भीम शर्मा विश्वकर्मा
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के जो बागी विधायक गुवाहाटी में ठहरे हुए हैं, वें उद्धव ठाकरे द्वारा बार-बार मुंबई बुलाए जाने के बावजूद नहीं आ रहे हैं। क्योंकि उन्हें भय है कि मुंबई आने पर वें सुरक्षित नहीं रहेंगे। वास्तविकता यह है कि इन बागी विधायकों के मुंबई आए बिना उद्धव सरकार के भाग्य का फैसला नहीं हो सकता। अगर एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के दो-तिहाई बागी विधायक हैं तो विधानसभा के फ्लोर पर इन्हें भाजपा विधायकों के साथ अपना बहुमत स्थापित करना होगा। गुवाहाटी में बैठकर राज्यपाल को पत्र लिखकर एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे सरकार को गिरा नहीं सकते। इसके लिए महाराष्ट्र विधानसभा में अविश्वास/विश्वास प्रस्ताव का पेश होना अनिवार्य है और इन दोनों में से किसी एक प्रस्ताव के पेश होने पर सदन के सभी विधायकों को पक्ष-विपक्ष में वोट देना होगा। यदि बागी विधायक भय की वजह से मुंबई नहीं आते हैं और उद्धव ठाकरे के शिवसेना ग्रुप द्वारा विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया जाता है तो इस प्रस्ताव के विरोध में सिर्फ भाजपा विधायकों का ही वोट पड़ेगा, जिनकी संख्या 106-113 है। जबकि महा विकास अघाड़ी के पक्ष में 127 वोट पड़ेंगे (उद्धव ठाकरे के साथ रह गए शिवसैनिकों की संख्या 14, एनसीपी विधायकों की संख्या 53, कांग्रेसी विधायकों की संख्या 44 और अन्य बीवीए के 3, एसपी के 2, पीजेपी के 2, पीडब्ल्यूपीआई का 1, निर्दलीय 8 कुल योग 127)। इस प्रकार महाअघाड़ी सरकार विश्वास मत जीत जाएगी। यह एक संभावना है। यह निश्चित लग रहा है कि बागी विधायक मुंबई आने का साहस नहीं कर सकते और उनके मुंबई आकर विधानसभा में विश्वास/अविश्वास प्रस्ताव पेश होने की संभावना नहीं है। ऐसी स्थिति में महाविकास अघाड़ी सरकार नहीं गिर सकती और इस प्रकार भाजपा का सारा खेल चौपट हो सकता है। शिवसैनिकों के तेवर यह बता रहे हैं कि भाजपा उद्धव सरकार को गिराने के अपने खेल में सफल नहीं हो पाएगी। जैसा कि ये उत्तराखंड, गोवा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकारों को गिराकर अपनी सरकार बनाने में सफल हुई। इधर शिवसैनिक पूरे महाराष्ट्र में बागी विधायकों के दफ्तरों पर तोड़फोड़ कर रहे हैं, इससे गुवाहाटी में बैठे बागी विधायकों का डर और बढ़ रहा होगा। इसलिए उनमें मुंबई वापस आने का बचाकुचा साहस भी समाप्त हो रहा होगा। बागी विधायक अगर मुंबई आ जाते हैं तो उन्हें मुंबई पुलिस से सुरक्षा पाने की संभावना कम है। हो सकता है कि मुंबई पुलिस नाममात्र के लिए उन्हें सुरक्षा प्रदान कर दे और उद्धव ठाकरे के शिवसैनिकों को अपना काम करने की छूट दे दे। यह सारी संभावनाएं हैं। यह संभावनाएं क्या रुख अपनाती हैं यह इस बात पर निर्भर है कि एकनाथ शिंदे (विभीषण) के नेतृत्व में बगावत का परचम बुलंद करने वाले शिवसेना के बागी विधायक मुंबई आएं। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि एकनाथ शिंदे को मुंबई आने के लिए उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपनी बगावत को समाप्त करना होगा और उनसे माफी मांगना होगा।

