-निर्मल कुमार शर्मा
आजकल भारत की केन्द्रीय और कई राज्यों की सत्ता पर कब्जा जमा लेने वाली भारतीय जनता पार्टी और उसकी पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समवेत स्वर में यह बात प्रचारित करने में जुटी हुई है कि भारत में मुस्लिम समुदाय के लोग ही मांसाहारी है,जबकि इसी सरकार की कई सरकारी सरकारी एजेंसियों के आंकड़े सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसकी पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उक्त दावों की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं ! अब आइए सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों का विश्लेषण करके देखते हैं कि इस मामले में वास्तविक स्थिति क्या है ?
भारत की संपूर्ण आबादी आजकल लगभग 1अरब 40करोड़ है,जिसमें कुल हिन्दू जनसंख्या 80प्रतिशत है,इसका मतलब भारत में हिन्दुओं की कुल जनसंख्या 1अरब 12करोड़ के लगभग है। दूसरी तरफ भारत में मुसलमानों की जनसंख्या यहां की कुल जनसंख्या की 14.23 प्रतिशत है,इस हिसाब से भारत में मुसलमानों की कुल जनसंख्या लगभग 19करोड़ 92लाख है । अब कॉम्प्रिहेंसिव नैशनल न्यूट्रिशन सर्वे या Comprehensive National Nutrition Survey या CNNS और नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे -5 या National Family Health Survey-5 या NFHS-5 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार हिंदू, मुस्लिम,सिख,जैन,ईसाई आदि सभी धर्मों को मानने वाले लोगों में इधर के वर्षों में मांस खाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है,इन दोनों प्रतिष्ठित संस्थाओं की रिपोर्ट्स के अनुसार हिन्दुओं में 77.95 प्रतिशत और मुसलमानों में 97.96प्रतिशत आबादी मांसाहारी है,इस हिसाब से 19.45करोड़ मुस्लिम समाज के लोग मांस खाते हैं,तो 87.30 करोड़ हिन्दू समाज के लोग अपने भोजन में मांस को सम्मिलित करते हैं। इस प्रकार हम इन आंकड़ों के आधार पर देखते हैं कि मांस खाने वाले भारतीय मुसलमानों कि संख्या के चार गुने से भी ज्यादा हिन्दू आबादी मांस भक्षण करती है !
इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा हतप्रभ करनेवाली बात यह भी आ रही है कि हिन्दू , मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्मों के अनुयाइयों के विपरीत कथित सबसे अहिंसक माने जाने वाले बौद्ध और जैन धर्म के मतावलंबियों में भी इधर के वर्षों में मांस खाने का रूझान बढ़ा है ! नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे या National Family Health Survey-5 या NFHS-5 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार कथित अहिंसक और शाकाहारी भोजन करने के लिए जाने जाने वाले बौद्ध धर्म के मानने वाले लोग तो कथित सबसे ज्यादा मांस खाने के लिए बदनाम मुस्लिम समुदाय के लगभग समकक्ष ही 97.75 प्रतिशत तक लोग मांस भक्षण कर रहे हैं !
नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे या National Family Health Survey-5 या NFHS-5 की इन्हीं रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के 16 राज्यो में तो आंकड़े ये बताते हैं कि वहां के 90 प्रतिशत तक लोग मांसाहारी हैं,जो मीट,चिकन या मछली खाते हैं ! वहीं 4 राज्यों के मांसाहारी लोगों में यह आंकड़ा 75-90 प्रतिशत तक है ! सर्वे के मुताबिक पांच राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में 50 से 75 प्रतिशत तक लोग नॉनवेज खाते हैं ! राज्यों की अगर बात करें तो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 98.7 प्रतिशत,उसके बाद लक्षद्वीप में 98.4 प्रतिशत, तमिलनाडु में 97.8 प्रतिशत,असम में 78.6 प्रतिशत,दिल्ली में 63.2प्रतिशत,उत्तर प्रदेश में 55प्रतिशत और राजस्थान में 26.8प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं !
भारत के वे मंदिर जो मांसाहारी प्रसाद परोसते हैं !
धर्म के मामले में यह आम धारणा प्रचारित की गई है कि ईश्वर, खुदा या गाड सभी जीवों का रक्षक और पालक है,परन्तु इसी भारत महान देश में कुछ ऐसे मंदिरों में भगवान लोग प्रतिष्ठापित हैं,जहां नीरीह, पक्षियों और पशुओं मसलन मुर्गों,बकरों और भैंसों की हत्याएं की जातीं हैं और उनके मांस को उन्हीं मंदिरों के परिसरों में बाकायदा पकाया जाता है,और उस मांस को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है,जिसे भगवान के कथित भक्त लोग बाकायदा स्वाद लेकर खाते हैं ! कितनी दु:खद बात है कि भारत में ही ऐसे दर्जनों मंदिर हैं,जहां नीरीह पक्षियों और पशुओं की कथित देवियों और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बर्बर हत्याएं तक की जातीं हैं ! उदाहरणार्थ –
1- विमला मंदिर,पुरी,ओड़ीसा
यह देवी विमला या बिमला का मंदिर पुरी,उड़ीसा में जगन्नाथ मंदिर परिसर का ही एक हिस्सा है,जिसमें दुर्गा पूजा के दौरान मांस और मछली परोसा जाता है,दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान पवित्र मार्कंडा मंदिर के तालाब से मछली पकड़ कर पकाई जाती है और इसी दौरान एक बकरे की भी हत्या करके उसके मांस को पकाकर मछली के मांस के साथ ही भक्तों को परोसा जाता है,इन दोनों जीवों के मांस को उस मंदिर के पुजारी “बिमला परुसा ” का नामकरण कर दिए हैं !
2 – मुनियांडी स्वामी मंदिर, तमिलनाडु
यह मंदिर तमिलनाडु राज्य के मदुरै के छोटे से गांव वडक्कमपट्टी में स्थित है,भगवान मुनियांदी को प्रसन्न करने के लिए प्रतिवर्ष 24,25और 26 जनवरी को तीन दिवसीय भव्य वार्षिक उत्सव आयोजित किया जाता है,जिसे मुनीस्वरार भी कहा जाता है,पिछले वर्ष ऐसे ही एक भव्य आयोजन में 1800 किलोग्राम बिरयानी बनाई गई थी,जिसमें 250 नीरीह मुर्गों और 200 बकरों का निर्ममता पूर्वक कत्ल कर दिया गया था ! इन बेजुबान,बेबस और असहाय पशु-पक्षियों के मांस को बाकायदा उस मंदिर परिसर में ही पुजारियों और अन्य सेवादारों द्वारा रातभर पकाया जाता है और सुबह सूर्योदय से पूर्व ही उनके मांस को प्रसाद के रूप में वितरित करके कथित भगवान के भक्तों द्वारा खाया जाता है ! मिडिया के अनुसार यह क्रूर परंपरा पिछले 100वर्षों से प्रतिवर्ष बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है !
3 – पारसिनिक कदवु मंदिर,केरल
दक्षिण भारतीय भगवान मुथप्पन के पारसिनिक कदवु मंदिर में प्रसाद में ताड़ी और दाह संस्कार की मछली को पकाकर भक्तों में प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है !
4 – तरकुलहा देवी मंदिर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से लगभग 20किलोमीटर दूर तरकुलहा देवी मंदिर में हर वर्षचैत्र नवरात्रि के दौरान मकरसंक्रांति के अवसर पर एक मेला लगता है,यहां भी कथित तरकुल्हा देवी को प्रसन्न करने के लिए एक बकरे का कत्ल कर उसके मांस को उसी मंदिर के अहाते में मिट्टी के बर्तनों या कड़ाही में पकाकर भक्तों को प्रसाद के रूप में परोसा जाता है ! सबसे बड़ी बात यह है कि इस नृशंस आयोजन में गोरखनाथ मंदिर के महंत श्री योगी आदित्यनाथ जी जो आजकल उत्तर प्रदेश राज्य के मुखिया पद पर भी विराजमान हैं,भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए अपने पूरे राजकीय लाव-लश्कर के साथ पधारते हैं !
5 – तारापीठ मंदिर, पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में तारापीठ मंदिर में भी विभिन्न पशुओं जैसे बकरों आदि की उनकी गर्दन काटकर हत्या करके उसके मांस को पकाकर,मादक पेय यानी शराब के साथ देवी को अर्पित करते हैं। उसके बाद भक्तगण उस मांस को मदिरा के साथ खूब जमकर खाते-पीते हैं !
6 – दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल इस मंदिर में भी मछलियों और पशुओं की हत्या कर के उसके मांस को प्रसाद के रूप में उसे वितरित करके उसे खाया जाता है !
7- कालीघाट, कोलकाता
कोलकाता में स्थित यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है। इस कथित देवी के भक्तगण अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां जानवरों को बली देने के लिए लाते हैं। इस मंदिर के पुजारियों के अनुसार यहां हर रोज ऐसे विभिन्न जानवरों की हत्या करके बाद में उनके मांस को पकाया जाता है और उसे भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। विडंबना देखिए कि यहां स्थित काली देवी को शाकाहारी भोजन दिया जाता है, लेकिन उनकी सहेलियों,जिनका नाम क्रमशः डाकिनी और योगिनी है,को मंदिर परिसर में ही बर्बरतापूर्वक मारे गए नीरीह पशुओं के मांस से बनाए गए, मांसाहारी भोजन दिया जाता है !
8 – कामाख्या मंदिर,गुवाहाटी, असम
कामाख्या मंदिर एक ऐसा मंदिर है जो भैंसे, बकरियों,कबूतरों और बत्तखों जैसे जानवरों और पक्षियों की हत्या करने के लिए जाना जाता है ! इन पशु-पक्षियों के मांस को प्रसाद के रूप में सभी को बांट दिया जाता है, लेकिन भैंसे के मांस को गुवाहाटी शहर के आसपास 14 पहाड़ियों में फैले 7,032 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्रों में बसे आदिवासी गाँवों के आदिवासियों को बांट दिया जाता है !
9 – बटुक भैरव मंदिर,वाराणसी
अब हमारे सबसे काबिल प्रधानमंत्री श्रीयुत् श्रीमान नरेंद्र मोदी जी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी शहर स्थित उक्त मंदिर के बारे में जान लीजिए,इस मंदिर में प्रतिदिन शाम को महाआरती के बाद मटन, चिकन और मछली के साथ चढ़ता है मदिरा का भोग लगाया जाता है, इतना ही नहीं भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिये शराब से उनका खप्पड़ भी भर दिया जाता है !
10 – भैरव मंदिर,पुराना किला,नई दिल्ली
इस देश के दूर-दराज इस इलाकों की बात छोड़ दीजिए,नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान के पास पुराने किले से सटा हुआ एक भैरव मंदिर है, जहां श्री भैरव जी को केवल शराब चढ़ाई जाती है ! इस मंदिर के बाहर बैठे भिखारी भी उन भक्तगणों से जो अपनी इच्छित मनोकामना पूरी करने के लिए उक्त भैरव मंदिर में शराब चढ़ाकर बाहर निकलते हैं,उनसे अपने सामने रखे पात्रों में भीख के रूप में शराब की एक-आध घूंट ही मांगते हैं !
इस लेख में उक्त वर्णित सभी तथ्यों से यह तो पता चल ही गया है कि मुसलमानों से ज्यादा संख्या में हिन्दू धर्म के अनुयायियों द्वारा मांसभक्षण किया जाता है ! इसलिए भारत की केन्द्रीय और राज्यों की सत्ता पर काबिज वर्तमान समय के सत्ताधारियों को अपने अंधसमर्थकों द्वारा ईसाईयों और मुसलमानों को मांसभक्षण के लिए मिथ्या दोषारोपण करके उनकी सार्वजनिक और सरेआम हत्या करना सिरे से ही ग़लत और नाजायज है !
दूसरा अगर परम् पिता ईश्वर या देव या कोई देवी किसी निरीह पशु,पक्षी की हत्या कर देने से प्रसन्न होता है या होती है,तो इससे ज्यादा वीभत्स,इंसानियत विरोधी कोई बात हो नहीं सकती ! सभी धर्म यही सिखाते और उपदेश देते हैं कि इस दुनिया के सभी जीव-जंतुओं का यानी सभी का पालनकर्ता, पिता तुल्य ईश्वर और मां तुल्य देवी मां है ! उस स्थिति में दूसरी तरफ यह कथन कि किसी जीव की हत्या करके उसके मृत शरीर को उस कथित देवी या देव के चरणों में चढ़ा देने से वह खुश हो जाता है,यह बहुत ही अमानवीय,बर्बर, क्रूर,असहिष्णु ,राक्षसी और मानवेत्तर अवगुण के सिवा कुछ हो ही नहीं सकता ! वास्तविकता यह है कि कथित भगवान के पुजारी वर्ग ने अपनी जीभ और स्वाद के लिए यह भ्रामक बातें भारतीय कूपमण्डूक समाज में फैलाई है कि ‘अमुक देवी या देवता किसी निरीह प्राणी की हत्या करने से खुश हो जाता है ! ‘ जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी देवी या देवता की पत्थर की मूर्ति उसके चरणों में चढ़ाए गए प्रसाद का एक नैनो ग्राम अंश भी खा ही नहीं सकता ! वास्तविक तौर पर उस चढ़ाए गए मिठाई,फल या मांस का उपभोग पुरोहित वर्ग और कथित भक्त गण और मंदिर से जुड़े तमाम अन्य लोग करते हैं ! ठीक यही स्थिति इस्लाम धर्म में कथित खुदा के नाम पर की जानेवाली कुर्बानी के नाम पर बकरों के साथ जानलेवा नृशंसता और बर्बरता की जाती है !
-निर्मल कुमार शर्मा ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक,पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र,निष्पक्ष,बेखौफ , आमजनहितैषी, न्यायोचित व समसामयिक लेखन,संपर्क -9910629632, ईमेल – nirmalkumarsharma3@gmail.com

