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*भाजपा और संघ कुकर्मी से ऐसे करते हैं किनारा*

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गोपाल राठी,पीपरिया

यह अच्छी बात है कि भाजपा चुनाव आयोग में पंजीकृत एक राजनैतिक दल है । जिसके लोग सदस्य बनते है और उन सदस्यों का नाम सदस्य्ता पंजी ( रजिस्टर ) में दर्ज होता है । जिस सदस्य के आचरण के कारण बदनामी होने लगे औऱ विपक्ष के हमले होने लगे तो पार्टी उस सदस्य को तत्काल बाहर का रास्ता दिखा देती है । आखिर पार्टी की साख का भी सवाल है । कुकर्मी को पार्टी से निकालने इतनी लंबी कार्यवाही और ये स्पष्टीकरण… देखिए ।

लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ( आर एस एस ) की बात दूसरी है । संघ में न कोई सदस्यता होती और न सदस्यों का कोई रजिस्टर होता । वहाँ न कोई बर्खास्त होता औऱ न कोई स्तीफा देता । अगर कोई स्वयं सेवक भ्र्ष्टाचार या दुराचार करते हुए पकड़ा जाता है तो आर एस एस तत्काल उससे किनारा कर लेती है । और यह स्पष्टीकरण दिया जाता है इनका संघ से कोई संबंध नहीं है । चूँकि सदस्य्ता का कोई रिकार्ड ही नहीं होता इसलिए पकड़े गए व्यक्ति को संघी प्रमाणित करना असंभव है । गोडसे संघ का स्वयं सेवक था लेकिन गांधी हत्या के आरोप के बाद संघ ने उससे किनारा कर लिया और कहा कि गोडसे का संघ से कोई संबंध नही है ।

भाजपा के अधिकांश नेता संघ की पाठशाला से संस्कारी होकर भाजपा में आए है । जो भाजपाई पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पकड़े गए जो बलात्कार ,भ्र्ष्टाचार में गिरफ्तार किए गए वे मूलतः संघी ही थे । भाजपा नेता राघव जी भाई ,बंगारू लक्षण ,दिलीप सिंह जु देव ,कुलदीप सेंगर सभी संघी पृष्ठभूमि से आये नेता रहे है जिनको अलग अलग कांडों में याद किया जाता है ।

भाजपा में भर्ती हो रहे कांग्रेसी कुछ ज़्यादा ही होशियार है । कांग्रेसी भाजपा में संघ के महत्व को अच्छी तरह जानते है इसलिए वे भाजपा में आने के पहले ही संघ की गणवेश सिलवा लेते है । और पथसंचलन में सबसे आगे खड़े नज़र आते है । ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल होने के पूर्व नागपुर में संघ मुख्यालय जाकर सरसंघचालक मोहन भागवत से मिले थे ।

पिपरिया नगर के समाज सेवी Kaloty Sukhdevsingh शुरुआती दौर में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष रहे । वे आर एस एस के स्वयं सेवक भी थे । भाजपा से उनका मोहभंग हुआ तो उन्होंने पार्टी से स्तीफा दे दिया । वे संघ से भी स्तीफा देना चाहते थे लेकिन संघ में स्तीफा ही नहीं होता क्योकि उनके यहाँ स्वयं सेवकों का कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता । इसलिए वे कुछ दिन असमंजस रहे । अंततः उन्होंने अपनी संघ गणवेश टोपी आदि संघ कार्यालय में जमा कर संघ से अपने संबंध का समापन किया ।

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