–सुसंस्कृति परिहार
इन्द्रवती नाट्य मंच सीधी हालांकि अपने कई महत्वपूर्ण नाटकों के लिए मध्यप्रदेश की जानी मानी नाट्य संस्था है।नीरज कुंदेर की लगन और उत्साह का पर्याय यह मंच सीधी और अब प्रदेश के कई नगरों के साथ उत्तर प्रदेश में भी रंगमंचीय प्रतिभाओं को उभारने का काम कर रही है।इसी सिलसिले में मशहूर कहानीकार उदयप्रकाश की कहानी ‘तिरिछ’ का मंचन जगह जगह किया जा रहा है। मुझे इसका मंचन झांसी में देखने का अवसर मिला।

कहानी में तिरिछ के काटे जाने से पीड़ित जिस ग्रामीण पिता का चित्रण है वह पहले से ही शहर की संवेदनहीनता से वाक़िफ और डरा हुआ है वह एक सीधा सरल और संकोच के साए में रहने का आदी हैं।जब उसे गांव में तिरिछ काटता है तो ग्रामवासी उसका अपनी तरह से इलाज करते हैं उसके साथ अपनी संवेदनाएं रखते हैं।कुछ मिथकों का सहारा भी लेते हैं जिससे तिरिछ का ज़हर काबू में आता नज़र आता है किंतु जब एक दिन वे ट्रेक्टर में बैठकर शहर जाते हैं अपने लोगों के साथ तब तक वे ठीक महसूस करते हैं।जब उनका साथ छूटता है तो वे एक ऐसे संवेदनहीन शहर के बीच में पहुंचते हैं जहां एक रिटायर शिक्षक की कोई बात नहीं सुनता वह कवि , पत्रकार और अफसर से भी मिलता है लेकिन ढाक के वहीं तीन पात। थाने में उसकी जो बेइज्जती और अपमान होता है उसका दंश वह सहन नहीं कर पाता उसका ज़हर उस पर तारी होता जाता है वह छटपटाने लगता उसे पानी भी नहीं मिलता तब भी किसी का ध्यान उसकी ओर नहीं जाता अंततः वह शहर के जहरीले इंसानों की वजह से अपने जीवन को समाप्त कर देता है।
कहानी हमें अपनी संवेदनशीलता को सुरक्षित रखने और अन्य लोगों की संवेदनाओं को समझने की आवश्यकता को स्मरण दिलाती है। हमें शहरी जीवन में बदलाव लाने के साथ ही अपनी मानवीय संवेदनाओं को बरकरार रखने के लिए समर्पित होना चाहिए ताकि हम एक सही और समान समाज की नींव रख सकें। तिरिछ के काटने से एक बार आदमी बच भी सकता है परंतु शहरी संवेदनहीनता से नहीं बच सकता है।
इस कहानी में लेखक ने मनुष्य की संवेदनहीनता और शहर के आतंक को चित्रित करने का प्रयास किया है। इसी के साथ कुछ मिथकीय धारणाएँ और अंध-विश्वास भी व्यक्त हुए हैं। तिरिछ’ कहानी में तिरिछ के रूप में आने वाला दुःस्वप्न ही नगर की संवेदनहीनता को व्यक्त करता है ।
बुंदेलखंड नाट्य कला केंद्र समिति अभिनय प्रशिक्षण एवं कल्चरल रिसर्च सेंटर झांसी एवं इंद्रवती नाट्य समिति सीधी द्वारा बुंदेलखंड थियेटर में आयोजित नाट्य प्रदर्शन में उदय प्रकाश द्वारा लिखी गई तिरिछ नाटक का शानदार मंचन हुआ।एकल अभिनय करते हुए मनोज यादव ने पीड़ाओं को जिस तरह अपने किरदार में आत्मसात कर प्रस्तुत किया है वह विरल और अनूठा था । नाट्य समिति सीधी के युवा अभिनेता मनोज यादव ने दर्शकों को अपने अभिनय के पाश में कुछ ऐसा बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध से बस देखते रहे। ।एकल अभिनय करते हुए मनोज यादव ने पीड़ाओं को जिस तरह अपने किरदार में आत्मसात कर प्रस्तुत किया है वह विरल और अनूठा था । ग्राम्य अंचल और शहर की आधारभूत प्रवृत्तियों पर गहरे व्यंग्य का प्रभावी संप्रेषण उपस्थित दर्शकों के दिल में ना केवल बैठ गया बल्कि अंतस को हिला भी गया। नाटक का निर्देशन शिवा कुंदेर का था और संगीत से माहौल निर्मित करने का काम बैतूल के नीरज कुंभारे का था। संचालन हिमांशु द्विवेदी का था। नाटक समापन के बाद दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों के सवालों का जवाब मनोज यादव ने दिए।क्रम के अंत में दमोह कटनी से पधारे वरिष्ठ पत्रकार नंदलाल सिंह ने मनोज और नीरज को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।श्री सिंह ने मनोज के अभिनय और उदयप्रकाश की कहानियों की खासियतों पर इस अवसर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन बुंदेलखंड थियेटर झांसी प्रमुख डाॅ हिंमाशु द्विवेदी ने किया। रंगमंच साथियों का विशिष्ट सहयोग रहा।
एक उम्दा कहानी पर शानदार नाट्य प्रस्तुति एकल अभिनय ,एकल संगीत, एक छड़ी,एक स्टूल ,एक लोटे और राख के सिवाय कुछ नहीं।कम खर्च में एक ज़रुरी और महत्वपूर्ण जाग की अलख जगाती तिरिछ की टीम बधाई की पात्र है