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 बहस !

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चंद्रशेखर शर्मा

देश में एक तबका है, जो मानता है कि न्यूज़ चैनलों पर होने वाली बहसों से देश का साम्प्रदायिक सद्भाव तार-तार हो रहा है। हाल ही में और पहले भी देश की हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इन बहसों पर नाराजी जताई है। हालांकि निजी तौर पर अपन इन बहसों को कतई बुरा नहीं मानते। 

अलबत्ता मेरे अकेले के नहीं मानने की वक़त क्या ? सो बेशुमार लोग इन बहसों को बुरा मानते हैं तो आइए एक मुहिम शुरू करते हैं और उसमें मैं भी शामिल हूँ। मेरा मानना है कि टीवी पर ये बहसें बंद होंगी तो ये सोशल मीडिया आदि कहीं और शुरू हो जाएंगी लिहाजा अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर नया और सख्त कानून बनाये बगैर इसका समाधान असंभव है। सो सुप्रीम कोर्ट से मेरा निवेदन है कि मीलॉर्ड, बहसों को बुरा बताने या उन पर नाराजी जताने से कुछ नहीं होगा। बेहतर होगा कि आप अभिव्यक्ति की आजादी पर कारगर नया नियम बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दें। केंद्र सरकार से भी निवेदन है कि वो इस दिशा में जल्द से जल्द पहल करे। मैं इसकी मांग करता हूँ। यदि आप भी इन बहसों को बुरा मानते हैं और इनसे छुटकारा चाहते हैं तो गुजारिश है कि देश की बेहतरी की खातिर इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अभिव्यक्ति की आजादी पर नया कानून बनाने की मांग बुलंद करें और इस आशय की पोस्ट अपनी वॉल पर लगाएं। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो क्यों न यह माना जाए कि इन बहसों को लेकर आपकी नाराजी या नापसंदगी महज नौटंकी है ? करने वाले यह नौटंकी कर ही रहे हैं !

चंद्रशेखर शर्मा

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