मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार की ‘विकास यात्रा’ में अजब-गजब नजारे देखने को मिल रहे हैं। कहीं सरकार के नुमाइंदों को पब्लिक के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है, तो कहीं फजीहत झेलना पड़ रही है। ऐसे में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं, जो विकास यात्रा के बहाने ‘सरकार’ को अपना पावर दिखा रहे हैं। बीजेपी के पंडित जी भी इसमें पीछे नहीं रहे।
हुआ यूं कि विकास यात्रा में बीजेपी के पंडित जी जब अपने क्षेत्र की सड़कों पर निकले तो उन्हें 500 किलो वजनी माला पहनाई गई, वो भी बुलडोजर से। बकायदा दो बुलडोजर से माला तानी गई, जिसे पहनने के लिए बीजेपी के पंडित जी को भी बुलडोजर पर चढ़ना पड़ा। जबकि ‘सरकार’ बुलडोजर का इस्तेमाल अपराधियों और माफिया के अवैध ठिकाने ध्वस्त करने में करते हैं।
इतना ही नहीं पंडित जी को उनके समर्थक ने बग्घी में बैठाया। ऐसा लगा जैसे ये कोई बारात हो, जिसमें पंडित जी दूल्हा और समर्थक बाराती बने। इसके पीछे का राज उनके एक समर्थक ने बताया- विकास यात्रा के दौरान कई मंत्रियों-विधायकों को जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ा, लेकिन हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हमारे पंडित जी का जलवा बरकरार है और आगे भी रहेगा।
पंडित जी की तरह ‘महाराज’ के एक समर्थक मंत्री ने भी ‘सरकार’ को संदेश दे दिया। उन्होंने ‘महाराज’ को ‘राम’ और खुद को उनका ‘हनुमान’ बताया। मंत्रीजी ने अपने भाषण में कहा कि जिस दिन से आपने (महाराज) भाजपा की कमान संभाली और मुझे मंत्री का कार्यभार सौंपा है, आज मैं कह सकता हूं कि जो मेरे राम ने मुझे कार्य बताए थे, वो समस्त कार्य उनके हनुमान ने करके दिखाए हैं। डंके की चोट पर करके दिखाए हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि आपके परिवार ने मुझे मिट्टी से उठाकर आसमान में बैठा दिया, इस अहसान को मैं मरते दम तक नहीं भूलूंगा। ऐसे में दूसरे मंत्री कैसे पीछे रहते। उन्होंने मंच पर ‘महाराज’ के चरणों को छूकर प्रणाम किया। बता दें कि ‘महाराज’ को ‘राम’ बताने वाले मंत्री ‘सरकार’ को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
इस पूरे घटनाक्रम पर एक बीजेपी के नेता ने ‘सरकार’ के करीबी से पूछ लिया कि पार्टी की इस ‘रामलीला’ के पात्रों में ‘सरकार’ का क्या रोल है? इस पर आई टिप्पणी से नेताजी ने दोबारा कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने कहा – कोई किसी को राम बताए या फिर खुद को हनुमान या पांव छूकर लक्ष्मण…। हमारे ‘सरकार’ तो विश्वामित्र हैं। जो राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांग कर लाए थे और ताड़का जैसे राक्षकों का वध कराया था। साफ है इशारा कमलनाथ की सरकार गिराने की तरफ था।
जब ‘महाराज’ समर्थक मंत्री ने ‘सरकार’ के जोड़े हाथ
किसी बात को वहीं विराम देना हो या किसी बहस को रोकना हो, तो हाथ जोड़ना कारगर तरीका होता है। मतलब मुझे माफ कर दो और बात खत्म। ‘सरकार’ के सामने भरी महफिल में रुसवाई से बचने के लिए ‘महाराज’ समर्थक एक मंत्री ने कुछ ऐसी ही समझदारी दिखाई।
हुआ यह कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पौधरोपण अभियान के 2 साल पूरे हुए थे। इस मौके पर भोपाल एयरपोर्ट के नजदीक राम वन में सीएम के साथ सभी मंत्रियों ने भी पौधे लगाए। इस कार्यक्रम में 9 मंत्री लेट पहुंचे। कुछ देर तक तो इनका इंतजार किया गया, बाद में सीएम ने कार्यक्रम शुरू करवा दिया।
सुना है कि ‘महाराज’ समर्थक एक मंत्री भी उस समय कार्यक्रम में देरी से पहुंचे। जब वो आए उस वक्त मुख्यमंत्री का संबोधन चल रहा था। मुख्यमंत्री ने मंच से उनसे कह दिया कि आपके नाम का पौधा हमने लगवा दिया है, इस पर मंत्रीजी थोड़ा असहज हो गए। डरे भी कि मुख्यमंत्री कुछ और ना बोल दें, इसलिए उन्होंने फौरन हाथ जोड़ लिए… मुझे माफ कर दो..।
कलेक्टर पर फूटा विकास यात्रा में भीड़ नहीं जुटने का ठीकरा
सूबे में सरकार विकास यात्रा क्या निकाल रही, अफसरों पर मानो आफत आ गई। मालवा के एक जिले में इसी बहाने एक कलेक्टर की विदाई हो गई। मंत्री ने विकास यात्रा में भीड़ नहीं जुटने का ठिकरा उन पर फोड़ दिया।
मंत्री कई बार इस कलेक्टर की शिकायत कर चुके थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सुना है कि मंत्रीजी को मौके की तलाश थी, उन्होंने उसे लपक लिया। कैबिनेट की बैठक में जब विकास यात्रा की बात निकली तो सबसे पहले मंत्रीजी ने कह दिया- हमारे जिले में कलेक्टर की वजह से यात्रा में भीड़ नहीं जुट पा रही है। मंत्रीजी ने बकायदा प्रमाण दिए। फिर क्या था, कलेक्टर की विदाई हो गई। इतना ही नहीं, उन्हें उस विभाग के एक बोर्ड की कमान सौंप दी गई, जिसके मंत्री से कलेक्टर की पहले से अनबन है।
‘लक्ष्मण’ रेखा पार करेगा कांग्रेस का ‘हीरा’
कांग्रेस की हालत ऐसी है कि पार्टी जब भी कोई नियुक्ति करती है, कोई ना कोई विवाद हो जाता है। इस बार AICC ने मध्यप्रदेश के 99 सदस्यों की सूची जारी की, तो इस पर भी बवाल हो गया। विधायक लक्ष्मण सिंह ने आदिवासी नेता हीरालाल अलावा की उपेक्षा का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पार्टी को खुलेआम नसीहत दे दी- कहा कि रायपुर में हो रहे अधिवेशन में मेरी जगह हीरालाल अलावा को न्योता दिया जाए। वह बड़े आदिवासी नेता हैं, उनकी मदद से पहले भी सरकार बनी थी।
सुना है कि हीरालाल का नाम AICC सदस्यों की सूची में नहीं होने के पीछे प्रदेश के सबसे कद्दावर कांग्रेस नेता की नाराजगी थी, जिसने अपने समर्थक आदिवासी पूर्व मंत्री का कद बढ़ाने के लिए हीरालाल का नाम नहीं भेजा। अलावा की इस अपेक्षा का फायदा उठाने बीजेपी के कुछ नेताओं ने फील्डिंग शुरू कर दी है। क्या अलावा कांग्रेस की ‘लक्ष्मण’ रेखा पार करेंगे? यह देखना अभी बाकी है।
मंत्री के ब्लू आई दो अफसरों को अभयदान
वन विभाग ने गुरुवार को आईएफएस अधिकारियों की पदस्थापना का आदेश जारी किया। इस सूची में उम्मीद की जा रही थी कि कैडर में स्वीकृत पद के विरुद्ध सर्किल में पदस्थ दो एपीसीसीएफ को हटा दिया जाएगा। इनमें से एक को उज्जैन और दूसरे का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व मुख्यालय में पदस्थ होना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। सुना है कि रसूखदार दोनों ही अफसर वन मंत्री के ब्लू आई माने जाते हैं, इसलिए उन्हें एक बार फिर अभयदान दे दिया गया।
और अंत में…
फोटो नहीं छपने पर साहिबा नाराज
भोपाल में पिछले दिनों आईएफएस मीट हुई थी। इस दौरान कई अफसरों की तस्वीरें उनकी पत्नियों के साथ छपी। सुना है कि एक सीनियर अफसर की ‘साहिबा’ की तस्वीर अखबारों में प्रकाशित नहीं हो पाई। इस पर उन्होंने अपने पति से कहा कि प्रेस वालों को फोटो किसने भेजे हैं, उनकी क्लास लो, क्योंकि हम दोनों के फोटो तो छपे ही नहीं है। जबकि आप बड़े अफसर हो, ऐसे में हमारी फोटो तो प्राथमिकता से छपनी चाहिए थी। अब बेचारे अफसर अपनी सफाई देते फिर रहे हैं।

