Site icon अग्नि आलोक

अमेरिका से आई आरएसएस पर बेन की बात !

Share

 -सुसंस्कृति परिहार 

भारत देश में जिस संस्था को स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बैन किया था।उसकी वजह सिर्फ यह नहीं थी कि संघ की उत्प्रेरणा और सहयोग से उनके एक अनुषंगी संगठन ने महात्मा गांधी को प्रार्थना सभा में जाते हुए बिल्कुल सामने से गोलियां चलाकर हत्या कर दी थी। बल्कि संघ के लोगों के विचार भाईचारे के ख़िलाफ़ थे वे हिंदु राष्ट्र के पक्षधर थे इसीलिए उन्होंने हिंदु मुस्लिम एकता के कट्टर पक्षधर को मारा था। मुसलमानों से उन्हें  इतनी नफ़रत थी कि वे अंग्रेजी हुकूमत के साथ आज़ादी संग्राम में रहे। गांधी को मारकर उन्होंने सोचा था कि हिंदु बहुत राष्ट्र  उनके इस कृत्य को समर्थन देगा। किंतु भारत में मौजूद गंगा जमुनी तहज़ीब को नेहरू और पटेल ने जिस तरह इतना मज़बूत कर लिया जिसे वे तकरीबन  कांग्रेस शासन के सत्तर साल बाद ही पूरी तैयारी से सफ़ल हुए हैं।

हम सभी भलीभांति जानते हैं जिस संघ को सरदार पटेल ने बैन कर दिया था उसे नरम दिल पंडित जी ने संघ से राजनीति से दूर रहने और सांस्कृतिक संगठन के तौर पर काम करने के वादे के बाद उस पर बैन हटा लिया। इस सहृदय कदम का संघ ने कांग्रेस शासन में ही सरस्वती शिशु मंदिर के नाम पर शिक्षा में सहयोग करने के नाम पर शाखाएं लगानी शुरू कीं और उन्हें कथित हिंदुत्वादी ज्ञान देकर अंधा कर दिया जो पहले मुसलमानों से नफ़रत का पाठ पढ़ें बाद में वे ईसाई समाज पर भी टूट पड़े।

मुस्लिम के प्रतिरोध में कोई मुस्लिम देश खुलकर सामने नहीं आया क्योंकि हमारे नेता बाहर जाकर संविधान की बात करते रहे।मोहन भागवत तो उनका डीएनए भारत का बताते रहे। लेकिन अंदरुनी स्थिति इंटरनेट के ज़माने में छुप नहीं सकती थी वह उजागर हुई। ईसाई उत्पीड़न के बाद तो दुनिया ने इस देश की सत्ता को कई बार दोषी ठहराया। लेकिन दोमुंहे संगठन संघ अंदरुनी स्तर पर सोए बीज  की फसल काटने लगातार आतुर है और भाजपानीत सरकार से ऐनकेन प्रकारेण तीन चौथाई बहुमत का आशान्वित हैं जो तीसरे आमचुनाव में मुंह के बल गिर गया। हालांकि कोशिशें जारी हैं इसे डोनाल्ड ट्रम्प का भी भरपूर सहयोग मिला है। भारत के साथ डोनाल्ड ट्रम्प की यारी को आज दुनिया समझ रही है 

अब RSS पर अमेरिका में प्रतिबंध लगाना चाहिए- ये बात अमेरिका की सरकारी संस्था USCIRF यानि  अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग  ने ट्रंप सरकार से कही है। USCIRF का कहना है कि RSS लोगों की धार्मिक आजादी के लिए खतरनाक है। ये धर्म के आधार पर भेदभाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।”

पोस्ट में कहा गया कि आयोग की रिपोर्ट में RSS पर तुरंत प्रतिबंध लगाने, संपत्ति को जब्त करने और RSS के लोगों की अमेरिका में एंट्री बैन करने की मांग की गई है।

भारत सरकार ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है इसे पक्षपात पूर्ण और ग़लत बयानी करार दिया है। विदित हो यह एक अधिकारिक अमेरिकी संस्था है लेकिन इसकी सिफ़ारिशों को मानना अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के लिए अनिवार्य नहीं है।

इधर कांग्रेस में हलचल हुई है वे भारत में इस पर बेन लगाने की बात कर रहे हैं जो बेमानी लगती है। सोचिए,जिसकी सत्ता हो वह कैसे बेन लगा सकता है। अमेरिका में पहली बार ट्म्प ने चुनाव में पहली बार धार्मिकता का सहारा लिया था शायद विश्वगुरु की सफलता को देखकर।जबकि अमरीका में इससे पहले कभी रंग और धार्मिकता का कभी सहारा नहीं लिया गया।

अब सवाल ये है कि इसे डोनाल्ड ट्रम्प भी कैसे स्वीकार कर सकेंगे लेकिन दुनिया के सामने अमेरिकी आयोग ने जो सच्चाई रखी आज उसी संघ के खिलाफ देश में राहुल गांधी और वामदल विरोध का परचम दिलेरी से थामें खड़े हुए हैं।आज यह बात अंधभक्तों को छोड़ कर समूचे देशवासियों को समझ लेनी चाहिए। वैसे अंधभक्त भी उनके आका के देश की आवाज को शायद गंभीरता से ले पाएं। बहरहाल,संघ के ख़िलाफ़ यह रिपोर्ट दुनिया में सराही जाएगी क्योंकि बहुतेरे राष्ट्र अब रंग ,धर्म और जाति की दीवारें तोड़ चुके हैं।

Exit mobile version