केदारनाथ/बद्रीनाथ धाम
गीता और सुरेश हॉलैंड से सिर्फ चारधाम यात्रा के लिए भारत आए हैं। ट्रैवल प्लान बनाया, कुछ दोस्तों को भी साथ ले आए, पर बद्रीनाथ धाम तक पहुंचते-पहुंचते परेशान हो गए। वजह भीड़, ट्रैफिक जाम, खराब सड़कें, मिसमैनेजमेंट और बेतहाशा महंगाई।
सुरेश कहते हैं, ‘हम बद्रीनाथ धाम के लिए निकले थे, डेढ़ किलोमीटर का रास्ता तय करने में 2 घंटे लग गए। कई बार 3-4 घंटे लाइन में खड़े रहे, हमारा अनुभव बहुत खराब रहा।’
ये परेशानी सिर्फ गीता और सुरेश की नहीं है। 22 मई से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब तक 12 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं। खराब मौसम के बावजूद केदारनाथ धाम में ही 5 लाख लोगों ने दर्शन किए हैं। करीब 30 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 25 अप्रैल को खुले थे। तब से 5 लाख से ज्यादा लोग यहां दर्शन कर चुके हैं।
अफसरों ने 22 मई तक यात्रियों का डेटा जारी किया, फिर वो भी बंद कर दिया। वजह G-20 मीटिंग की तैयारी को बताया गया। ये मीटिंग 24 और 25 मई को टिहरी में हुई थी।
भास्कर ने दिल्ली से बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की करीब 1300 किमी लंबी यात्रा की। इस दौरान हमने सरकारी इंतजामों की पड़ताल की।
शुरुआत हरिद्वार से…
हरिद्वार चारधाम यात्रा का एंट्री पॉइंट है। ज्यादातर यात्री यहीं गंगा स्नान करके यात्रा शुरू करते हैं। गर्मी का मौसम है, तो पहाड़ों पर जाने के लिए टूरिस्ट भी आ रहे हैं। इसलिए हरिद्वार पहुंचने से पहले ही ट्रैफिक जाम लग रहा है।
हरिद्वार में प्रीपेड टैक्सी यूनियन के प्रेसिडेंट संजय शर्मा बताते हैं कि ‘यहां ट्रैफिक का कोई कंट्रोल ही नहीं है। चारधाम यात्रा के लिए लाखों यात्री आ रहे हैं, उसके बावजूद कोई ट्रैफिक प्लान नहीं है।’
ऋषिकेश: वीकेंड में शहर पार करने में लग रहे 5 घंटे
हरिद्वार के बाद अगला पड़ाव ऋषिकेश है। कई यात्री ऋषिकेश से भी चारधाम यात्रा शुरू करते हैं। अभी यहां इतना ट्रैफिक है कि शहर पार करने में 4-5 घंटे लग जाते हैं। खासतौर से ऐसा शनिवार-रविवार को ज्यादा होता है। इस रूट पर टैक्सी चलाने वाले एक ड्राइवर ने बताया कि श्यामपुर रेलवे फाटक, तपोवन, लक्ष्मण झूला पर सबसे ज्यादा जाम है। यही इलाके चोक रहते हैं।
बद्रीनाथ रूट: हेलंग से जोशीमठ तक 52 किमी सड़क जगह-जगह खुदी
बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर कई जगह सड़कें बहुत खराब हैं। जोशीमठ से करीब 12 किमी पहले पड़ने वाले हेलंग से बद्रीनाथ धाम तक 52 किमी के रास्ते पर जगह-जगह खुदाई चल रही है। इससे रास्ता वनवे हो गया है। एक तरफ का ट्रैफिक रोका जाता है, तो गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती है। आगे जोशीमठ में पार्किंग के लिए जगह नहीं है, इसलिए जाम लग रहा है।
बद्रीनाथ हाईवे पर हेलंग और जोशीमठ के बीच का रास्ता काफी खराब है। यहां मशीनों से पहाड़ों की खुदाई भी चल रही है, इससे पूरे रास्ते में धूल और मिट्टी हो गई है।
बद्रीनाथ धाम: रास्ते भर ट्रैफिक, बारिश ने रास्ता मुश्किल बनाया
हम जोशीमठ से आगे बढ़ चुके थे। यहां से बद्रीनाथ धाम 40 किमी दूर है, लेकिन बारिश ने पहाड़ी रास्तों को मुश्किल बना दिया है। संकरे रास्ते और फिसलन की वजह से डर बढ़ जाता है। बद्रीनाथ धाम पहुंचे तो वहां भी वही भीड़, खराब इंतजाम, दर्शन के लिए लंबी लाइन और घंटों का इंतजार।
बद्रीनाथ धाम का रास्ता, जहां बारिश ओर गाड़ियों के आने-जाने से जमीन दलदली हो गई है।
कोलकाता से तापस और राखी करमाकर परिवार के साथ दर्शन के लिए आए हैं। तापस कहते हैं कि यात्रा में दिक्कतें बहुत हैं। ट्रैफिक की वजह से ज्यादा टाइम लग रहा है। बारिश के कारण भी अव्यवस्थाएं हैं।
छोटे से रूम का किराया 8-10 हजार रुपए
हॉलैंड से आए सुरेश कहते हैं कि ‘ट्रैफिक में कई घंटे इंतजार करना पड़ा। इससे हमारा ट्रैवल प्लान बिगड़ गया। खोली जैसे छोटे-छोटे रूम के 8-10 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया, लेकिन क्राउड मैनेजमेंट में उसका फायदा नहीं दिख रहा है।’ हालांकि, सुरेश की पत्नी गीता कहती हैं कि ‘आने में परेशानी तो हुई, लेकिन दर्शन के बाद बहुत शांति मिली है।’
बद्रीनाथ धाम के बाद हम केदारनाथ धाम की ओर निकले। सफर की शुरुआत ही जाम में फंसने से हुई। बाहर निकलने वाले रास्ते में पुलिस ने बैरिकेडिंग की है, लेकिन ट्रैफिक मैनेज नहीं कर पा रही है। बद्रीनाथ धाम से जोशीमठ तक 40 किमी का रास्ता तय करने में करीब 3 घंटे लग गए। दो पॉइंट पर रास्ता खराब भी है।
ये जोशीमठ से बद्रीनाथ जाने वाला रास्ता है। सड़क के नाम पर रेत और मिट्टी की परत है। बारिश के बाद इसकी हालत भी खराब हो गई है।
रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि का 18 किमी का रास्ता, साढ़े तीन घंटे का सफर
बद्रीनाथ से लौटते हुए हम जोशीमठ और चमोली होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंचे। रुद्रप्रयाग से ही केदारनाथ धाम के लिए रास्ता जाता है। 18 किमी आगे बढ़ने पर पहला पड़ाव अगस्त्यमुनि है। ये दूरी तय करने में 30 से 40 मिनट लगते हैं, लेकिन जाम की वजह से साढ़े तीन घंटे लग गए।
केदारनाथ धाम की ओर आगे बढ़ते हुए अगस्त्यमुनि से कुंड के बीच रास्ता काफी संकरा है। यहां कार, बसों और ट्रैवलर्स की लंबी लाइन लगी रहती है।
ट्रैफिक में थका देने वाले इंतजार और बारिश की वजह से हो रही दिक्कतों के बाद हम सोनप्रयाग पहुंच गए। केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू करने के पहले यात्री यहीं एक रात के लिए ठहरते हैं। दूसरे दिन केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू होती है। सोनप्रयाग में ज्यादातर होटल भर चुके हैं। कई यात्री बाहर खुले में सोते दिखे।
केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू करने से पहले सोनप्रयाग में रजिस्ट्रेशन वैरिफिकेशन करवाना पड़ता है। यहां इसके लिए रात से ही लंबी लाइन लग रही है।
सोनप्रयाग में रजिस्ट्रेशन वैरिफिकेशन के लिए रात दो बजे से ही 2-3 किलोमीटर लंबी लाइन लग जाती है। यात्रियों के 3-4 घंटे इसी प्रोसेस में लग रहे हैं। इससे पैदल यात्रा शुरू करने के पहले ही थकान हो जाती है। सोनप्रयाग से गौरीकुंड के लिए टैक्सी सर्विस है। 50 रुपए में टैक्सी आपको गौरीकुंड तक ले जाती है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के लिए पैदल यात्रा शुरू होती है।
गौरीकुंड से आगे के रास्ते में हमें गुजरात के वडोदरा से आए प्रदीप सिंगोरा मिले। प्रदीप गुस्से में कहते हैं, ‘केदारनाथ धाम में बिल्कुल थर्ड क्लास सिस्टम है। सरकार ने सोनप्रयाग से केदारनाथ बेस कैंप तक के लिए खच्चर का रेट 3 हजार रुपए तय किया है, लेकिन हमसे 4500 रुपए रुपए लिए गए। साथ में दो महिलाएं थीं, वे घोड़े से गिर गईं।’
‘रजिस्ट्रेशन की स्कैनिंग के लिए एक ही लाइन है, ये भी 2-3 किमी लंबी है। सुबह के 4 घंटे सिर्फ स्कैनिंग में ही बर्बाद हो गए। तीन घंटे तक खच्चर नहीं मिला। खच्चर वाले ज्यादा पैसे मांग रहे थे। पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।’
सोनप्रयाग से केदारनाथ बेस कैंप तक घोड़े या खच्चर से जाने के 3 हजार रुपए लगते हैं। 2022 में इसका किराया 2740 रुपए था। केदारनाथ से सोनप्रयाग वापसी के लिए 2100 रुपए किराया तय किया गया है।
केदारनाथ: 50 हजार का बजट बनाकर आए थे, 80 हजार खर्च
गुजरात से नरेश पटेल घर से चले थे, तो यात्रा के लिए 50 हजार रुपए का बजट बनाया था। केदारनाथ धाम आते-आते 80 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। बद्रीनाथ धाम की यात्रा अभी बची है। नरेश बताते हैं कि ‘बजट गड़बड़ाने की सबसे बड़ी वजह ट्रैफिक जाम और लेटलतीफी है। रास्ते में बहुत टाइम बर्बाद हुआ, इससे हमें 2-3 दिन ज्यादा लग गए।’
केदारनाथ धाम: हेलीकॉप्टर का टिकट 4-5 गुना महंगा
केदारनाथ की चढ़ाई वाले रास्ते में जगह-जगह साइन बोर्ड लगे हैं। मेडिकल कैंप भी हैं। पैदल यात्रियों की शिकायत है कि खच्चर और पालकीवालों की वजह से उन्हें चलने में दिक्कत होती है। गुजरात के दाहोद से आईं जयश्री कहती हैं कि ‘खच्चर के लिए अलग रास्ता होना चाहिए, ताकि पैदलयात्रियों को दिक्कत न हो।’
मुश्किल चढ़ाई चढ़ते हुए हम देर शाम केदारनाथ धाम पहुंचे। मंदिर तक जाने के लिए करीब 2 किमी लंबी लाइन लगी थी। लाइन में लगने से लेकर दर्शन करने तक 3-4 घंटे का वक्त लग रहा है। दर्शन करके मंदिर से बाहर निकलीं अरुंधति मुंबई में कॉरपोरेटर हैं, 25 लोगों के ग्रुप के साथ यात्रा पर आई हैं।
वे कहती हैं कि ‘हेलीकॉप्टर की टिकटों में बहुत धांधली हो रही है। ऑनलाइन टिकट मिल नहीं रहा। सोनप्रयाग में दलाल होटल पैकेज के साथ 4-5 गुने दाम में टिकट दिलवा देते हैं। एक टिकट की कीमत 6 हजार रुपए है, पर दलाल 25 हजार तक मांग रहे हैं।’
अरुंधति की ये भी शिकायत है कि पैदल यात्रा के दौरान टॉयलेट के इंतजाम ठीक नहीं है। इससे महिलाओं को खासतौर पर बहुत दिक्कत हो रही है।
वहीं, हरिद्वार में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले गौरव भाटिया की भी शिकायत है कि हेलीकॉप्टर की टिकट के लिए सरकार ने जो व्यवस्था बनाई है, वो पारदर्शी नहीं है।
केदारनाथ यात्रा के रजिस्ट्रेशन की ज्यादा डिमांड
रजिस्ट्रेशन की दिक्कतों के बारे में हमने हरिद्वार के रीजनल टूरिज्म ऑफिसर सुरेश सिंह यादव से बात की। वे कहते हैं कि ‘हाल के दिनों में केदारनाथ धाम में लिमिट से ज्यादा यात्री पहुंच रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कराना इसलिए जरूरी है, ताकि सरकार के पास यात्रियों का रिकॉर्ड रहे। इससे आपदा की स्थिति में रेस्क्यू कराना आसान हो जाता है।’
हमने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन अजेंद्र अजय से बात की। ये समिति ही यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं की मॉनिटिरिंग करती है। हमने अजेंद्र अजय से तीन सवाल पूछे…
1. केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के लिए रजिस्ट्रेशन में यात्रियों को क्यों दिक्कत आ रही है?
अजेंद्र अजय: वजह ये है कि इस बार कपाट अप्रैल के आखिरी हफ्ते में खुले थे। दूसरी बात केदारनाथ में लगातार बर्फबारी हो रही है। मौसम खराब रहने की वजह से बीच-बीच में पैदल रास्ता बंद हुआ है।
2. हेलीकॉप्टर के टिकट की बहुत मारामारी है, यात्रियों का कहना है कि इसकी व्यवस्था पारदर्शी नहीं है, कालाबाजारी हो रही है। ऐसा है क्या?
अजेंद्र अजय: श्रद्धालुओं की तादाद बहुत ज्यादा होने से टिकट की डिमांड भी ज्यादा है। केदारनाथ सेंसेटिव जोन में है, इसलिए उड़ानें सीमित मात्रा में ही की जा सकती हैं। टिकट का काम IRCTC को दिया गया है। उसी के जरिए टिकट दिए जा रहे हैं।
3. खच्चर, होटल और बाकी सुविधाओं के लिए रेट तय हैं, पर यात्रियों की शिकायत है कि उनसे ज्यादा पैसे लिए गए, इस पर क्या कहेंगे?
अजेंद्र अजय: अगर कोई ओवरचार्जिंग की शिकायत करता है तो ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी। पुलिस खुद भी इसमें काम कर रही है।

