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कमलनाथ के नेतृत्व में शुरू हुए घर-घर चलो अभियान से घबराई भाजपा

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विजया पाठक, एडिटर जगत विजन*
मध्यप्रदेश की राजनीति बहुत दिलचस्प हो गई है, आज के समय में कमलनाथ अगर डाल-डाल तो भाजपा पात-पात वाली स्थिती दिखती है। सरकार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को जितनी सीरियसली ले रही है उससे उनकी ताकत का अंदाजा हो रहा है और आने वाले 2023 के चुनाव में स्थिति का अंदाजा भी दिख रहा है। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में सक्रिय दोनों राजनीतिक पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। पिछला विधानसभा चुनाव जीत कर 15 महीनों के लिए सत्ता पर काबिज हुई पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से पूरे जोर-शोर के साथ जनमत जुटाने के लिए सड़कों पर निकल चुकी है। पिछले चुनावों में हुई गलतियों से सीखते हुए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने घर-घर चलो अभियान शुरू किया है। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान के जरिए कांग्रेस नेता प्रदेश की जनता तक अपनी पहुंच को और मजबूती देने का काम कर रहे है। कांग्रेस पार्टी के इस अभियान ने सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार व उनके नेताओं को सख्ते में ला दिया है।
कमलनाथ को फॉलो किया भाजपा ने, लगातार हो रहा मंथन
कांग्रेस पार्टी द्वारा जनमत जुटाओं इस अभियान की शुरुआती सफलता को देख भाजपा नेता व पार्टी आलाकमान गंभीर विचार मंथन के कार्यों में जुट गई है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा कार्यालयों में केवल कमलनाथ द्वारा शुरू किये गए घर-घर चलो अभियान की सफलता की चर्चाओं का दौर जारी है। अगर कांग्रेस पार्टी का यह अभियान इस गति से ही अपनी सफलता की ओर अग्रसर रहा तो निश्चित ही आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर देने में कामयाब होगी। कांग्रेस नेता कमलनाथ द्वारा चलाए जा रहे अभियान की सफलता को देख अब भारतीय जनता पार्टी ने बूथ विस्तारक अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य यही है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस अभियान की सफलता से डरी हुई है और वो भी बूथ विस्तारक अभियान चलाकर जनमत जुटाने की कोशिश कर रही है। खास बात यह है कि कमलनाथ वो नेता है जो खुद इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। लेकिन भाजपा में फिलहाल ऐसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। भाजपा की स्थिति वर्तमान में कमलनाथ की नीतियों का पीछा करने जैसी हो रही है। इससे पहले भी कांग्रेस पार्टी का जोरदार आई.टी.सेल की काट में भाजपा ने अपना आईटी सेल को ताकतवर बनाने का बहुत प्रयास किया।
कमलनाथ को मीडिया स्‍पेस नही मिलने के लिये सरकार दे रही दबाव
इस समय सरकार की पुरजोर कोशिश यह रहती है की कमलनाथ को मीडिया स्पेस न मिल पाए। पहले या आवरण पृष्‍ठ से खबर को अंदर और छोटा करवाने के लिए सरकार से प्रेशर दिया जाता है। जबकि विगत 16 वर्षों में भाजपा ने कांग्रेस को इतना गंभीरता से नहीं लिया। संगठन के ताजा सर्वे में भी 2023 की स्थिति ठीक नहीं दीखती। इस समय सरकार पूरे तरह अपने ही बनाये मकड़जाल में फंस गई है, सिंधिया कैम्‍प के कारण भितरघात हो, पिछड़ा वर्ग का कार्ड, आदिवासी कार्ड, बेरोजगारी और किसानों की नाराजगी सब भाजपा पर उल्टा पड़ता दिख रहा है। इसी के कारण आलाकमान से मुख्‍यमंत्री बदलने का शिगुफा समय-समय पर छोड़ा जाता है। इसका पूरा श्रेय कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को जाता है। इससे पहले कांग्रेस का संगठन प्रदेश में मजबूत करने के लिये किसी अध्‍यक्ष ने इतना काम पिछले 17 वर्षों में नही किया था, कांग्रेस तीन-चार छत्रपों की पार्टी बन कर रह गई थी। इस बीच कमलनाथ को दो फ्रंटों पर एक साथ लड़ना पड़ा। कांग्रेस के कुछ छत्रपों ने अंदर ही अंदर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष वाले मामले को ऑफ द रिकॉर्ड ब्रीफिंग करके कुछ पत्रकारो के माध्यम से मुद्दा उठवाया जिसे बाद में आलाकमान का विटो प्राप्त होने के बाद खत्म करवाया गया। कुर्सी पाने की लालच में ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनके समर्थित मंत्रियों ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। जिसके कारण कमलनाथ ने नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार 15 महीने में ही सत्ता से बाहर हो गई थी। कमलनाथ की नेतृत्व क्षमता का ही यह परिणाम है कि वो रुके नहीं और लगातार उन्होंने संघर्ष करते हुए प्रदेश की जनता के बीच अपने सकरात्मक छवि बनाने में कामयाबी हासिल की। उसी का परिणाम है कि अब कमलनाथ के नेतृत्व में पूरी कांग्रेस पार्टी घर-घर चलो अभियान के जरिए जनता के सामने एकजुटता का संदेश देना चाहते है। आज कांग्रेस की पूरे प्रदेश में ऐसी स्थिति बन गई है की आज के दिन चुनाव होने की स्थिति में कांग्रेस की सरकार बन जाएगी।

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