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*बतंगड़*

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*-विवेक मेहता

          बात का बतंगड़ बनने में देर ही कितनी लगती है। दो लोग सड़क किनारे फूलों के गमले उठाकर महंगी गाड़ी की डिक्की में रख रहे थे। भाई लोगों ने वीडियो बना दिया और बतंगड़ खड़ा कर मजे ले लिए।

           बताते हैं कि गमले जी-20 सम्मेलन की सजावट के लिए मंगवाए गए थे। हो सकता है इन लोगों ने अंग्रेजी जी-20 का मतलब ‘गमला-20’ लगाया हो! और ये लोग गमले-20 के बजाय कुछ ही ले जा पाए। सारे देश में प्रसिद्ध हो गए। वैसे भी इन दिनों रिश्वत लेते पकड़े जाना, हनी ट्रैप में फंसना प्रसिद्धि ही दिलाता है,बदनामी नहीं।

              देश, जी-20 की सामान्य प्रक्रिया के तरह तहत मिली मेजबानी पर खुद ही पीठ थपथपा कर प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका। नेतृत्व की ताकत के भी ढोल पिट चुका। ताकत थी तो मेजबानी मुमकिन हुई। अब खबर है कि हमारी मेजबानी में हो रहे समारोह में सात गमले फूफाजी बनकर रूठ गए। बोले- हम फेमिली फोटो नहीं खींचवाएंगे। कहीं ये वही गमले तो नहीं जो मनमोहनजी अपनी महंगी गाड़ी में रख नहीं पाए और अब बतंगड़ कर रहे है- यूक्रेन-यूक्रेन का। अरे भाई, हम तो यूक्रेन के युद्ध को रुकवा कर अपने लोगों को भारत ला सकते हैं तो फिर 7 को सीधा लाइन में खड़ा नहीं कर सकते क्या? वह तो हमें बेमतलब ताकत दिखाते का शौक नहीं है। जी-20 में से जी-7 अलग होंगे तो पूछेंगे तो दोनों ही हमें। कहां जाएंगे? हमारे तो दोनों हाथ में ही लड्डू है। बजाओ ताली। 

            बाज लोग खाली बतंगड़ बनाते है। हो सकता है कि सरकारी आदेश हो। शहर को सुंदर बनाने के लिए विभिन्न विभाग पैसे दे। जैसा 2013 में लालन कॉलेज-भुज में लालकिला बन रहा था तब सरकारी विभागों को आदेश था। डेवलपमेंट अथॉरिटी ..लाख देगी, पीडब्ल्यूडी ..लाख देगी। तबके दैनिक भास्कर में लिस्ट भी छपी थी। यहां भी वैसा ही हो। गमला उठाऊ भाई प्रॉपर्टी का काम करता था। हो सकता है पैसे दिये हो और सोचा हो कि अपना ही माल है। थोड़ा सा वसूल ले। घर सुंदर होगा तो नगर भी सुंदर होगा। हो सकता है क्लेप्टोमेनिया से पीड़ित हो। अपने माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी तो खुद पर होती है। मेरे एक परिचित है। रिटायर हो गए। फिर भी कभी-कभी ऑफिस में जाते हैं झोला लटका कर। वहां रखी फोटोकॉपी मशीन की ट्रे में से सफेद पन्ने उठा लाते है। सब जानते है उनके बारे में। उनको आता देखकर खुद ही पन्ने संभाल लेते है। वीडियो वायरल करने जैसी टुच्ची हरकत नहीं करते। बात का बतंगड़ नहीं बनाते।

              बड़े लोगों को बड़े घपले ही शोभा देते है। वे नजर में नहीं आते। छोटा आदमी तो घपले में कितने जीरो आएंगे इसी गणित में जिंदगी गंवा देता है। और भाई लोग पुल के पुल, रेलवे लाइन, कम्पनी की कम्पनी तक गायब कर देते। पकड़े नहीं जाते। कोई बतंगड़ नहीं होता। सब सेटल हो जाता है।

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