★ पतंजलि दंत मंजन में मछली की हड्डियां मिलाने का आरोप
★ मंजन में मांसाहारी वस्तु के उपयोग के लिए जैन समुदाय की महिला वकील ने भेजा नोटिस
मांसाहार विरोधियों के दबाव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समस्त खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में चौकोर सी आकृति के अंदर डॉट का हरा निशान छापना अनिवार्य है। अगर पैकेट पर ऐसा निशान दिखाई नहीं देता है, तो इसका मतलब है कि वह खाद्य पदार्थ पूरी तरह से शाकाहारी नहीं है। ऐसी स्थिति में उसकी जगह पर हरे की बजाय लाल रंग का डॉट होना चाहिए।
इधर हाल ही में संन्यासियों जैसे कपड़े पहनने वाले कॉरपोरेट व्यवसाई रामदेव की कंपनी पतंजलि के दिव्य दंत मंजन को लेकर आई खबर ने सभी को हैरान कर दिया है।
बाबा रामदेव की पतंजलि पर अपने शाकाहारी प्रोडक्ट में ‘मांसाहार सामग्री’ इस्तेमाल करने का आरोप लगा है. दिल्ली की एक वकील साशा जैन ने इस आरोप के साथ पतंजलि को नोटिस भेजा है. वकील का कहना है कि पतंजलि ने दिव्य दंत मंजन में ‘कटलफिश का इस्तेमाल’ किया है, जबकि मंजन की पैकेजिंग पर कंपनी ने हरा साइन लगाया है, जो प्रोडक्ट के पूरी तरह से शाकाहारी होने का साइन है.
पतंजलि को उसके दंत चिकित्सा उत्पादों में से एक दिव्य दंत मंजन में मछली की हड्डियों का इस्तेमाल करने को लेकर वकील शाशा जैन द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया है। उन्होंने अपने इस नोटिस में पतंजलि से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि कंपनी हरे रंग यानी शाकाहार का लेबल लगे उत्पाद में समुद्री फेन यानी Cuttlefish जैसे मांसाहारी घटक का उपयोग क्यों कर रही है?
दिल्ली स्थित बीएलजे लॉ फर्म के नाम से भेजे गए नोटिस में साशा जैन ने लिखा है,
– आपकी कंपनी ‘दिव्य दंत मंजन’ में भ्रामक रूप से समुद्र फेन (कटल मछली) का इस्तेमाल कर रही है. जबकि आपने इस प्रोडक्ट पर हरा मार्क लगाया है, जो इसके शाकाहारी प्रोडक्ट होने का सूचक है.
– मांसाहारी वस्तु समुद्र फेन का इस्तेमाल करने के बाद ‘दिव्य दंत मंजन’ को शाकाहारी प्रोडक्ट की तरह बेचना उपभोक्ता अधिकार और लेबलिंग के नियमों का उल्लंघन है.
– मेरे परिवार के कई लोग, रिश्तेदार, दोस्त और साथ काम करने वाले लोग दिव्य दंत मंजन यूज़ करते हैं. ये जानकर इन सब लोगों की धार्मिक भावना आहत भी हुई है. मैं खुद आपके कई प्रोडक्ट्स यूज़ करती हूं, पर जब तक आपसे इस मामले में सफाई नहीं आती, मुझे आपके प्रोडक्ट्स यूज़ करने में झिझक हो रही है.
– स्वामी रामदेव इस कंपनी की शुरुआत से इसका चेहरा रहे हैं. इस वजह से आपके प्रोडक्ट्स पूरे देश में काफी प्रसिद्ध हैं. लोग स्वामी रामदेव पर अंधा भरोसा कर आपके प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं. आपकी नीतियों और पारदर्शिता अव्वल दर्जे की होनी चाहिए. एक ऐसा प्रोडक्ट जिसमें मछली का इस्तेमाल होता है, उस पर ग्रीन मार्क लगाना इसके खिलाफ है.
Issued legal notice to Patanjali, seeking clarifications on the deceptive use of Samudra phen (cuttlefish) in its product Divya Dant Manjan, while labeling it as green. This infringes upon r consumer rights & is deeply offensive to our community and other vegetarian communities. pic.twitter.com/J4JOX7Ninm
शाशा जैन ने इस नोटिस और अपनी बात को प्रमाणित करने वाले सभी दस्तावेज ट्विटर पर शेयर किये हैं।
पतंजलि के उपरोक्त उत्पाद में सामग्री की सूची में ‘Samundra Fen’ (सेपिया ऑफिसिनैलिस) शामिल है, जिसे आम तौर पर कटलफिश के रूप में जाना जाता है।
जैन ने नोटिस में कहा कि उत्पाद में एक मांसाहारी घटक समुद्र फेन का उपयोग और इसे शाकाहारी उत्पाद के रूप में बेचने से उपभोक्ताओं के अधिकारों और उक्त श्रेणी के उत्पादों के लिए लेबलिंग नियमों का उल्लंघन होता है।
हालांकि आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं के अंगों का प्रयोग करने का प्रावधान है लेकिन इसके बावजूद भी पैकेजिंग के लिए निर्धारित नियम-क़ानूनों का पालन करना अनिवार्य है तो पतंजलि की कंपनी इन नियम-क़ानूनों का उल्लंघन कैसे कर सकती है।
नोटिस देखने के बाद पतंजलि की वेबसाइट पर दिव्य दंत मंजल में इस्तेमाल होने वाली चीजों की जानकारी ली. सामग्री सूची में हमने पाया कि इस उत्पाद में 4.40 ग्राम समुद्र फेन का इस्तेमाल हुआ है.
समुद्र फेन कटलफिश की हड्डियों से निकाला गया एक पदार्थ है. इसे ‘सेपिया ऑफिसिनैलिस’ के साइंटिफिक नाम से जाना जाता है. इसमें कैल्शियम कार्बोनेट, फॉस्फेट, सल्फेट और सिलिका पाया जाता है, जिसका उपयोग दांत के प्रोडक्ट्स में होता है.
साशा के इस ट्वीट के बाद ही सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस चीज़ को उजागर करने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया. हालांकि कुछ का कहना है कि समुद्र फेन को नॉनवेज सामग्री नहीं कहा जा सकता. मसलन, ‘राष्ट्रवादी’ नाम के एक ट्विटर अकाउंट से लिखा गया,
ये शायद सीप का शेल कवर होता है, उसे नॉनवेज नहीं कह सकते हैं. अगर वो नॉनवेज है तो फिर तो समुद्री नमक, पहाड़ी सेंधा नमक और झीलों से बनने वाला नमक भी पूरा का पूरा नॉनवेज ही है.
ये शायद सीप का शेल कवर होता है उसे नोनवेज नहीं कह सकते हैं अगर वो नोनवेज है तो फिर तो समुद्री नमक और पहाडी सेंधा नमक और झीलों से बनने वाला नमक भी पूरा का पूरा नोनवेज ही है API का भी बहुत सारा कंटेंट भी नानवेज होगा पर चुंकि वो पाउडर फार्म में होता है और उससे वेज दवा बनती है 🙏
हमने मामले पर पतंजलि का पक्ष जानने के लिए कंपनी से वॉट्सऐप और कॉल के जरिए संपर्क साधने की कोशिश की थी. लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.