
संजयकनौजिया
बिहार के पुर्णिया जिले की रंगभूमि मैदान में हुई 7 दलों के महागठबंधन की महारैली ने तो इतिहास ही रच डाला..आज जो समा बंधा है, वह नज़ारा देश के उज्जवल भविष्य का एक अनुशासित व महत्वपूर्ण एकता के सूत्र का परिचायक व ठोस सन्देश रहा..ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इस जनसैलाब कि ऊर्जामयी, गूँज की अनुगूंज क्रांति के उस उद्धघोष को चरितार्थ कर रही हो कि, “अभी तो ये अंगड़ाई है-आगे और लड़ाई है”..”नई क्रांति आई है-उम्मीद की रौशनी लाई है” आदि..सही मायनो में सभी जानकार इस कथन से भलीभांति अवगत हैं, कि बिहार की मिटटी के गर्भ में ही वह कशिश है कि, जब-जब भारतीय भूमि में पाप-अधर्म-अत्याचार बड़ा है, तब-तब बिहार ने ही क्रांति को जन्म दिया है, इतिहास इसका गवाह है..आज की युवा पीढ़ी के आगे इतिहास आज पुनः चरितार्थ हो गया..!
केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों से वर्तमान में भला कौन सा मानस है, जो परिचित नहीं.. भारतवर्ष के चारो ओर त्राहिमाम-त्राहिमाम की कर्कश ध्वनि, मानो शमशान की ख़ामोश रात्रि में जानवरों के रुद्रन के बौध का आभास कराती रहती सी प्रतीत होती है..एक अजीब सा सन्नाटा बिखरा हुआ है, हर इंसान दबा-दबा सा, डरा-डरा सा, सहमा-सहमा सा, लाचार-बेबस सा, दिखाई देता है..गाँव -कस्बो-शहरों के बाज़ारों की चहकती रौनक गायब हो चुकी है, छोटे व्यापारी अपनी दुकानों में मुँहू लटकाये बैठे दिखते हैं..कोई जीएसटी से परेशान तो कोई अपनी पूँजी डूबने से दुखी, तो कोई बैंकों के कर्ज़ों की किस्तें ना देने के कारण निराश, तो कोई ग्राहकों में बढ़ती कमी से अचंभित..परिवार महंगाई की मार से अपनी सीमित आय के कारण बेबस, तो कोई रोजमर्रा के अपने लोकल यातायात के किराये के बोझ तले दबने को मजबूर..बिजली-पानी, डीजल-पैट्रोल के लगातार बढ़ते दाम..मजदूर अपनी दिहाड़ी न मिलने से हतप्रभ तो किसान अपने खाद-पानी-बीज और उचित दाम न मिलने से तथा बैंकों के कर्ज़े के कारण आत्महत्या को विवश..मंझोले कारोबारी (लघु उद्योग) अपने ठप्प होते कारोबार के द्वारा मानसिक उत्पीड़न से, तो हर माता पिता अपने बच्चो की शिक्षा की फीस से, युवा बेटे बेटियों के शादी व दहेज़ की पूर्ति की मानसिक पीड़ा से..बैंको से लिए घर निर्माण हेतू लोन की किश्तों की भरपाई की चिंता से..निम्नमध्यम वर्गीय परिवार गाडी मोटर या अन्य साधनो की ईएमआई से के न भरने की प्रताड़ना से..बीमार व्यक्ति के महंगे इलाज व दवाओं की पूर्ति न होने से मौत से ही आलिंगन कर लेते हैं..शिक्षित युवा बेरोजगारों की बढ़ती संख्या आदि इत्यादि ऐसे अनगिनित मामले हैं जिनसे देश का शायद ही कोई घर अछूता हो..और इन सभी प्रताड़नाओं को झेलने के लिए, भाजपा की मोदी सरकार, देश के 80 करोड़ लोगों की आबादी को 5-5 किलो अनाज, अपनी फोटो लगी तथा कमल चुनाव चिन्ह वाली महंगी थैली में अहसान जताते हुए गरीबों की, गरीबी का उपहास उड़ाती है और इसी मुफ्त के अनाज के बदले..चुनावों में लोकलुभावन लच्छेदार भाषण कर वोट मांगती है..!
उक्त दूसरे पहरे अनुसार, भाजपा की मोदी सरकार देश के नागरिकों का मौलिक हनन तो करती ही आ रही है..लेकिन देश की जनता के खून पसीने की कमाई से सींचे गए सरकारी, गैर सरकारी संस्थानों को जैसे रेल-गैल-भेल-पोर्ट एवं शिपिंग कारपोरेशन, बैंक्स, मीडिया संस्थान तथा और भी अन्य, आदि इत्यादि को अपने दो चहेते गुजराती पूँजी पतियों अडानी-अम्बानी को बेचती जा रही है, बल्कि ये सर्वविदित भी है..जिसमे अडानी प्रकरण की कारगुजारियों से देश अवगत हो ही चुका है कि कैसे अडानी की कालाबाज़ारी मानसिकता ने एसबीआई और एलआईसी को डुबो दिया..अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार की पोल खोलती ख़बरें, अब अक्सर देश के सामने आ रही है..जिसके कारण हमारे देश भारत का उपहास दुनियां में उड़ाया जा रहा है..सीमायें कोई भी सुरक्षित नहीं, चीन लगातार अपनी ताक़त का नमूना भारतीय सीमाओं पर आ कर दिखाता है..विदेशी कर्ज़ा भारत के सर पर चढ़कर गुर्राता है..देश की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा कर अंतिम पायदान पर खड़ी हो चुकी है..संविधान की खुले आम धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं हैं..जनता द्वारा चुनी हुईं राज्यों की सरकार को लोभ-लालच या फिर डर दिखाकर तोडा जा रहा है..विपक्ष को पूरी तरह नेस्तेनाबूत करने में तुली हुई ये सरकार संवैधानिक सरकारी एजेंसियों जैसे सीबीआई, ईडी, पुलिस का दुरूपयोग कर सवाल करने वाले या राजनीतिक विरोध करने वालो पर, झूठे मुक़दमे लगाकर उनके चरित्र पर दाग लगाती आ रही है..इस बेढंगी तानाशाही सरकार को देश हित में करना कुछ भी नहीं आता..इन्हे आता है, केवल नागरिकों के मान सम्मान को छीनना, आरक्षण व अन्य संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना..हिन्दू-मुस्लिम, अधर्म, जात-पात, वैमनष्य, नफरत, भाईचारे का खात्मा, दंगा फसाद, अपराध, नारी की अस्मत को लूटकर बर्बरता से हत्या को अंजाम देना, जमीनों पर गैर कानूनी कब्ज़ा करना, पाखण्ड-अन्धविश्वाश और मासूम लोगों को डरा देने वाले नारों को इनके शासित राज्य में चरम पर नंगा-नाच नाचते ही दिखाई देते हैं..शूल, त्रिशुल, भाले, पिस्तौल, बन्दूक, बम, नशा, आदि इनके हथियार होते हैं..!
केंद्र की भाजपा मोदी सरकार की, इन्ही जनविरोधी कार्यों के खिलाफ, आज बिहार की रैली में शंखनाद की रणभेरियां बज उठी..आज भाजपा के सभी पापों का घड़ा फोड़ा गया..आज सभी सात दलों के नेताओं ने, बिहार सरकार के मंत्रियो ने, सांसद व पूर्व सांसदों ने, उच्चपदस्थ संगठनों के पदाधिकारियों ने, क्षेत्रीय विधायकों ने, चुन-चुन कर देशभर की जनता पर होते अन्यायों के खिलाफ बिहार से बिगुल फूंका..आज की रैली का मुख्य आकर्षण रहे, “शेरे हिन्दुस्तान-सामाजिक न्याय के रक्षक-अडिग और कभी न झुकने वाले जांबाज़ राजनीतिक योद्धा, गरीबों के मसीहा व दुलारे, राष्ट्रीय जनता दल के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री लालू प्रसाद यादव साहब”…श्री लालू जी, का वर्चुअल सम्बोधन केवल 10 मिनट के लगभग ही था..उनके दिखते ही मानो बिहार के उस जन-सैलाब में समंदर के लहरों की भांति कोई ज्वार-भाटा पनप गया..कर्कल ध्वनि ने आकाश को गुंजायमान कर डाला..लाखों लाखों के उस जनसैलाब के हर नर-नारी में इतना बल सा प्रतीत होने लगा मानो उनके कदमो की थाप पाताल में धमक दे रही हो..सभी चाहने वालों की दृष्टि में उनके उदार स्वरुप में “गांधी” की सादगी व सौम्यता, “अंबेडकर” का कर्म, “लोहिया” का सिद्धांत, “जयप्रकाश नारायण” का वचन, “कर्पूरी ठाकुर” की सरलता, “जगदेव बाबू” के विचार से, ओत-प्रोत सी होती झलक साफ़ साफ़ देखने को मिल रही थी..श्री लालू जी हम सबके अभिभावक के रूप में आज सबके सामने आये और गंभीर व महत्वपूर्ण सन्देश दिया..उनके सन्देश में क्रांति का आह्वान था तो वही ये मलाल भी रहा, कि वह दिल्ली से सन्देश दे रहे हैं..उनकी बड़ी इच्छा थी कि वह अपनी प्यारी दुलारी जनता के मध्य होकर अपनी लोकप्रिय शैली में बोलते लेकिन अभी उन्हें आराम की सख्त जरुरत है..एक दिन वह भी आएगा जब वे अपनी जनता के बीच बोलेंगे..हमे उस दिन का इंतज़ार करना होगा..आज उन्होंने अपनी बेटी रोहिणी आचार्य को भी याद करते हुए बिटिया के इस महान और पवित्र योगदान का धन्यवाद किया..इस मौके पर तो सभी ने बहन रोहिणी के लिए तालियां बजाकर गर्व करते हुए अभिनन्दन किया..श्री लालू जी ने एकजुट रहने और एकता में ही बल का सन्देश विपक्ष की सभी पार्टियों को दिया..मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार जी, पर भरोसा जताते हुए विरोधियों के मुँहू पर करारा तमाचा मारा..फासीवादियों को भगाने का पुरजोर आह्वान किया..और सुप्रीम कोर्ट के 2010 के उस फैसले, जिसपर गोदामों में बे-वजह अनाज के भण्डारण, जो गोदामों में ही सड़ जाता है, लेकिन गरीब तक नहीं पहुँचता..ये फासीवादी उसी फैसले अनुसार गरीबो को 5-10 किलो अनाज बांटकर झूठी वाह-वाही लूटती है..कुल मिलाकर आज की सफलतम रैली से श्री लालू जी गदगद हुए और रैली को सफल बनाने हेतू राजद नेताओं सहित महागठबंधन के सभी नेताओं का कार्यकर्ताओं का अपने अंदाज़ में धन्यवाद किया..दूसरे आकर्षण युवा नेता उपमुख्यमंत्री भाई श्री तेजस्वी साहब रहे..आज उनके सम्बोधन में फासीवादियों के प्रति आक्रोश खूब दिखाई दिया..और सार्वजनिक प्रण कर सभी विरोधी लोगों को करारा जवाब देते हुए कहा कि में श्री लालू जी का पुत्र हूँ कभी भी अपने जीवन में इन फासीवादियों से कोई भी समझौता नहीं करूँगा..ये वाक्य सुनते ही पूरा जनसैलाब झूम उठा..भाई तेजस्वी जी, ने भी विपक्ष की सभी पार्टियों से आह्वान किया, कि सभी दलों को मिलकर देश व्यापी महागठबंधन बनाने की जरुरत है..श्री तेजस्वी जी ने हुंकार भरते हुए कहा कि किसी भी तरह के पद को पाने की उनमे कोई इच्छा नहीं हमारा पहला लक्ष्य है कि फासीवादियों को जड़ से उखाड़ फेकना..उन्होंने श्री नितीश कुमार जी, के नेतृत्व में विश्वाश जताते हुए कहा कि हम काम करने वाले लोग हैं और काम कर भी रहे हैं और जनता से जो वायदे किये उन्हें तेजी से लगातार सफल अंजाम देते भी आ रहे है..10 लाख, नौकरी का वायदा तो पूरा होगा ही, हम आदरणीय श्री नितीश कुमार साहब का 10 लाख, रोजगार के साधन का लक्ष्य भी उपलब्ध करवाने हेतू ठोस वचन देते है..भाई तेजस्वी जी, की कार्येशैली जिस प्रकार से गतिमान हो रखी है, उससे यह साबित होता है कि वे, वर्ष 2023 के अंत से पूर्व बहुत सी जनकल्याणकारी योजनाओं को पूर्ण कर दिखलायेंगे.. आज मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नितीश कुमार साहब भी रैली की सफलता को देखते हुए गदगद हो रहे थे..और रैली का आकर्षण का केंद्र बने हुए थे, उनकी ललकार की हुंकार फासीवादियों के पसीने छुड़ाने जैसी प्रतीत हो रही थी..उन्होंने अपने मन की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह केवल एकजुट करने हेतू ही प्रयास करेंगे..उनमे किसी भी उच्च पद को पाने की कोई लालसा नहीं..आज उनके वाक्यों से जयप्रकाश नारायण जी, के जैसे सम्बोधन की झलक साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी..उनके सभी वाक्यों में एकता के प्रयास के सूत्र ही झलक रहे थे..जॉर्ज फर्नांडिस जी एवं शरद यादव जी, से जुड़े प्रसंगों को सुनाकर उन्होंने मोदी एंड कंपनी को बुरी तरह लताड़ा और अटल- आडवाणी-जोशी आदि भाजपा नेताओं का जिक्र कर मोदी कंपनी की बदनीयती पर कई सवाल खड़े किये..उन्होंने अपने सम्बोधन में नरेंद्र मोदी को ही केंद्रित किये रखा..और बहुत से बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए बड़े ही आत्मविश्वाश से कहा सभी मिलकर लड़ेंगे तो भाजपा 100 सीटों पर ही सिमट जायेगी..आज की महागठबंधन की सफल रैली ने, भाजपा की उल्टी गिनती शुरू कर दी है ..!!