सुधा सिंह
_अदरक की अपेक्षा पहाड़ी पेड़ की जड़ काफी सस्ती होती है, इसलिए व्यापारी अधिक मुनाफे के चक्कर में इसे बाजारों बेच रहे हैं और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. कारोबारियों ने अब ज्यादा मुनाफे के लिए बाजार में एक ऐसी जड़ीबूटी बेचना शुरू कर दिया जो कि बिल्कुल अदरक के जैसी दिखती है. जिसे कुछ लोग तहड़ भी कहते हैं._
*अदरक की गुणवत्ता ने उकसाया अपराध के लिए :*
व्यापारियों को अदरक की गुणवत्ता ने नकली अदरक बाजार में उतारने का अपराध करने के लिए उकसाया है.
अदरक बारहमासी है। प्रकंद मिट्टी में रहता है और फसल देता है। हम बाहर जो देखते हैं वह पत्तों का गुच्छा है जो तना होने का भ्रम देता है। इस मसाले के बारे में कौन नहीं जानता जो हमारे लिए ताजा, सूखा, चूर्ण और अचार सभी रूपों में उपयोगी है। इसका उपयोग स्वाद बढ़ाने वाले एजेंट या मसाले के रूप में भी किया जाता है।
अदरक की उत्पत्ति दक्षिण- पूर्व एशिया में हुई थी। ऑस्ट्रियाई लोगों ने इसे दुनिया के बाकी हिस्सों में पहुंचाया। अब यह अमेरिका के हवाई तक पहुंच गया है।
भारत में चालीस प्रतिशत अदरक का उत्पादन होता है। पत्तियां और प्रकंद सीधे खाए जाते हैं। पत्तियों का उपयोग चटाई बुनने के लिए भी किया जाता है क्योंकि वे फाइबर से भरपूर होते हैं। अगर आप घर पर अदरक उगा रहे हैं तो पत्तों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सब्जियों या दालों में डाल सकते हैं। उनके व्यापक फाइबर सामग्री के कारण पेट साफ होता है।
यह एक पारंपरिक औषधि है। भारतीय आज के दिनों में बीमारियों को ठीक करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। आयुर्वेद इसका उपयोग अल्सर, पाचन विकार, हृदय संबंधी विकार, मधुमेह मेलेटस, उल्टी, अपक्षयी विकार (गठिया, गठिया) और कैंसर जैसी कई बीमारियों के इलाज के लिए करता है।
यह एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल है। अदरक में मौजूद गंगरोल एंटी-ऑक्सीडेटिव प्रॉपर्टी के लिए जिम्मेदार होता है। यदि आप व्यायाम से पहले इसका सेवन करते हैं तो मांसपेशियों में दर्द कम होता है क्योंकि अदरक सूजन-रोधी होता है। चूहों पर किए गए प्रयोगों से पता चला है कि यह एस्कॉर्बिक एसिड के समान ही शक्तिशाली विरोधी भड़काऊ है।
अदरक में बायोएक्टिव अणु कोलोरेक्टल, गैस्ट्रिक, डिम्बग्रंथि, यकृत, त्वचा, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर को नियंत्रित कर सकते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर शाकाहारियों में आम है इसलिए उन्हें अदरक का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
यह वजन घटाने में मददगार है क्योंकि यह अधिक कैलोरी बर्न करता है और सूजन को भी कम करता है.
यदि 1 ग्राम अदरक 3-12 सप्ताह तक खाया जाए तो यह पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को भी कम करने में प्रभावी है।
बहुत कम लोग जानते होंगे कि अदरक का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है. विश्च में करीब 2700 टन के लगभग अदरक (Ginger) का उत्पादन होता है, जिसका 30 फीसदी यानी करीब 900 टन से अधिक का उत्पादन हमारे देश भारत में होता है. इसके बावजूद भी मोटी कमाई के लिए बाजार में नकली अदरक बिक रहा है.
पहाड़ी पेड़ की जड़ अदरक से काफी सस्ती मिलती है, इसलिए अधिक मुनाफे के चक्कर में इसे बाजारों बेचा जा रहा है. बाजार में अधिक मुनाफे के चलते अब कुछ लोग इसकी खेती भी करने लगे हैं. बेचने वाले से लेकर आढ़ती तक इसे कच्ची अदरक बताकर ही बेच रहे हैं.
अगर आप बाजार से अदरक खरीदने जा रहे हैं तो आपको जांच-परख के साथ सावधानी बरतने की भी जरूरत है. यहां हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताते हैं, जिनसे आप असली और नकली अदरक (Fake Ginger) की पहचान आसानी से कर सकेंगे.
*ऐसे करें असली- नकली की पहचान :*
देश के कई राज्यों में सबसे बढ़िया और देशी अदरक पैदा की जाती है. जो देशी और बेहतरीन अदरक होती है उसके भीतर जाली पड़ी होती है और रेशे भी होते हैं. वह अदरक सेहत के लिए और आयुर्वेद के लिए सबसे बेहतर होती है.
अदरक खरीदते समय अदरक के भीतर जाली और रेशे का जरूर ध्यान रखें. खरीदते समय थोड़ी सी अदरक तोड़कर देखने मात्र से जाली और रेशे का पता चल जाता है.
जब आप बाजार से अदरक खरीदने जाएं तो खुद अदरक की अच्छे से जांच करें. अदरक खरीदते समय ध्यान रखें कि अदरक की ऊपरी परत पतली हो, जिसमें नाखून लगाकर देखेंगे तो परत कट जाएगी. अब इसे सूंघकर देखें और परखें कि इसकी तीखी खुशबू है या नहीं.
अगर खुशबू तीखी है तो अदरक असली (Real Ginger) है और नहीं तो समझ जाएं कि आपको अदरक के स्थान पर कुछ और ही बेचा जा रहा है. जिससे आपको कई परेशानियां का सामना करना पड़ सकता है.

