपयुक्त समाचार पढ़ने,देखने को मिलते हैं, तो इस बात की पुष्टि हो जाती है, सच में अपना देश भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा
जब खाना सिर्फ पसंद करने वाले ही खाने के बाद डकार को भी हजम करने वाले सारे एक ही जगह गलबहियां करने तो गर्व के साथ निश्चित ही …….. मौसेरे भाई वाली कहावत चरितार्थ होगी
यह आलोचना का विषय नहीं है।
जिस तरह नशा मुक्ति केंद्र होते हैं,युवा पीढ़ी को सरलता से समझने वाली भाषा में
Rehabilitation और De-addiction Center होते हैं, ठीक इसी तरह इसे भ्रष्टाचार मुक्त विशाल संस्थान समझना चाहिए।
संस्थान कहने का तात्पर्य विश्व के सबसे बड़े दल की स्व घोषित उपमा जो है।
देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले,शहादत देने वाले, जेलों में यातनाएं सहने वाले,और वे सभी जो स्वतंत्रता आंदोलन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग करने वाले। सभी से विनम्र क्षमा की गुहार करते हुए कलम को यहीं विराम।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

