-सुसंस्कृति परिहार
पिछले छै नवम्बर को बिहार चुनाव का प्रथम चरण गुजरा है इसको लेकर इतने सवाल उठ रहे हैं कि लगता है अब चुनाव की विश्वसनीयता ही ख़त्म हो चुकी है।वैसे भी प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने जबसे वोट चोरी के पुलिंदे खोले हैं जनता अवाक है। लेकिन इन सब का असर ज़रा भी चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर नहीं पड़ा है। बिहार के पहले चरण के चुनाव में
लगातार वोट चोरी की ख़बरें मिल रही हैं जिनमें एनडीए के नेता भी शामिल हैं तो अंधभक्तों का तो कहना ही क्या है?
जो ख़बरें मिल रहीं हैं उसके मुताबिक फार्म जमा करने वाले कई मतदाताओं की शिकायतें आ रही हैं कि उनके नाम पर कोई और वोट डाल गया है।वे बराबर शिकायतें कर रहे हैं किन्तु कहीं फोन नहीं उठाया जा रहा तो कहीं देखते हैं, का झांसा दिया जा रहा है। यूं तो 67लाख मतदाता सूची से बाहर हैं।छठ पूजा के बाद बाहर से आए कामगार वापस चलें गए हैं। उनको आने जाने में भले दिक्कतें हुईं हों किंतु हरियाणा से चली चार ट्रेनों में बिहारी मतदाताओं को ढोकर लाया गया ये किसके इशारे पर ट्रेनें रिजर्व हुईं।कोई पूछने वाला नहीं।हो सकता है इनमें फर्जी लोग भी आए हों जिन्होंने उल्लिखित मतदाताओं की जगह भाजपा की वोट कन्फर्म कर दी हो। ईवीएम मशीन बदलने का सिलसिला भी खूब चला।इतनी तमाम अवैधानिक कार्यवाहियों के बीच समस्तीपुर की सरायगंज विधानसभा क्षेत्र में कचरे में ईवीएम की पर्चियों का मिलना क्या संकेत देता है। उधर कई स्ट्रांग रुम के कैमरे खराब होना भी किसी बड़ी गड़बड़ी की तैयारी ही प्रतीत हो रहे हैं।
इधर इंडिया गठबंधन को राहुल गांधी और तेजस्वी की जेन जेड पर भरोसा नज़र आ रहा है क्योंकि वे संविधान, बेरोजगारी और वोट चोरी को बखूबी समझ पा रहे हैं। महिलाओं को दस हजार की सौगात देकर नीतेश उन्हें ले उड़े हैं। बाकी चिराग और प्रशांत किशोर कितना ज़ोर लगा पाते हैं ये अंडर स्टुड है।यानि यदि ये अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं तो भाजपा की चूलें बुरी तरह हिल सकती हैं नीतीश से बर्चस्व की लड़ाई में और कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है।भले वह प्रशान्त या चिराग ही क्यों ना हों।यानि कुल टोटल भाजपा स्वाहा।
इसीलिए पहले चरण के भारी मतदान से भाजपा घबराई हुई है क्योंकि उसमें जेनजेड यानि नए वोटरों की तादाद बहुत ज़्यादा है।यही वजह कि चुनाव येन केन प्रकारेण जीतने अमित शाह भाजपा के चाणक्य पटना के मौर्य होटल में डेरा जमाए हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने अपने सामने के सभी सीसीटीवी कैमरों पर पर्दा डाल रखा है।यह सब क्यों हो रहा है?ताकि यहां की गलत गतिविधियां सामने ना आने पाए। सवाल उठता है कि क्या देश का गृहमंत्री यहां बैठकर चुनाव आयोग और अधिकारियों को धमकाने या नेताओं को वोट खरीदने की तैयारी में है।वरना इतने बड़े होटल में कैमरों पर पर्दा क्यों डाला जाता है? लगता है,शेष 122 सीटों पर भाजपा के चाणक्य कुछ नई चोरी की तकनीक भी ईज़ाद कर सकते हैं। जब तक इसे समझेंगे खेला हो चुका होगा।
इस जटिल समय और लोकतंत्र की हत्यारी और लुटेरी सरकार की हर अदा और गतिविधि पर नज़र रखने की ज़रुरत है।मगर सवाल तो ज्यों के त्यों बने रहेंगे। उनका जवाब देने वाला कोई नहीं।उन्हें सिर्फ और सिर्फ चुनाव जीतना है।
जयप्रकाश की इस पावन गृहनगरी से चाणक्य की इन करतूतों को मात अब मतदाता ही दे सकते हैं। क्योंकि चुनाव आयोग,लगभग सभी मीडिया वा अदालतें सब ख़ामोश हैं। वे इस समय इनके रहमो-करम के तलबगार है।तब मतदाता जागकर ही देश को बचा सकते है।

