-सुसंस्कृति परिहार
देश के प्रधानमंत्री का आव्हान था बिहार बंद का ऐलान।जिसकी जिम्मेदारी भाजपा महिला मंच ने संभाली थी।यह बंद मोदीजी को मां की
गाली देने के प्रतिरोध में था जिसे मोदीजी ने देश भर की मां बहिनों के सम्मान से जोड़ा था। यह प्रधानमंत्री का आव्हान था किंतु बिहार छोड़कर देश और खासकर निज गुजरात प्रदेश में कहीं कोई हलचल या प्रतिक्रिया नहीं देखी गई। बिहार बंद कर इससे चुनावी फायदा लेने का जो मोदीजी का उपक्रम था वह पूरी तरह फेल हो गया।

ऐसा क्यों हुआ, देश भर की महिलाएं इस अपमान पर क्यों संगठित नहीं हुई ना ही कहीं से किसी भाजपा महिला नेत्री ने इस पर बयान जारी किया।यह दुखद है इस पर मोदी को आत्मचिंतन करना चाहिए। हमारे पूर्वज हमेशा यह कहते रहे हैं कि जब कोई गाली दे तो उससे कुछ ना बोलो जब वह गाली आप कुबूल नहीं करेंगे तो वह वापस लेने वाले के पास पहुंच जाती है। बुद्ध और महात्मा गांधी की थी गई सीख आज देश के प्रधानमंत्री पर देखने मिल गई है इससे सबक लेना चाहिए। बुंदेलखंड में तो मां बहिन की गाली का चलन बेशुमार रुप से है वह आदत में है इसलिए बुरा नहीं मानते। यहां तक जानवरों को इन गालियों से नवाजा जाता है।
लेकिन वाह मोदीजी अपने तो हद कर दी।इस बात को इतना फैलाया कि देश दुनिया में यह बात फैला दी। जबकि आपने अनेक अवसरों पर जिस तरह के अपशब्द कहे हैं उनमें राहुल गांधी की मां को भी जानें क्या-क्या कहा?वे चुप रहीं आज जब आपके ही कार्यकर्ता ने उन्हें मां की गाली दी तो देश की मां बहनों के सम्मान से जोड़कर एक घटिया चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की गई। मोदीजी के अपशब्दों का सिलसिलेवार ब्यौरा राजग युवा नेता तेजस्वी यादव ने जारी किया तो मां बहनों का सिर शर्म से झुक गया। गालीबाज की होशियारी धरी रह गई।
बिहार बंद में की गई गुंडागर्दी के दौरान जो गालियां वहां महिलाओं को दी गई उस बारे में सबको सोचना चाहिए।गाली के विरोध में गालियां।मतलब वे सब लौटकर उन पालतू गुंडों के पास ही लौट आईं।इस जबरिया बंद के दौरान बीमार, गर्भवती स्त्रियों, शिक्षिका,परीक्षा देने जाती छात्रा , पत्रकारों और काम पर जाते लोगों आदि पर जो कहर बरपाया गया वह इस जुल्मी सरकार की असलियत बयां कर रही है।
गुंडागर्दी और जबरिया बंद के बावजूद डबल इंजन भाजपा सरकार के प्रदेश में बंद का आव्हान फ्लाप शो बन कर रह गया। अब यह तो समझ ही लेना चाहिए कि आगत चुनाव में कितनी भी गुंडागर्दी कर ली जाए अब बिहार की जनता वोट चोर गद्दी छोड़ की रट तब तक लगाती रहेगी जब तक वह कामयाब नहीं हो जाती।
प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी की तीस जिलों में वोटर अधिकार यात्रा ने अच्छी पकड़ बनाई है इतना ही नहीं समीप लगे बंगाल में भी तेजतर्रार तृणमूल नेत्री मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज जिस उमंग और जोश से सदन में वोट चोर गद्दी छोड़ कहा।वह इस बात का प्रतीक है कि इंडिया गठबंधन के सभी लोग इस नारे के दीवाने हो चुके हैं क्योंकि इसमें सौ प्रतिशत सच्चाई है। अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में इस मंत्र को फूंक रहे हैं।
बिहार बंद के असरहीन होने और सरकार की गुंडागर्दी का असर देश भर में जादू सा काम करेगा इसमें कोई शक नहीं है।वास्तव में यह राहुल गांधी के एटम बम के जवाब में दिया गया अपने अहम् का बम था जो फुस्सी बम साबित हुआ। हाइड्रोजन बम फूटेगा तब अंतिम सांस लेती भाजपा और मोदी सरकार कैसे मुकाबला करेगी।वह देखने लायक होगा। शर्मनाक तो यह है कि इस बंद में राहुल गांधी और तेजस्वी को गाली देने में बदनाम करने का सपना टूट गया। जबकि भाजपा कार्यकर्ता ने कांग्रेस मंच का दुरुपयोग कर मोदीजी को मां की गाली दी थी जो पकड़ा भी गया है।जिस पर मोदी मौन रहे । अच्छा हुआ,इस बंद ने मोदी के झूठ का पोस्टमार्टम भी कर दिया है।