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बिहार सरकार को  माफ़ी माँगनी चाहिए.

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बिहार दिवस समारोह में कई लड़के फूड प्वाइजनिंग के शिकार

शिवानन्द तिवारी

पूर्व सांसद

बिहार दिवस मनाने की परंपरा नीतीश कुमार ने ही शुरू की है. इस वर्ष का बिहार दिवस समारोह जारी है. समारोह से जुड़ी एक खबर देशभर के अखबारों में छपी है. खबर शर्मिंदा करने वाली है. समारोह में शोभा बढ़ाने के लिए राजधानी के बाहर से स्कूली छात्रों को भी बुलवाया गया था. उनमें से कई लड़के फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गये. कईयों को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा. बाकी का इलाज उनके टेंट में ही हुआ. बच्चों के टेंट की जो तस्वीर अखबारों में छपी है उसको देख कर लगता है के लावारिस बच्चों को दरी बिछाकर लेटा दिया गया है. उद्घाटन समारोह में गए लोग बता रहे थे कि मैदान में धूल उड़ रही थी. लोग घुटन महसूस कर रहे थे.
पिछले सोलह वर्षों से बिहार में नीतीश जी की सरकार है. नीतीश जी के विषय में प्रचारित है कि ये बहुत व्यवस्थित ढंग से काम करने वाले व्यक्ति हैं. एक-एक चीज पर उनकी नजर रहती है. लेकिन दुर्भाग्य है कि सोलह वर्षों के शासन में साल में एक मर्तबा होने वाला बिहार दिवस कुशलतापूर्वक संपन्न हो जाए, ऐसा शासन तंत्र नीतीश जी बिहार में विकसित नहीं कर पाए हैं.
मामला सिर्फ बिहार दिवस का नहीं है. बिहार के प्रशासन में काम करने की संस्कृति बन ही नहीं पाई. जो कुछ भी था, पिछले सोलह वर्षों में वह समाप्त हो गया. सरकार को चिट्ठी लिखिए, जवाब नहीं मिलता है. बहुत कम पदाधिकारी हैं जो फोन उठाते हैं. साधारण काम के लिए दफ्तरों का चक्कर लगाते लगाते लोग हताश होकर बैठ जाते हैं. हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होता है. आदेश का अनुपालन कराने के लिए लोग विधायक और मंत्री के यहां दौड़ते रहते हैं. जिनके पास साधन है वे कंटेम्ट में पुन: कोर्ट जाते हैं.
ऐसा नहीं है कि नीतीश जी अपने प्रशासनिक तंत्र की हालत से अनभिज्ञ हैं. मुख्यमंत्री का जनता दरबार ऐसा जरिया है जिसके माध्यम से उनको अपनी प्रशासनिक सड़ांध की खबर लगातार पहुँचती रहती है. लेकिन कभी इन्होंने इस जानकारी का इस्तेमाल अपने तंत्र को सुधारने के लिए नहीं किया. हास्यास्पद स्थिति तो तब लगी जब मुख्यमंत्री के दरबार में एक ऐसा मामला आया जिसमें विद्यार्थी के पहचान कार्ड में नाम लड़के का था और तस्वीर लड़की की थी. तस्वीर बदलवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में दौड़ते दौड़ते थक जाने के बाद वह लड़का मुख्यमंत्री जी के दरबार में आया था. नीतीश जी को अपने प्रशासनिक तंत्र की इस सड़ाध को देखकर शर्मिंदगी एहसास तक नहीं हुआ.
बिहार दिवस एक अवसर था नीतीश जी को अपनी सरकार की कुशलता और क्षमता दिखाने का. जो बच्चे फ़ूड प्वाइज़निंग के शिकार हुए वे सरकार के अतिथि थे. उनके माता-पिता ने नीतीश जी की सरकार पर भरोसा कर अपने बच्चों को पटना भेजा होगा. सरकार को उन बच्चों के अभिभावकों से माफ़ी माँगनी चाहिए.

शिवानन्द तिवारी पूर्व सांसद

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