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नवजातों की मौत से सिहर उठा भोपाल

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*सुसंस्कृति परिहार

पिछला आठ नवम्बर के आठ बजे भोपाल के लिए एक कालरात्रि बनकर आया जिसने हमीदिया केम्पस में स्थित कमला नेहरू अस्पताल के तीसरी मंजिल पर बच्चा वार्ड में स्थित SNCU में आग लगने की वजह से अब तक सात नवजात बच्चों को मौत की नींद सुला दिया है। 6 बच्चों को जे पी अस्पताल शिफ्ट करना बताया गया है ।जबकि वहां 40 बच्चे थे।
बताया जा रहा है कि बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर मिलाकर आठ मंजिला इस केंपस में बने इस कमला नेहरू अस्पताल में आग से बचाव का कोई इंतजाम नहीं था।आग बुझाने वाले  हाईडे्ंट और एक्सटिंग्विशर खराब निकले ।कहा जा रहा है कि शार्ट सर्किट से उठी चिंगारी से पीडि्याटिक वेंटीलेटर तक आग पहुंची  कुछ ब्लास्ट भी हुआ, फिर यह आग उस वार्मर तक पहुंची जिसमें बच्चों को रखा गया था।


हमीदिया अस्पताल के फायर ऑफिसर रामेश्वर नील बताते हैं कि हमीदिया अस्पताल ने फायर एनओसी ली थी लेकिन कमला नेहरू अस्पताल ने 15 साल से एनओसी लेना भी जरूरी नहीं समझा और बिल्डिंग के निर्माण के समय लगे सिस्टम को चालू ही नहीं किया गया।यह भी ज्ञात हुआ है जिस बिल्डिंग में आग लगी उसके बिजली के मेंटेनेंस का काम सीपीए के पास है इस संस्था को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराज होकर बंद करने का आदेश दिया था।हालांकि रात्रि 12:30 तक आग पर फायर ब्रिगेड ने पुलिस के सहयोग से काबू पा लिया।इस हादसे में  एक नर्स और वार्ड ब्वाय को भी बेहोश हालत में निकाला गया है।
प्रत्यक्षदर्शी यहां भर्ती जुड़वा बच्चों के पिता रमेश दांगी जो उस समय सिडेंट वार्ड में दूध लेने गए थे उन्होंने आने के बाद वार्ड में सबसे पहले धुआं उठते देखा उनका कहना था कि मैंने बार-बार गिड़गिड़ाया  कहां कि दरवाजा खोल दो लेकिन वह नहीं खोला गया मैं ने लात मारी कुहनी मारी लेकिन दरवाजा फिर भी नहीं टूटा तब तक पूरा वार्ड काले धुआं से गिर चुका था उसके दोनों बच्चे वहां थे ।उसका कहना है कि मैंने सुबह छुट्टी मांगी थी लेकिन छुट्टी नहीं दी गई सी एम हेल्पलाइन में भी मैंने शिकायत की लेकिन उन्होंने कहा कि इस मामले में मैं मदद नहीं कर सकता इस बीच लोग उत्तेजित हो गए और कांच तोड़ने लगी का जब कांच त तोड़े गए तो बहुत तेज आंच आ रही रही थी कुछ लोग जैसे तैसे अंदर प्रवेश किए कुछ नज़र नहीं आ रहा था । बच्चे पूरी झुलसे थे।मेरा एक बच्चा मर चुका था।एक मरणासन्न स्थिति में मिला। अपने बच्चों को लेकर लोग भाग ज़रूर रहे थे।उनकी चीखें बता रहीं थीं कि उनके नवजात इस दुनिया से जा चुके थे। मैं अपने एक बच्चे के लिए  डाक्टर की तलाश में था लेकिन सब भाग गए थे कोई नज़र नहीं आया । मैं उसे प्राइवेट अस्पताल ले आया। देर रात जब आग बुझी तब तक अनेक जाने चली गई। भोपाल वासियों ने गैस त्रासदी का धुआं झेला था इस बार का काला धुआं नन्हें अंकुराते शिशुओं को लील गया ।वैसी ही चीखें वैसी ही भगदड़। ये नोटबंदी के ऐलान का भी दुखद समय था। जिसे लोग आज याद कर रहे थे उसी कड़ी में ये हादसा भी शामिल हो गया। बहरहाल इस घटना के बारे में मीडिया को बताते हुए बाग सेवनिया की पूनम ने जो कुछ कहा यदि वह सच है तो  वह अत्यंत गंभीर विषय है ।पूनम का कहना है कि इस घटना के पांच मिनट पूर्व नर्स और वार्ड ब्वाय के बीच झगड़ा हो रहा था दोनों एक दूसरे को धमकी दे रहे थे।नर्स कह रही थी कि एक भी हंसते हुए नहीं रोते हुए जाएंगे।एक बात और इस दौरान सामने आई कि हमीदिया केम्पस में 7अक्टूवर को भी नई बिल्डिंग के दूसरे तल में आग लगी थी।तब पांच दमकलों ने आग को नियंत्रित किया था।
ये तमाम हालात बताते हैं कि व्यवस्था में काफी गड़बड़ी तो हुई ही है ।इतने बच्चों की मौत और हृदय विदारक घटना पर उमा भारती ने राज्यधर्म निभाने मुख्यमंत्री से कहा है। कमलनाथ ने भी अस्पताल का दौरा कर  अफ़सोस जताया है। मामा ने अपने भानजे भान्जियों की मृत्यु पर दुख जताते हुए एडीशनल चीफ सेक्रेटरी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान को जांच का जिम्मा सौंप दिया।
पूरे प्रदेश के अस्पताल इस समय अलर्ट हो  गए हैं काश! यह सब पहले से होता तो आज वातायन बच्चों की किलकारियों से गूंज रहा होता।

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