शशिकांत गुप्ते
महात्मा गांधीजी के विचारों को व्यवहारिक रूप देने वाले स्वतंत्रता सैनानी, समाजवादी विचारक, चिंतक, स्व.रामानोहर लोहियाजी ने कहा है। वाणी की स्वतंत्रता के साथ कर्म पर नियंत्रण भी जरूरी है।
देश हरएक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देश के संविधान ने दिया है।
लोहियाजी के उक्त कथन को बहुत ही गम्भीरता से समझने की आवश्यकता है।
वाणी की स्वतंत्रता साथ कर्म पर नियंत्रण से तात्पर्य है।
यदि आपको किसी भी व्यक्ति का विरोध या आलोचना करनी है।वह व्यक्ति उम्र में बड़ा हो,पद प्रतिष्ठा में बड़ा हो,रिश्ते में बड़ा हो,ऐसे किसी भी व्यक्ति का विरोध करने का अधिकार है,लेकिन कर्म पर नियंत्रण रखतें हुए विरोध करना है।यहाँ कर्म से तात्पर्य,आचरण की सभ्यता से है।
उदाहरणार्थ यदि किसी मुद्दे पर अपने पिताश्री का विरोध करना होतो,कर्म पर नियंत्रण रखतें हुए करना है।पिताश्री आप ने फलां बात गलत कही है,या आपका फलां आदेश मानने योग्य नहीं है।
इनदिनों उक्त मुद्दे पर बहुत ही गम्भीरता से विचार विमर्श करने की अत्यंत आवश्यकता है।
इनदिनों वाणी की स्वतंत्रता का जितना दुरुपयोग हो रहा उतना पूर्व में कभी नहीं हुआ है।
वर्तमान में वाणी को ही साम्प्रदायिक रंग देतें हुए निर्भीक होकर वैमन्यस्यता पैदा करने के लिए बोल बोलें जा रहा है।
गीतकार स्व. के लिखें गीत की पंक्तियों के स्मरण होता है।
जो शहीद हुए हैं उनकी याद करों कुर्बानी
सरहद पर मरनेवाला
हर वीर था भारतवासी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी
स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास देशभक्तों की कुर्बानियों से भरा पड़ा है।
आज शहीदों की कुबानियों की अवहेलना की जा रही है। एक विक्षिप्त मानसिकता के द्वारा देश के अमर शहीदों के विलक्षण गुणों की उनके देशभक्ति की आलोचना करने की जितनी भी निंदा की जाए कम है।
यह कुत्सित विचार किसी एक व्यक्ति के उदगार नहीं है।यह एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत सोची समझी साज़िश रच कर किया जा रहा है। यह साज़िश देश की गंगा जमुनी तहजीब को कमजोर करने की साजिश है।
(सम्पूर्ण विश्व में भारत को ही कुदरत ने एक महत्वपूर्ण तोहफा दिया है। सर्फ भारत में ही पवित्र नदियों का संगम है।)
उक्त षडयंत्रकारी मानसिकता का ही परिणाम प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है।
इस संदर्भ में किसी शायर ने क्या खूब कहा है।
यहाँ झूठों को तमगे बांटे जातें है
और सच्चें लोगों को परखा जाता है
महात्मा गांधीजी ने कहा है।
हमेशा अपने विचारों,शब्दों और कर्म के साथ पूर्ण सामंजस्य रखों।
अपने विचारों को शुद्ध रखने का लक्ष्य रखों
गांधीजी का यह भी महत्वपूर्ण कथन है।
आप मुझे बेड़ियों में जकड़ सकतें हैं, यातना दे सकतें हैं, लेकिन मेरे विचारों को कदापि कैद नहीं कर सकतें हैं
शशिकांत गुप्ते इंदौर

