अग्नि आलोक

*क्या गरीब, किसान और मजदूर के लिए जीवन होम करने वाले देश के दुश्मन हैं?*

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क्या सरकार की नीतियों का विरोध करने वाला ‘राष्ट्र-विरोधी’ और ‘शहरी-नक्सल’ हो जाता है? क्या गरीब, किसान और मजदूर के लिए जीवन होम करने वाले देश के दुश्मन हैं? क्या सरकार की हर बात पर हां हां कहने वाले ही देशभक्त माने जाएंगे? तो फिर इस लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा? क्या अर्थ है संविधान में ‘समाजवाद’ या ‘धर्मनिरपेक्ष’ का? यदि वैचारिक रूप से कोई अपंग हैं तो सामना करने से भागते क्यों हैं?

ये भी तो भारतीय हैं और भारत की फिक्र उन लोगों से ज्यादा ही है, जो सुविधा की रोटी तोड़ रहे हैं और जमीर को गिरवी रखे हुए हैं! जब गांव की जमीन, किसान और सरकार की नीतियों पर बात करने के लिए संसदीय समिति की बैठक में नर्मदा बचाओ आंदोलन की जान, मेधा पाटकर और अभिनेता प्रकाश राज को देखा तो भाजपा के सांसद वहां से गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो गए, यह कहते हुए कि ये तो राष्ट्र विरोधी हैं और शहरी-नक्सल हैं। क्या उन्हें अक्षय कुमार, कंगना राणावत या अशोक पंडित के होने की उम्मीद थी? ऐसा क्या हो गया कि भाजपा सांसदों ने कोरम ही पूरा नहीं होने दिया और बैठक ही रद करवा दी? क्या उन्हें डर था कि बैठक में इन वक्ताओं का जवाब नहीं दे सकेंगे या उनके मुकाबले की जानकारी न होने से शर्मिंदा होने से बचना चाह रहे थे?

मेधा पाटकर ने नर्मदा आंदोलन के लिए तब की कांग्रेस सरकार से भी दो-दो हाथ किए थे। पूरी सरकार, मेधा के खिलाफ लगी थी कि उन्हें रात में ठहरने के लिए जगह भी नहीं दी जा रही थी। बड़े-बांध का विरोध कर रही थीं कि हमने मोरवी की विनाशलीला देखी है और यह भी कि बाद में अन्य देशों में भी इस पर रोक लगी है। यायावर की जिंदगी जी है मेधा पाटकर ने और लोगों में जागरूकता पैदा की है।

गुजरात को फायदा हो रहा था नर्मदा बांध से और अंदाज लगाना मुश्किल नहीं है कि उस समय मुख्यमंत्री… आज के प्रधानमंत्री ही थे। प्रकाश राज के बयान तो सरकारी कान से कीड़े झाड़ते रहे हैं, लेकिन उन्होंने खेती में जो क्रांति की है, किसानों को नए-नए तरीके सिखाए हैं और खुद भी खेती करते हैं और किसानों की बात उठाते रहते हैं तो उन्हें देखकर भाजपा-सांसद बिदक क्यों गए? इसलिए कि उन्होंने तो कभी खेत में पैर भी नहीं धरा है। जमीन से जुड़ने के दो तरीके हैं, मेधा और प्रकाश वाला या… दूसरा जमीन देखकर लार टपकाने वाला। यदि बैठक में शामिल हो जाते तो शायद कुछ ज्ञान-वर्द्धन हो जाता… और यही तो नहीं चाहती है सरकारी पार्टी !

मेधा पाटकर और प्रकाश राज को देख ऐसा भड़के BJP सांसद, संसदीय समिति की बैठक नहीं हो पाई

मंगलवार, 1 जुलाई को लोकसभा की एक संसदीय समितिकी बैठक होनी थी, लेकिन नहीं हो सकी. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने बैठक से वॉकआउट कर दिया. ये सांसद बैठक में सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता मेधा पाटकर और एक्टर प्रकाश राज की मौजूदगी के विरोध में थे. जानकारी के मुताबिक़, BJP सांसदो ने दोनों को ‘राष्ट्र विरोधी’, ‘विकास विरोधी’ और ‘अर्बन नक्सल’ कहा.

ये बैठक भूमि अधिग्रहण कानून पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी. ओडिशा से कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका इस संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रही हैं. इस समिति में 29 सदस्य हैं.

1 जुलाई को मीटिंग के लिए 17 सांसद मौजूद थे. इनमें से 11 BJP सांसद थे और उन सभी ने मीटिंग से वॉकआउट कर दिया. BJP सदस्यों के बाहर चले जाने के बाद, कांग्रेस के चार सांसदों समेत छह सांसद बचे रहे. ऐसे में सप्तगिरि उलाका को बैठक रद्द करनी पड़ी. क्योंकि कोरम पूरा नहीं हुआ.

BJP सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी पार्टी के सांसदों के अलावा सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा भी उनके साथ थे. हालांकि, कांग्रेस सूत्रों ने दावा किया कि देवगौड़ा ने बैठक का बहिष्कार नहीं किया था.

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