आज का दिन पिछले दो वर्षों से बेरोजगार दिवस के रुप में ज़ोरदार तरीके से मनाया जाता है यह साहिब जी के उस वादे की याद दिलाता है जब उन्होंने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात कही थी जिस पर इन दस सालों में कुछ नहीं हुआ। उन्हें पकौड़ा बनाने की सलाह दी गई। बेरोजगारों का साहिब को समर्पित ये दिवस आज सबसे ज्यादा टे्ंड किया।
सुसंस्कृति परिहार
देश में यूं तो साहिब जी के जन्मदिवस को 17और 28सितम्बर में बांट रखा है।कौन सा असली है कौन सा फर्जी पता नहीं पर 17 सितम्बर के दिन जिस तरह साहिबजी ने विश्वकर्मा जयंती पर अपने आपको कामगारों के बीच पेश किया उससे यह साबित हुआ कि साहिब जी विश्वकर्मा जयंती के दिन ही जन्मे हैं। उन्हें बधाई। लेकिन विश्वकर्मा ने जगतनिर्माण में जो कमाल दिखाया उसके ठीक उलट साहिब जीने सनातन धर्म को जितना तहस नहस किया वह बड़ा सवाल है उसे कपिल सिब्बल ने उठाते हुए कहा कि महिला पहलवानों, मणिपुर की महिलाओं के साथ जो व्यवहार उनका रहा वह कहीं सनातनी नज़र नहीं आते।कश्मीर के अनंतनाग में शहीद हमारे अधिकारियों के परिवार के प्रति उनकी बेरुखी तथा G 20 के बाद उसीश शहादत वाले दिन जश्न मनाना यही साबित करता है वे सनातन का ढोंग रच रहे हैं।
आज का दिन पिछले दो वर्षों से बेरोजगार दिवस के रुप में ज़ोरदार तरीके से मनाया जाता है यह साहिब जी के उस वादे की याद दिलाता है जब उन्होंने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात कही थी जिस पर इन दस सालों में कुछ नहीं हुआ। उन्हें पकौड़ा बनाने की सलाह दी गई। बेरोजगारों का साहिब को समर्पित ये दिवस आज सबसे ज्यादा टे्ंड किया।
आज ही इसरो के चन्द यान 3के कर्मचारियों की ये ख़बर आई कि जिनके नाम पर साहिब जी ने दुनिया में डंका बजाया था वे अठारह माह से वेतन से वंचित हैं और इडली,डोसा,चाय बेचकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं यह ख़बर बीबीसी लंदन ने दी जो एक कलंक है।
जन्मदिन को महान बनाने वाले साहिब जी ने कभी नामीबिया से लाए चीतों को जंगल में आज़ाद किया था उनमें से नौ ज़िंदगी से आज़ाद हो गए हैं।इस बार साहिब जी ने सेंट्रल विस्टा पर तिरंगा फहराने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को भेजा। उन्होंने साहिबजी का ऐसा प्रशस्ति गान किया कि गोदी मीडिया भी भौंचक रह गया। लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंदर राष्टपति, उपराष्ट्रपति और स्पीकर की भूमिकाएं बड़ी महत्वपूर्ण होती हैं वे सदन के प्रति निष्पक्ष व्यवहार रखते हैं किंतु उपराष्ट्रपति धनखड़ ने संसदीय आचरण का भट्टा बैठा दिया। स्पीकर का तो आचरण हम सब बहुत पहले से जान चुके हैं।
उधर भाजपा साहिब जी का जन्मदिन सेवा और समर्पण दिवस के रुप में मना रही है उनकी सेवा और समर्पण से देश की जनता नौ साल में उनका जबरदस्त मूल्यांकन कर चुकी है इसलिए बेरोजगार की तरह ही आम जनता जुमला दिवस ,फेंकू दिवस कहकर उनके जन्मदिन को मना रही है।
कुल मिलाकर जिल्ले सुहानी शानदार और बेफ्रिक तबियत के व्यक्ति हैं इन पर देश की समस्याओं का कोई असर नहीं पड़ता वे प्रेम और दुख से दूर रहते आए हैं बिल्कुल फ़कीर की तरह।वे कभी कभी हंसते हैं या रोते नज़र आते हैं ये कृत्रिमता वे मज़बूरी में
ओढ़ते हैं संपूर्ण अदाकारी के साथ। जन्मदिन कैसा भी मनाएं सर आंखों पर।ऐसे महान व्यक्तित्व को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।सुना है 2024में फकीर जिल्ले सुहानी अपना झोला उठाकर चल देगा। इसलिए जिसे जो उनका स्वरुप पसंद आया।उस तरह हर्षित होकर मना यह महान दिवस। आखिर देश अभी उनके रहमो-करम पर है।

