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भाजपा के पास न कोई सवाल है, न किसी सवाल का जवाब

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क्रृष्णकांत

राहुल का जूता, राहुल की टीशर्ट, राहुल का कंटेनर, राहुल का टॉयलेट, राहुल का गद्दा, राहुल की दाढ़ी, राहुल की दीदी, दीदी का लड़का… वगैरह भाजपा और इस देश की मीडिया के लिए बहस के मुद्दे हैं. 

लेकिन यह यात्रा करते हुए राहुल गांधी कौन कौन से सवाल उठा रहे हैं? देश में लोकतंत्र कुचला जाना, संस्थाओं का बंधक हो जाना, विपक्ष की आवाज को खत्म कर देना, आर्थिक संकट का गहराते जाना, महंगाई, बेरोजगारी, किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी और युवाओं से जुड़े सवाल. 

मेरी जानकारी में आजतक इन मुद्दों पर किसी बड़े चैनल ने कोई बहस नहीं की है। विपक्ष का सबसे बड़ा नेता कई बार बोल चुका है कि हमारे लिए कोई भी लोकतांत्रिक रास्ता नहीं बचा है जिसकी मदद से हम सत्ता में बैठी पार्टी से लड़ सकें। संसद, न्यायपालिका, लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसियां, चुनाव आयोग और मीडिया समेत पूरी मशीनरी पर कब्जा कर लिया गया है। इसकी तह में जाने पर बेहद गंभीर और बुनियादी बहसें होंगी। लेकिन उससे भाजपा को नुकसान होगा। मोदी यह होने नहीं देंगे। यह बहसें सिर्फ मीडिया उठा सकता है और मीडिया का रिमोट मोदी के हाथ में है। 

क्या इस सरकार में हिम्मत है कि वह किसी काम के मुद्दे पर बात करे? क्या 23 करोड़ लोगों के गरीबी रेखा से नीचे जाने पर बात होगी? क्या बढ़ती किसान आत्महत्याओं, बेरोजगारों की आत्महत्याओं, ढह चुकी इकोनॉमी पर बात होगी? नहीं होगी क्योंकि इसे ठीक करने की कूवत नहीं है। वे वर्तमान बिगाड़कर इतिहास ठीक करना चाहते हैं। 

इन मुद्दों को न उठाकर जूता दाढ़ी की बहस को हवा देने का एक मतलब यह भी है कि भाजपा के पास इस यात्रा को लेकर न कोई सवाल है, न किसी सवाल का जवाब है। आपके लिए क्या रास्ता है? सिर्फ दो रास्ते हैं- या तो आवाज उठाइए या फिर अनंत काल के लिए हिंदू-मुसलमान में मशगूल हो जाइए।

Krishna Kant

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