निर्मल कुमार शर्मा
इस धरती पर रहनेवाली मनुष्य प्रजाति अपनी अत्यंत छुद्र बुद्धि,बल और अपनी अनावश्यक हिंसा आदि के बल पर इतना मदांध हो चुका है,कि इस धरती के ही दूसरे छोर पर ही अत्यंत शांतिपूर्वक अपना जीवन जी रहे मनुष्यों सहित अन्य लाखों जीवों व वानस्पतिक प्रजातियों या यूं कहें कि इस धरती के समस्त जैवमण्डल के लिए ही जबरदस्त खतरा बन गया है ! परन्तु हम मनुष्य प्रजाति के इस तुच्छ दंभ,बल और बुद्धि की तुच्छता की औकात बताने के लिए हमारा ब्रह्माण्ड ही पर्याप्त है ! आज वर्तमान समय की कथित वैज्ञानिक युग में जी रही मनुष्य प्रजाति जितनी सोच भी नहीं सकती उससे भी बहुत ज्यादा विशाल,अनन्त,अद्भुत रहस्यों और विचित्रताओं से भरा पड़ा हमारा ब्रह्माण्ड है ! आपको जानकर बहुत ही हैरानी होगी कि हमारी आकाशगंगा जिसे अंग्रेजी में मिल्की गैलेक्सी वे या Milky Galaxy Way भी कहते हैं,ही इतनी विराट और विशाल है कि इसकी मोटाई वाले भाग में एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने में प्रकाश को पूरे 1000 वर्ष लग जाते हैं,जबकि इसके चपटे सर्पिलाकार गोलाई के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने में प्रकाश को भी पूरे 100000वर्ष मतलब एक लाख वर्ष लग जाते हैं, खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार हमारी आकाशगंगा में ही लगभग 2खरब तो तारे विद्यमान हैं ! तारों की इस अगणित संख्या से इसमें अवस्थित ग्रहों,उपग्रहों,छुद्रग्रहों आदि की संख्या का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है ! इस पूरे ब्रह्माण्ड में हमारी आकाशगंगा जैसी एक खरब अन्य आकाशगंगाएं भी हैं,जिनका फैलाव इतना है कि उस दूरी को पार करने में प्रकाश को भी 93अरब वर्ष लग जाते हैं !पूरे ब्रह्माण्ड की तो बात ही छोड़ दीजिए,हमारी आकाशगंगा ही इतने रहस्यों और अबूझ पहेलियों से भरी पड़ी है,जिन्हें आज के आधुनिकतम् विज्ञान के युग में भी खगोल वैज्ञानिक अभी तक ढूंढ़ नहीं पाए हैं !
ऐसे ही रहस्यों से भरपूर तीन तारों के एक अद्भुत समूह को मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी या Massachusetts Institute of Technology के खगोल वैज्ञानिकों ने हमारी धरती से लगभग 3000 से 4000 प्रकाशवर्ष दूर एक ऐसे खूंख्वार तारे की खोज किए हैं,जो अपने निकटवर्ती तारे का ही तेजी से भक्षण कर रहा है ! इसीलिए खगोल वैज्ञानिकों ने इसका नाम ब्लैक विडो तारा या ZTFJ1406+1222 तारा रखा है। यह ब्लैक विडो तारा और इसके सहयोगी तारे मात्र प्रति 62मिनट में एक-दूसरे का चक्कर लगा लेते हैं !
‘ब्लैक विडो ‘ शब्द उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप में पाई जाने वाली एक खूंख्वार मकड़ी के नाम से लिया गया है,जो अपने साथी प्रियतम् नर का ही भक्षण करके विडो यानि विधवा हो जाती है ! यह तीन तारों का एक अद्भुत समूह वाला सिस्टम है, क्योंकि ये दोनों तारे एक तीसरे तारे को भी अपने जबर्दस्त गुरुत्वाकर्षण बल से बांधे रहते हैं,यह तीसरा तारा प्रति 10000 वर्षों में एक बार अपने दोनों आंतरिक युग्म तारों की परिक्रमा करता है !
खगोल वैज्ञानिकों के लिए भी इन तीन तारों का अद्भुत सिस्टम एक गूढ़ प्रश्न पैदा करता है कि आखिर इस प्रकार का सिस्टम बनना संभव कैसे हुआ होगा ! मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी या Massachusetts Institute of Technology के खगोल वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र में यह सुझाव प्रस्तुत किया है कि यह सिस्टम संभवतः ग्लोबल क्लस्टर के रूप में पहचाने जाने वाले पुराने तारों के अतिघने तारामण्डल से पैदा हुआ होगा,एक दूसरी संभावना यह भी है कि किसी खगोलीय घटना या दुर्घटना की वजह से यह तीन युग्म तारों का सिस्टम अपने क्लस्टर से खरबों किलोमीटर दूर आकाश गंगा में भटक गया हो !
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह तेजी से घूमनेवाला एक पल्सर या न्यूट्रान तारा भी संभाव्य है । ब्लैक विडो तारा एक अत्यंत दुर्लभ तारा होता है, क्योंकि खरबों तारों युक्त हमारी पूरी आकाशगंगा मे इस तरह के केवल 24 ब्लैक विडो तारों की खोज ही हो पाई है ! मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी या Massachusetts Institute of Technology के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के प्रमुख वैज्ञानिक ने संभावना जताई है कि इन तीन तारों का अद्भुत सिस्टम हमारी आकाशगंगा में सूर्य के भी अस्तित्व में आने से पूर्व से ही मौजूद रहा हो ! यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित शोध पत्र वैश्विक लब्धप्रतिष्ठित पत्रिका नेचर जर्नल में अभी पिछले दिनों प्रकाशित हुआ है, वैज्ञानिकों ने इन तीन तारों के युग्म को खोजने के लिए एक बिल्कुल नये तरीके को अपनाया है,जिस तरीके में विजिबल लाइट का इस्तेमाल किया जाता है ।
-निर्मल कुमार शर्मा 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक,पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र, निष्पक्ष,बेखौफ,आमजनहितैषी,न्यायोचित व समसामयिक लेखन

